केजीएमयू  न्यूज़ : दीक्षांत में आएंगे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वार्डों में गर्मी का कहर, लारी कार्डियोलॉजी में स्टेंट घोटाले की जांच तेज

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

लखनऊ, अमृत विचार : किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) का 2026 का दीक्षांत समारोह 13 जुलाई को अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होगा। समारोह के मुख्य वक्ता के रूप में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल होंगे। 

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी मेधावियों को सम्मानित

वहीं प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि के रूप में मेधावी छात्रों को पदक प्रदान करेंगी।

13 जुलाई को होगा समारोह

विश्वविद्यालय प्रशासन ने समारोह की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस दौरान विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि इस वर्ष 25 मेधावियों को हीवेट मेडल, चांसलर मेडल समेत विभिन्न प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।

पहली बार पीजी छात्रों को नहीं मिलेंगे पदक

इस बार पहली बार स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों के मेधावी छात्रों को पदक नहीं मिल सकेंगे। विश्वविद्यालय के अनुसार पीजी परीक्षाएं समय पर न होने से मेधावियों का चयन नहीं हो पाया। इसके चलते पीजी छात्र पदकों की दौड़ से बाहर हो गए हैं, जिससे उनमें निराशा देखी जा रही है।

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में वार्डों की नियमित निगरानी न होने का खामियाजा भर्ती मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच मरीजों के लिए पर्याप्त राहत के इंतजाम नहीं हैं। हालात ऐसे हैं कि कई मरीज हाथ के पंखों और निजी टेबल फैन के सहारे दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं। यूरोलॉजी विभाग में अव्यवस्थाओं को लेकर किसी तीमारदार ने वीडियो बनाकर वायरल करा नराजगी जताई है।

पुराने पंखे नहीं दे पा रहे राहत, डॉक्टरों के कमरों में एसी तो मरीज बेहाल

यूरोलॉजी विभाग के वार्डों में लगे पुराने पंखे गर्मी से राहत देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि कई पंखे वर्षों पुराने हैं और उनकी हवा भी पर्याप्त नहीं है। नतीजतन मरीज उमस और गर्मी से परेशान हैं। वार्डों में भर्ती मरीजों के परिजन हाथ के पंखों से हवा कर उन्हें राहत पहुंचाने की कोशिश करते नजर आते हैं। कुछ मरीजों ने अपनी सुविधा के लिए बेड के पास निजी टेबल फैन तक लगा रखे हैं। इसके बावजूद गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है।

तीमारदारों ने वीडियो वायरल कर जताई नाराजगी

तीमारदारों का आरोप है कि एक ओर मरीज गर्मी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों और कर्मचारियों के कमरों में एयर कंडीशनर की सुविधा उपलब्ध है। उनका कहना है कि हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी सरकारी अस्पतालों में मरीजों को गर्मी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन केजीएमयू में इन निर्देशों का पालन धरातल पर नजर नहीं आ रहा है। मरीजों और परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से वार्डों में बेहतर पंखे, कूलर व अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की मांग की है ताकि भर्ती मरीजों को राहत मिल सके।

केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा कि वार्डों की स्थिति का निरीक्षण कराया जाएगा। जहां भी कमियां पाई जाएंगी, उन्हें दूर किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मरीजों को

 केजीएमयू लारी कार्डियोलॉजी में स्टेंट घोटाले की जांच तेज

केजीएमयू के लारी कार्डियोलॉजी विभाग में कथित अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है, जहां करीब 15 मरीजों को अलग-अलग समय पर पांच-पांच स्टेंट लगाए जाने के आरोपों की जांच तेज कर दी गई है। मामले को गंभीर मानते हुए गठित पांच सदस्यीय जांच समिति ने विभाग से पिछले एक वर्ष के दौरान हुई सभी एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्रत्यारोपण का विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है।

आयुष्मान भारत योजना में अनियमितताओं के शक पर पांच सदस्यीय समिति ने तलब किया पूरा रिकॉर्ड, एंजियोप्लास्टी से लेकर स्टेंट प्रत्यारोपण तक की गहन जांच शुरू। जांच का दायरा बढ़ाते हुए समिति ने यह भी जानकारी मांगी है कि आयुष्मान भारत योजना सहित विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत कितने मरीजों की एंजियोप्लास्टी की गई और किन चिकित्सकीय परिस्थितियों में एक ही मरीज को बार-बार स्टेंट लगाने की आवश्यकता पड़ी।

