Bareilly News : रोडवेज स्टाफ का गम, जब बसें ज्यादा तो चालक क्यों कम

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Published By Pradeep Kumar
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थकान-नींद बन रही हादसों की वजह, चालक प्रमोद की मौत से उठे सवाल, कर्मचारी बोले-नहीं मिल रहा पर्याप्त आराम

बरेली, अमृत विचार। रोहिलखंड डिपो की बस शाजहांपुर में दुर्घटनाग्रस्त होने और ड्राइवर की मौत को लेकर परिवहन निगम स्टाफ की पीड़ा सामने आई है। बरेली के दोनों डिपो में बसें ज्यादा हैं और ड्राइवर कम, जिसकी वजह से कर्मचारियों को पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा। तिलहर हादसे को भी थकान और नींद से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अफसर आरोपों को गलत बता रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, बरेली डिपो और रोहिलखंड डिपो में बसों की संख्या 196-196 है। 392 बसों को चलाने की जिम्मेदारी 330 के करीब ड्राइवर उठा रहे हैं। तय नियम के अनुसार, कोई भी ड्राइवर 24 घंटे में 300 किमी और 48 घंटे में 540 किमी बस चला सकता है। हालांकि, कई बार ड्राइवर कम होने की वजह से नियमों से अधिक बस भी चलानी पड़ती हैं। तिलहर हादसे को लेकर विरोध प्रदर्शन, हड़ताल और चक्का जाम में शामिल ड्राइवरों का आरोप था कि निगम में नियम है कि अगर बस 300 किलोमीटर के अधिक के सफर पर जाएगी तो एक की जगह दो चालक रहेंगे। एक ड्राइवर थकने पर जब आराम करेगा, तब दूसरा गाड़ी चलाएगा। हालांकि, इस नियम का पूरी तरह से पालन होता नहीं दिख रहा। ड्राइवर काम के दबाव में रहते हैं और थकान-नींद हादसों का कारण बनती है। रोडवेज कर्मचारी संगठन की तरफ से भी कई बार लंबी दूरी पर दो चालक भेजने को लेकर ज्ञापन भी दिए गए हैं, मांग पूरी नहीं हो सकी है।

रोडवेज बसों का साढ़े 7 घंटे चक्का जाम, यात्री परेशान
शाहजहांपुर में हादसे के बाद बरेली में हड़ताल की वजह से बरेली और रोहिलखंड डिपो की 451 बसों के पहिए सुबह 6 से लेकर दोपहर 1: 30 तक थमे रहे। चक्का जाम से यात्रियों को भारी परेशानी हुई। विरोध प्रदर्शन में शामिल चालक परिचालकों का आरोप था कि ज्यादा काम लेकर उनका शोषण किया जा रहा है। अफसर उनकी बात नहीं सुन रहे और नियमों से ज्यादा बसें चलवा रहे हैं।

आरोप था कि हादसे के बाद न तो एंबुलेंस समय पर पहुंची और न ही किसी वरिष्ठ अधिकारी ने फोन उठाया। समय पर उपचार मिल जाता तो चालक प्रमोद की जान बच सकती थी। नाराजगी के चलते कर्मचारियों ने बरेली के सेटेलाइट और पुराने बस अड्डे पर बसों का संचालन घंटों रोककर रखा। चालक सतीश यादव ने आरोप लगाया कि प्रमोद से लगातार लंबी दूरी की ड्यूटी कराई जा रही थी। पर्याप्त आराम नहीं मिला, जिससे थकान और नींद हादसे का कारण बन गई।

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बसों का संचालन ठप होने से लाखों का नुकसान
बरेली में रोडवेज बसों का संचालन घंटों ठप होने से परिवहन निगम को आठ लाख रुपये से अधिक की राजस्व हानि की बात सामने आई है। सुबह 7 बजे मामले की जानकारी एआरएम अरुण कुमार वाजपेयी हो हुई तो वह हड़ताल समाप्त कराने पहुंचे मगर कर्मचारियों ने उस समय उनकी नहीं मानी।दोपहर 12:30 बजे जब दोबारा एआरएम आए। उनके साथ हादसे में जान गंवाने वाले चालक प्रमोद के पिता पिता शिशुपाल भी थे। इसके बाद सभी चालक-परिचालकों सेटेलाइट बस स्टेशन पर लंबी वार्ता हुई। बातचीत से मामला निपट गया और दो बजे से बसों का संचालन सुचारू हो गया। बसें चलने पर यात्रियों ने राहत की सांस ली।
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चालक के परिवार को 70 हजार की तुरंत आर्थिक मदद
हड़ताल समाप्त होने के बाद प्रभारी आरएम मो. अजीम और रोहिलखंड डिपो के एआरएम अरुण कुमार वाजपेई ने मृतक चालक के पिता से वार्ता की। उसके बाद शिशुपाल को परिवहन निगम की तरफ से अंतिम संस्कार के लिए 20 हजार रुपये, यात्री सुविधा के तहत हादसे में मृतकों को दिए जाने वाले 7.50 लाख रुपये में से 50 हजार रुपये की मदद की। बाकी शेष धनराशि वारिसान का प्रमाणपत्र लाने पर परिजनों को अन्य सहायता दी जाएगी।

इकलौते बेटे की मौत से टूटा परिवार, मचा कोहराम
हादसे में जान गंवाने वाले रोडवेज के संविदा चालक प्रमोद अपने पीछे पत्नी रेखा और छह माह के बेटे को छोड़ गए हैं। वह मां-बाप के इकलौते पुत्र थे। उनकी मौत से परिवार में कोहराम मचा है। पिता शिशुपाल ने बताया कि प्रमोद ही उनके बुढ़ापे का सहारा थे। परिवार अब कैसे पाल सकेंगे। छह माह के मासूम बेटे के सिर से पिता का साया उठ जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

चालक प्रमोद कुमार की मौत होना बहुत दुखद है। हादसे से हम व्यथित हैं। परिजनों को त्वरित सहायता के रूप में 70 हजार रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। जहां तक हड़ताल का सवाल है तो कुछ चालक परिचालकों ने आक्रोश जताकर ऐसा कराया। मामले की जांच कराई जाएगी। फोन नहीं उठाने का आरोप गलत है। हमारे पास किसी का फोन नहीं आया था। -अरुण कुमार वाजपेई, एआरएम।

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