IIT BHU : आईआईटी बीएचयू के छात्रों ने हासिल ऐतिहासिक उपलब्धि, विकसित की संस्थान की पहली सिलिकॉन चिप
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) के इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी विभाग के छात्रों ने स्नातक स्तर पर अनुसंधान और सेमीकंडक्टर नवाचार के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए संस्थान का पहला सफल सिलिकॉन टेप-आउट पूरा किया है।
वाराणसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) के इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी विभाग के छात्रों ने स्नातक स्तर पर अनुसंधान और सेमीकंडक्टर नवाचार के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए संस्थान का पहला सफल सिलिकॉन टेप-आउट पूरा किया है। उल्लेखनीय है कि यह परियोजना मुख्य रूप से बी.टेक. द्वितीय वर्ष के छात्रों द्वारा मात्र पांच महीनों में पूरी की गई। छात्र टीम ने 64-पॉइंट फास्ट फूरियर ट्रांसफॉर्म (एफएफटी) हार्डवेयर एक्सेलरेटर चिप विकसित की है, जो आधुनिक सिग्नल प्रोसेसिंग प्रणालियों का एक महत्वपूर्ण घटक है।
इस चिप को 130-नैनोमीटर एसकेवाई 30 प्रोसेस डिज़ाइन किट के माध्यम से विकसित किया गया और निर्माण के लिए मल्टी-प्रोजेक्ट वेफर (एमपीडब्ल्यू) शटल कार्यक्रम में प्रस्तुत किया गया। चिप की प्रमुख तकनीकी विशेषताओं में 64-पॉइंट एफएफटी हार्डवेयर एक्सेलरेटर, पूर्णतः पाइपलाइन आधारित छह-स्तरीय रैडिक्स-2 सिंगल-पाथ डिले फीडबैक (एसडीएफ) आर्किटेक्चर, 10 मेगाहर्ट्ज़ क्लॉक फ्रीक्वेंसी और 8-बिट साइनड फिक्स्ड-पॉइंट डेटा रिज़ॉल्यूशन शामिल हैं। इसका निर्माण स्काईवॉटर 130 नैनोमीटर (स्काई 130) प्रौद्योगिकी नोड पर किया गया है।
टिनी टेपआउट एमपीडब्ल्यू शटल प्रोग्राम के माध्यम से फैब्रिकेशन के लिए भेजी गई इस चिप का आकार लगभग 960 माइक्रोमीटर × 200 माइक्रोमीटर है। यह डिज़ाइन हार्डवेयर स्तर पर एफएफटी गणनाओं को उच्च दक्षता के साथ तेज गति से निष्पादित करने में सक्षम है। फ्रंट-एंड डिज़ाइन टीम में अर्का कर, मिथिल दमाणिया, नीरज हरियानी और कनागिरी श्रीथन शामिल रहे, जबकि बैक-एंड कार्यान्वयन में आदित्य मेहरा, अनुज पांडेय, मौलिक बोस और सेतुरत्नम के.एस. ने योगदान दिया।
परियोजना को वरिष्ठ छात्रों पुनीत मकवाना (तृतीय वर्ष) तथा चैतन्य गंबाली (चतुर्थ वर्ष) का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। एफएफटी तकनीक का उपयोग डिजिटल संकेतों के विश्लेषण और प्रसंस्करण से जुड़ी आधुनिक प्रणालियों में व्यापक रूप से किया जाता है। मोबाइल संचार, ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग, जीपीएस नेविगेशन, एमआरआई इमेजिंग, रडार प्रणालियां और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुप्रयोग जैसी अनेक तकनीकें तेज और कुशल सिग्नल प्रोसेसिंग पर निर्भर करती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, एफएफटी प्रोसेसर आधुनिक मोबाइल नेटवर्क, 5जी तकनीक, मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म और बुद्धिमान कंप्यूटिंग प्रणालियों की आधारभूत तकनीकों में से एक है। इस उपलब्धि से मोबाइल एवं वायरलेस संचार को अधिक विश्वसनीय बनाने, मेडिकल इमेजिंग प्रणालियों की गति एवं सटीकता बढ़ाने, एआई आधारित अनुप्रयोगों को अधिक ऊर्जा-कुशल बनाने तथा उन्नत रडार एवं संचार प्रणालियों को मजबूती मिलने की संभावना है।
साथ ही इससे स्वदेशी सेमीकंडक्टर डिज़ाइन क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा। भारत में चिप डिज़ाइन से जुड़ी परियोजनाएं सामान्यतः स्नातकोत्तर या शोध स्तर पर संचालित होती हैं। ऐसे में स्नातक छात्रों द्वारा संपूर्ण इंटीग्रेटेड सर्किट (आईसी) डिज़ाइन चक्र पूरा कर सिलिकॉन टेप-आउट तक पहुंचना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह परियोजना आईआईटी बीएचयू के इतिहास का पहला सफल सिलिकॉन टेप-आउट भी है।
यह उपलब्धि विभाग के पूर्व छात्रों के व्यापक सहयोग से संभव हो सकी। वर्ष 1975 से 2025 तक के विभिन्न बैचों के पूर्व छात्रों ने औरा लैब की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण में योगदान दिया तथा तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान किया। संस्थान ने टेप-आउट और फैब्रिकेशन गतिविधियों के लिए वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया। परियोजना के संकाय मार्गदर्शक डॉ. अंकित अरोड़ा और डॉ. मुरलीकृष्णन श्रीनिवासन ने बताया कि विभाग की 'अंडरग्रेजुएट रिसर्च एवेन्यू' पहल के अंतर्गत भविष्य में और अधिक सिग्नल प्रोसेसिंग एवं कंप्यूटेशनल हार्डवेयर मॉड्यूल विकसित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य बड़े और अधिक उन्नत हार्डवेयर सिस्टम तैयार करना है।
विभागाध्यक्ष प्रो. अमृतांशु पांडेय ने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन, आधारभूत संरचना और अवसर मिलने पर युवा छात्र भी विश्वस्तरीय तकनीकी परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने पूर्व छात्रों के सतत सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि यह सफलता संस्थान में अनुभवात्मक शिक्षण, स्नातक अनुसंधान और सेमीकंडक्टर सिस्टम डिज़ाइन पर बढ़ते फोकस को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि 'अंडरग्रेजुएट रिसर्च एवेन्यू' जैसी पहलें छात्रों को केवल तकनीक सीखने ही नहीं, बल्कि उसे विकसित करने का अवसर भी दे रही हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक चिप के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की उभरती सेमीकंडक्टर क्षमता और छात्र-नेतृत्व वाले नवाचार की संभावनाओं को भी प्रदर्शित करती है। आईआईटी बीएचयू के छात्रों की यह सफलता दर्शाती है कि आधुनिक आधारभूत संरचना, मार्गदर्शन और पूर्व छात्रों के सहयोग से युवा इंजीनियर देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
