क्रिप्टो बाजार में हाहाकार: 8 महीने में आधी रह गई बिटकॉइन की कीमत, AI और गोल्ड की तरफ भागे निवेशक

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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नई दिल्ली: वैश्विक डिजिटल परिसंपत्ति बाजार से एक बड़ी खबर है। दुनिया की सबसे लोकप्रिय और मूल्यवान क्रिप्टोकरेंसी 'बिटकॉइन' में जारी गिरावट का सिलसिला और ज्यादा गहरा गया है। अक्टूबर 2024 के बाद यह पहली बार हुआ है जब बिटकॉइन की कीमत 60,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चली गई है। पिछले साल अक्टूबर में $1.26 लाख से अधिक के अपने रिकॉर्ड शिखर को छूने के बाद, महज 8 महीनों के भीतर यह आभासी मुद्रा अपने मूल्य का आधा हिस्सा गंवा चुकी है।

एक ही दिन में 7% की भारी गिरावट

शनिवार सुबह के कारोबारी सत्र में बिटकॉइन में लगभग 7 फीसदी की तीव्र गिरावट देखी गई, जिससे इसका भाव लुढ़ककर 59,101 डॉलर प्रति कॉइन के स्तर पर आ गया। हालांकि, बाद में मामूली रिकवरी के साथ यह 59,743.21 डॉलर के इर्द-गिर्द ट्रेंड करता नजर आया। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लिक्विडिटी (तरलता) के पैटर्न में आ रहे बदलाव और बड़े संस्थागत निवेशकों द्वारा क्रिप्टो बाजार से लगातार हाथ खींचने की वजह से बिटकॉइन पर यह चौतरफा दबाव बना हुआ है।

डिजिटल गोल्ड

एआई और सोने की तरफ मुड़े निवेशक

विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि निवेशक अब जोखिम भरे क्रिप्टो बाजार से अपनी पूंजी निकालकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिफेंस, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मजबूत और वास्तविक विकास वाले क्षेत्रों में लगा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, सोने (Gold) और एआई-संचालित टेक कंपनियों के शेयरों के प्रति बढ़ते आकर्षण ने भी क्रिप्टोकरेंसी की मांग को भारी नुकसान पहुँचाया है। वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर आ रहे मिले-जुले संकेतों ने भी निवेशकों के रुख को बदलने का काम किया है।

ट्रंप की जीत से जो तेजी आई थी, वह अब गायब

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की ऐतिहासिक जीत के बाद क्रिप्टो समर्थित नीतियों की उम्मीद में बिटकॉइन ने रॉकेट की रफ्तार पकड़ी थी और नए कीर्तिमान स्थापित किए थे। मगर अब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलती निवेश प्राथमिकताओं के चलते वह तेजी पूरी तरह गायब हो चुकी है।

अब आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि बिटकॉइन $60,000 से $62,000 के अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल को दोबारा हासिल कर पाता है या नहीं। आने वाले दिनों में ईटीएफ (ETF) में फंड का फ्लो, संस्थागत भागीदारी और भू-राजनीतिक हालात ही क्रिप्टो मार्केट की अगली चाल तय करेंगे।

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