यूपी सरकार का बड़ा फैसला, पुस्तकालयों में पुस्तकों की खरीद और आपूर्ति की होगी जांच, फर्जी बिल लगाने वालों में हड़कंप

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Published By Anjali Singh
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-समग्र शिक्षा व पीएमश्री योजना के तहत पुस्तकों की जिलेवार खरीद का मामला गरमाया -सत्यापन के लिए सभी जिलों से मांगा गया प्रमाणित विवरण, अभिलेखों से होगा मिलान

लखनऊ, अमृत विचार: परिषदीय विद्यालयों के पुस्तकालयों के लिए खरीदी गई पुस्तकों की आपूर्ति और भुगतान की वास्तविक स्थिति अब जिलेवार परखी जाएगी। योगी सरकार ने समग्र शिक्षा और पीएम श्री योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में चयनित विद्यालयों के लिए खरीदी गई पुस्तकों का सत्यापन कराने का फैसला किया है। इसके लिए सभी जिलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर प्रमाणित विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है। शासन स्तर पर समीक्षा के बाद यह स्पष्ट होगा कि पुस्तकों की आपूर्ति और भुगतान निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं।

सरकार का मानना है कि विद्यालयों में पुस्तकालय केवल औपचारिक व्यवस्था न बनकर विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन का प्रभावी माध्यम बनें। इसी उद्देश्य से पुस्तकों की खरीद, आपूर्ति और भुगतान संबंधी अभिलेखों का मिलान कराया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि चयनित प्रकाशकों और आपूर्तिकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरणों का जनपद स्तर पर उपलब्ध अभिलेखों से सत्यापन कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाए।

शासन को प्राप्त होने वाली रिपोर्ट के आधार पर पुस्तकों की उपलब्धता, भुगतान की स्थिति और संसाधनों के उपयोग का आकलन किया जाएगा। इससे यह भी पता चल सकेगा कि जिन विद्यालयों के लिए पुस्तकें खरीदी गई हैं, वहां तक उनका लाभ वास्तव में पहुंचा है या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया भविष्य में संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का आधार बनेगी।

प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से शिक्षा विभाग में तकनीक आधारित निगरानी और डेटा आधारित अनुश्रवण व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसी क्रम में यह पहल भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शासन का उद्देश्य केवल बजट खर्च करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा से जुड़े संसाधनों का लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचे और योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद शासन स्तर पर विस्तृत समीक्षा की जाएगी। यदि कहीं अभिलेखों और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है तो उसके संबंध में आवश्यक कार्रवाई भी की जा सकती है। इससे विद्यालयों में उपलब्ध कराए जा रहे शैक्षणिक संसाधनों की निगरानी और अधिक प्रभावी होगी।

विद्यालय में पुस्तकालय को मजबूत बनाने पर फोकस

प्रदेश सरकार विद्यालयों में पठन-पाठन का वातावरण बेहतर बनाने के लिए पुस्तकालयों को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दे रही है। विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न विषयों की पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार का मानना है कि मजबूत पुस्तकालय विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अभिलेखों से होगा प्रकाशकों के दावों का मिलान

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रकाशकों और आपूर्तिकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरणों का स्थानीय अभिलेखों से मिलान करें। सत्यापन के बाद प्रमाणित रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इससे पुस्तकों की आपूर्ति और भुगतान संबंधी दावों की वास्तविकता सामने आएगी तथा निगरानी व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

जवाबदेही तय करने में मिलेगी मदद

शिक्षा विभाग का मानना है कि सत्यापन प्रक्रिया से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि विद्यार्थियों के लिए स्वीकृत संसाधनों का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हो रहा है। इससे प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होगी और भविष्य में किसी भी प्रकार की विसंगति पर समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी।

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