योगी सरकार का बड़ा फैसला : आयुष चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में बनेंगे 5 नए चिकित्सालय और महाविद्यालय

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Published By Deepak Mishra
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उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुष चिकित्सा प्रणाली को सशक्त बनाने तथा गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के उद्देश्य से प्रदेश में पांच नए एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। ये संस्थान देवीपाटन, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडल में स्थापित किए जाएंगे।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुष चिकित्सा प्रणाली को सशक्त बनाने तथा गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के उद्देश्य से प्रदेश में पांच नए एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। ये संस्थान देवीपाटन, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडल में स्थापित किए जाएंगे।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इन संस्थानों में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी सहित पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान की शिक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे प्रदेश में आयुष शिक्षा का दायरा बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

क्या बोले प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार...

प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पांचों मंडलों में भूमि का चयन कर लिया गया है। देवीपाटन मंडल में गोंडा जिले के वजीरगंज विकासखंड स्थित ग्राम कोडर में लगभग 14.82 एकड़, मीरजापुर मंडल में सदर तहसील के ग्राम अकोढ़ी में 13.83 एकड़, मेरठ मंडल के लिए गाजियाबाद जिले की मोदीनगर तहसील के ग्राम सैदपुर हुसैनपुर डलना में 11 एकड़, आगरा मंडल में किरावली तहसील के ग्राम अकबरा में 13.5 एकड़ तथा बस्ती मंडल में हर्रैया तहसील के ग्राम जोगापुर में 15 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। 

चार मंडलों में पहले ही दर्ज है आयुष विभाग के नाम भूमि

उन्होंने बताया कि चार मंडलों में भूमि पहले ही आयुष विभाग के नाम दर्ज की जा चुकी है, जबकि बस्ती मंडल में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। आयुष महानिदेशक एवं मिशन निदेशक चैत्रा वी. ने बताया कि सभी पांच मंडलों में भूमि उपलब्ध हो चुकी है और राजकीय एकीकृत आयुष महाविद्यालय एवं चिकित्सालय का नक्शा तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ये संस्थान केवल शिक्षा केंद्र नहीं होंगे, बल्कि शोध एवं नवाचार के प्रमुख केंद्रों के रूप में भी विकसित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इन महाविद्यालयों में आयुर्वेदिक औषधियों, योग चिकित्सा, जीवनशैली आधारित उपचार तथा पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे भारतीय चिकित्सा परंपरा को वैज्ञानिक आधार पर और अधिक सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। 

सूत्रों के अनुसार नए आयुष महाविद्यालयों की स्थापना से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने ही मंडल में उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों की बड़े शहरों पर निर्भरता भी कम होगी। इन संस्थानों में आधुनिक प्रयोगशालाएं, चिकित्सालय, अनुसंधान सुविधाएं तथा प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाएंगे, जिससे आयुष शिक्षा को नई पहचान और गुणवत्ता मिलेगी।  

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