यूपी में बनेगी संघीय दुग्ध उत्पादक कंपनी, दुग्ध उत्पादक किसानों को होगा बंपर मुनाफा

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Published By Anjali Singh
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-5 दुग्ध उत्पादक कंपनियों से जुड़ी हैं 3.81 लाख महिलाएं, कारोबार 5,277 करोड़ के पार -मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों पर जोर, किसानों की आय बढ़ाने के लिए तैयार होगा रोडमैप

लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में दुग्ध उत्पादन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए संघीय दुग्ध उत्पादक कंपनी के गठन की दिशा में कवायद तेज हो गई है। इस संबंध में स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन (एसटीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह और अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के दुग्ध क्षेत्र की संभावनाओं और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। एसटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश संघीय दुग्ध उत्पादक कंपनी के गठन की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ेगा। 

उन्होंने कहा कि इच्छुक दुग्ध उत्पादक कंपनियां स्वेच्छा से इस संघीय ढांचे का हिस्सा बन सकेंगी, जबकि अन्य कंपनियां अपनी वर्तमान व्यवस्था में कार्य करने के लिए स्वतंत्र रहेंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संघीय दुग्ध उत्पादक कंपनी की स्थापना के लिए शीघ्र एक व्यापक रणनीतिक दस्तावेज और विस्तृत कार्यान्वयन रोडमैप तैयार किया जाए, ताकि प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों को इसका अधिकतम लाभ मिल सके।

अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने दुग्ध गुणवत्ता सुधार, मिलावट पर नियंत्रण और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता रेखांकित करते हुए कहा कि किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में संगठित दुग्ध प्रसंस्करण का स्तर अभी अपनी वास्तविक क्षमता से काफी पीछे है। ऐसे में किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने, प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने और मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए संघीय ढांचे को प्रभावी विकल्प माना गया।

बैठक में यूपीएसआरएलएम द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की पांच दुग्ध उत्पादक कंपनियां वर्तमान में 31 जनपदों और 6,493 ग्राम पंचायतों में सक्रिय हैं। इन कंपनियों से करीब 3.81 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इनका कुल वार्षिक कारोबार लगभग 5,277 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इनके बढ़ते योगदान को दर्शाता है।

बैठक में दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के., यूपीएसआरएलएम की मिशन निदेशक दीपा रंजन, राज्य की विभिन्न दुग्ध उत्पादक कंपनियों के प्रतिनिधि तथा डेलॉइट के विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।

केवल दूध नहीं, मूल्य संवर्धित उत्पादों पर फोकस

बैठक में डेलॉइट द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि केवल तरल दूध के कारोबार की तुलना में मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों जैसे पनीर, घी, दही, मक्खन और अन्य उत्पादों से किसानों और उत्पादक कंपनियों को अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है। प्रस्तुतीकरण में कहा गया कि जिन कंपनियों के पोर्टफोलियो में मूल्य संवर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी अधिक है, उनका सकल लाभ और ईबीआईटीडीए भी उल्लेखनीय रूप से बेहतर पाया गया है।

कंपनियों ने किया समर्थन

बैठक में कई दुग्ध उत्पादक कंपनियों ने संघीय मॉडल का समर्थन करते हुए इसे किसानों की आय बढ़ाने और दीर्घकालिक संस्थागत स्थिरता के लिए आवश्यक कदम बताया। हालांकि कुछ कंपनियों ने मौजूदा व्यवस्थाओं और साझेदारियों को देखते हुए चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने और व्यापक विमर्श की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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