UP News: 110 ग्राम संगठनों में सिर्फ 23 को मिला 4 करोड़ का ऋण, चहेतों को लाभ पहुंचाने का आरोप

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। विकासखंड निघासन में एनआरएलएम के बेलरायां क्लस्टर में कथित फर्जीवाड़े और गबन के मामले में रोज नए खुलासे सामने आ रहे हैं। ग्राम संगठनों से जुड़ी महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि क्लस्टर में कुल 110 ग्राम संगठन संचालित हैं, लेकिन इनमें से केवल 23 संगठनों को ही 4 करोड़ रुपये से अधिक का सामान्य ऋण वितरित किया गया है। इससे शेष संगठनों की महिलाओं को योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ा।

महिलाओं का आरोप है कि जिन 23 संगठनों को ऋण उपलब्ध कराया गया। उनमें अधिकांश संगठन सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) के पदाधिकारियों के रिश्तेदारों, करीबी लोगों और चहेतों से जुड़े हैं। आरोप है कि ऋण वितरण में पारदर्शिता नहीं बरती गई और नियमों को दरकिनार कर चुनिंदा संगठनों को ही लाभ पहुंचाया गया। महिलाओं का कहना है कि सामान्य ऋण का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था, लेकिन बड़ी धनराशि कुछ लोगों तक सीमित रह गई। 

महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि वितरित किए गए ऋण का एक हिस्सा संगठनों की कुछ पदाधिकारियों द्वारा निजी कार्यों और व्यक्तिगत जरूरतों पर खर्च किया गया, जिससे योजना के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंचा है। प्रभावित महिलाओं ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि वित्तीय अनियमितताओं और पक्षपात की जांच कराई जाए तो करोड़ों रुपये के ऋण वितरण में हुए कथित गड़बड़झाले की सच्चाई सामने आ सकती है। महिलाओं ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तथा सभी ग्राम संगठनों को समान अवसर और पारदर्शी तरीके से लाभ उपलब्ध कराने की भी मांग की है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल गर्म है और ग्रामीण जांच की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं।

इन ग्राम संगठनों को दिया गया ऋण 
मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र के मुताबिक बेलरायां स्थित ग्राम संगठन खुशी को 35 लाख, दीपक 28,57,299, सिंगहा के गायत्री 15 लाख, साधना 23,03,868, प्रवित्र 12 लाख, खैरीगढ़ के पवन 11,05,200, शीतल 08,04,990, हरद्वाही के भारत 16,57000, शमा 5 लाख, चितिहा के आकाश 19,25,700, उमरा के विशाल 13 लाख, प्रकाश 22,80,000, निबौरिया के महक 19, 69,400, गंगानगर के छाया 7,50,000, सफल 3,32,500, कड़िया का दिया, सिंगहा का हैप्पी 20,50,000, आकृति 11 लाख, निर्मल 8,80,000, साईं प्रेरणा 14 लाख, चौगुर्जी का जय भीम 15 लाख, दरेहटी के श्रीओम को 08 लाख समेत सभी 23 संगठनों को मिलाकर कुल चार करोड़ 39 हजार 809 रुपये का ऋण वितरित किया गया है, लेकिन इस ऋण से धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। आरोप है कि अधिकतर ऋण का उपयोग निजी खर्च पर किया गया है। महिलाओं ने कथित समूहों के खातों की जांच कराए जाने की पुरजोर मांग की है।       

एक से दो प्रतिशत कमीशन लेकर दिया ऋण
लालापुर, हरद्वाही, सिंगहाखुर्द, नौरंगाबाद सहित कई गांवों की महिलाओं का आरोप है कि जिन 23 ग्राम संगठनों को ऋण दिया गया है। उनसे एक से दो प्रतिशत कमीशन लिया गया है। जिन्होंने कमीशन देने से साफ इंकार कर दिया। उन्हें ऋण से वंचित कर दिया गया। इसको लेकर भी महिलाओं में खासी नाराजगी है। महिलाओं ने समूह की पदाधिकारियों की वर्ष 2023 के बाद की चल व अचल संपत्ति की जांच की भी मांग उठाई है। 

ज्ञान प्रेरणा समूह से निजी खाते में भेजे नौ लाख रुपये 
ज्ञान प्रेरणा संगठन सिंगहा खुर्द से मनोरमा अवस्थी के खाते में 30 जनवरी 2025 को नौ लाख रुपये सीधे ट्रांसफर किए गए हैं। इसी तरह से कई अन्य संगठनों की महिलाओं के खातों में लाखों की धनराशि भेजी गई। एनआरएलएम के अधिकारियों ने बताया कि ग्राम संगठन का पैसा किसी के निजी खाते में नहीं भेजा जा सकता है। विभाग अब पूरे प्रकरण की जांच कराने की बात कह रहा है।  डीसी एनआरएलएम जितेंद्र कुमार मिश्र ने बताया कि पूरे मामले की तीन सदस्यीय टीम जांच कर रही है। अभी रिपोर्ट नहीं आई है। प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच के लिए कमेटी का भी गठन होना है, जो जल्द ही गठित हो जाएगी।   

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