बरेली: गन्ना माफिया कर रहे खाद की कालाबाजारी, संकट में किसान

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अमृत विचार, बरेली। गन्ना माफिया खुलेआम खाद की कालाबाजारी कर रहे हैं। इससे किसान संकट में हैं। सहकारी गन्ना समितियों के गोदामों पर लंबे समय से चल रहे इस खेल को रोकने में विभाग पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है। वहीं, पीओएस मशीनें भी कालाबाजारी पर अंकुश लगाने में मददगार साबित नहीं हो …

अमृत विचार, बरेली। गन्ना माफिया खुलेआम खाद की कालाबाजारी कर रहे हैं। इससे किसान संकट में हैं। सहकारी गन्ना समितियों के गोदामों पर लंबे समय से चल रहे इस खेल को रोकने में विभाग पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है। वहीं, पीओएस मशीनें भी कालाबाजारी पर अंकुश लगाने में मददगार साबित नहीं हो पा रही हैं।

निजी दुकानदारों ने इसका फायदा उठाते हुए खाद की कालाबाजारी शुरू कर दी है। तय रेट से 15 प्रतिशत तक अधिक दामों पर यूरिया, डीएपी और एनपीके बेची जा रही है। जनपद में 142 सहकारी समितियों के अलावा गन्ना विभाग की सात सहकारी गन्ना विकास समितियां हैं। इन समितियों के करीब 150 गोदाम जिलभर में बने हैं।

गन्ना समितियों पर इफको और कृभको ब्रांड कंपनी से खाद की सप्लाई आती है। रबी की फसलों, खासकर गेहूं में डालने के लिए यूरिया खाद की मांग बढ़ गई है। वर्तमान में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को बेची जाने वाली इफको ब्रांड खाद की डिमांड अधिक हैक्योंकि यहां किसानों को उधार खाद दी जाती है।

गन्ना विभाग की सहकारी गन्ना समितियां भी किसानों को उधार में खाद मुहैया कराती हैंलेकिन इन समितियों के गोदामों से खाद निकलकर दुकान या किसान के घर पहुंचने की बजाय गुपचुप तरीके से निजी खाद दुकानों तक पहुंच रही है। सूत्र बताते हैं कि किसानों को उधार में खाद देने वाली सुविधा का लोग दुरुपयोग करने लगे हैंजिससे कालाबाजारी होने लगी है। समिति के कर्मचारियों से सांठगांठ करके गन्ना माफिया भी खाद की कालाबाजारी में जुटे हैं। पीओएस मशीन में एंट्री किए बिना ही खाद दे दी जाती है।

नेटवर्किंग और अपेडट साफ्टेवयर की समस्या भी बन रही बाधा
पीओएस मशीन से किसानों को खाद देना सरकार ने अनिवार्य तो कर दिया है लेकिन नेटवर्किंग और अपडेट साफ्टवेयर की समस्या से निजात नहीं मिल सकी है। कुछ उर्वरक विक्रेताओं का कहना है ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या बरकरार रहने की वजह से मशीनें दिक्कत कर रही हैं जबकि मशीनों में साफ्टवेयर अपडेशन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है।

फसल बोने से लेकर बेचने तक उठानी पड़ती है परेशानी
खाद की कालाबाजारी के कारण किसानों को जूझना पड़ रहा है। किसानों को फसल बोने से लेकर बेचने तक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार को किसानों को आसानी से यूरिया उपलब्ध कराना चाहिए।
-नितिन, किसान

भाग-दौड़ के बाद भी खाद मिलने की गारंटी नहीं
यूरिया के लिए सुबह समिति खुलने के पहले ही लाइन लग जाती है। वहीं, यूरिया खुले बाजारों में अधिक दाम देने पर आसानी से मिल जा रही है। समिति पर दौड़ लगाने के बाद भी कोई गारंटी नहीं रहती कि खाद मिल ही जाएगी।
-पंकज, किसान

जनपद में यूरिया की बिक्री पर नजर रखी जा रही हैक्योंकि सहकारी समितियों और प्राइवेट दुकानों पर आनलाइन पीओएस मशीन के माध्यम से इसकी बिक्री की जा रही है। यदि कालाबाजारी की शिकायत मिलती हैतो संबंधित समिति और दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। – धीरेंद्र सिंह, जिला कृषि अधिकारी

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