गोंडा : इंडियन बैंक में 4.90 करोड़ का गबन, 69 अधिकारियों और कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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गोंडा, अमृत विचार: इंडियन बैंक (पूर्व इलाहाबाद बैंक) की प्रधान शाखा से जुड़ी इंडियन बैंक इंपलाइज क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड में करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला अब न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद आपराधिक मुकदमे तक पहुंच गया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश पर वर्ष 1997 से 2020 के बीच शाखा में तैनात रहे 69 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में गबन की राशि ब्याज सहित 4.90 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

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मामले की शिकायत इंडियन बैंक इंपलाइज क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, गोंडा के सचिव रवींद्र कुमार श्रीवास्तव, निवासी पटेल नगर, कोतवाली नगर ने की। शिकायत के अनुसार, जब संस्था का नाम इलाहाबाद बैंक इंपलाइज क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी था, तब वर्ष 1997 से 2020 के बीच प्रधान शाखा में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने पद और दायित्वों का दुरुपयोग करते हुए 3 करोड़ 60 लाख 16 हजार रुपये की कथित हेराफेरी और गबन किया। 

शिकायतकर्ता का आरोप है कि गबन की जानकारी मिलने के बाद मामले की शिकायत बैंक और संबंधित विभागों में की गई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने धनराशि वापस जमा करने का आश्वासन तो दिया, लेकिन लंबे समय तक किसी ने भुगतान नहीं किया और मामला टालते रहे। शिकायतकर्ता ने 22 दिसंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक गोंडा को एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। 

इसके अलावा आईजीआरएस पोर्टल पर दो बार शिकायत दर्ज कराई गई तथा जिलाधिकारी से भी न्याय की मांग की गई, लेकिन शिकायतों का निस्तारण नहीं हुआ। मामले की जांच के दौरान कोतवाली नगर के उप निरीक्षक अवनीश सिंह ने अपनी रिपोर्ट में धनराशि के गबन का उल्लेख किया। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रकरण की जांच लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) स्तर पर चल रही है और इस संबंध में कोई एफआईआर दर्ज नहीं है। इसी आधार पर पुलिस स्तर पर मामला बंद कर दिया गया। 

शिकायतकर्ता के अनुसार, मूल गबन की राशि 3.60 करोड़ रुपये थी, लेकिन वर्षों तक धनराशि वापस न मिलने के कारण ब्याज जोड़ने पर यह रकम बढ़कर 4.90 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने पर रवींद्र कुमार श्रीवास्तव ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी गोंडा की अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए वर्ष 1997 से 2020 तक प्रधान शाखा में तैनात रहे 69 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। आदेश के अनुपालन में संबंधित थाने में सभी आरोपियों के विरुद्ध गबन का मामला दर्ज कर लिया गया है।

बैंकिंग व्यवस्था और सहकारी संस्थाओं पर उठे सवाल

यह मामला न केवल करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है, बल्कि बैंक कर्मचारियों की सहकारी संस्था में लंबे समय तक कथित गबन के बावजूद कार्रवाई न होने पर भी सवाल खड़े करता है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह जिले के बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा सकता है।

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