प्रारंभिक आरोपों के अनुसार, कुछ मरीजों को बार-बार भर्ती कर अलग-अलग अवसरों पर स्टेंट लगाए गए, जबकि कई मामलों में मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री और आवश्यक दस्तावेजों के समुचित रिकॉर्ड दर्ज करने में लापरवाही बरती गई। इससे आयुष्मान योजना के तहत वित्तीय अनियमितता और ‘स्टेंट के नाम पर सेंधमारी’ की आशंका जताई जा रही है।

केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, रिकॉर्ड प्राप्त होने के बाद समिति प्रत्येक मरीज की फाइल, एंजियोग्राफी रिपोर्ट, एंजियोप्लास्टी रिकॉर्ड और उपचार से जुड़े सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच करेगी। यह भी आंका जाएगा कि जिन मरीजों को अधिक संख्या में स्टेंट लगाए गए, क्या वे चिकित्सकीय रूप से आवश्यक थे या उपचार तय मानकों के विपरीत किया गया। समिति ने यह भी संकेत दिए हैं कि जांच में बाहरी विशेषज्ञों और दूसरे संस्थानों के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों की राय भी ली जा सकती है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि उपचार प्रक्रिया चिकित्सकीय दृष्टि से उचित थी या नहीं।

बिना बायोप्सी कर दिया कैंसर घोषित, कागजों पर चढ़ा दी लाखों की दवाएं

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के यूरोलॉजी विभाग में सामने आए कथित दवा घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे हैरान करने वाले तथ्य उजागर हो रहे हैं। जांच में ऐसे कई मामलों का पता चला है, जिनमें मरीजों को बायोप्सी, पैट-सीटी स्कैन, एमआरआई और कैंसर स्टेजिंग जैसी अनिवार्य जांचों के बिना ही कैंसर रोगी घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं, रिकॉर्ड में इन मरीजों को लाखों रुपये कीमत की इम्यूनोथेरेपी और अन्य महंगी दवाओं की डोज भी दर्शा दी गई।

केजीएमयू यूरोलॉजी विभाग के कथित दवा घोटाले की जांच में चौंकाने वाले खुलासे, कई मरीजों की फाइलों में कैंसर पुष्टि के जरूरी दस्तावेज गायब

जांच अधिकारियों के अनुसार, मरीजों की फाइलों की पड़ताल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें एक से दो लाख रुपये तक कीमत वाली दवाएं जारी की गईं, जबकि कैंसर की पुष्टि करने वाली बायोप्सी रिपोर्ट ही उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि किसी भी कैंसर का उपचार शुरू करने से पहले बायोप्सी के माध्यम से रोग की पुष्टि करना अनिवार्य चिकित्सा प्रक्रिया है। इसके बाद सीटी स्कैन, एमआरआई और स्टेजिंग के जरिए बीमारी की स्थिति और उपचार की दिशा तय की जाती है।

सिर्फ ओपीडी पर्चे के सहारे जारी हुईं महंगी दवाएं

जांच में कई फाइलों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कुछ मामलों में केवल ओपीडी पर्चे और सीमित दस्तावेजों के आधार पर मरीजों को कैंसर पीड़ित दर्शाकर महंगी दवाएं जारी कर दी गईं। इससे असाध्य रोग योजना के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली उच्च मूल्य की दवाओं के संभावित दुरुपयोग की आशंका और गहरा गई है।

हर दस्तावेज का हो रहा मिलान

जांच टीम अब मरीजों के उपचार से जुड़े प्रत्येक दस्तावेज की बारीकी से जांच कर रही है। बायोप्सी रिपोर्ट, रेडियोलॉजिकल जांच, कैंसर स्टेजिंग रिपोर्ट और दवा वितरण रिकॉर्ड का आपस में मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों का फोकस इस बात पर भी है कि जिन मरीजों के नाम पर दवाएं निर्गत की गईं, उन्हें वास्तव में दवाएं दी गईं या नहीं।

बढ़ता जा रहा जांच का दायरा

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कई अन्य संदिग्ध मामलों की भी पहचान हुई है। ऐसे में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला न केवल सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, बल्कि मरीजों के जीवन से खिलवाड़ के गंभीर आरोपों का रूप ले सकता है।

ये भी पढ़ें  : 
रबी लामिछाने ने पत्नी संग किए रामलला के दर्शन, कहा-भारत-नेपाल के संबंध साझा संस्कृति, सभ्यता और परंपराएं जोड़ने वाले

 

 

 

 

 

 

संबंधित समाचार