बरेली: गायों की सेवा के कागजी दावे, ठंड से बचाव को नहीं दिया एक भी रुपया
बरेली, अमृत विचार। सरकार गायों को सर्दी से बचाने के लिए उनका पूरा ख्याल रख रही है। इसके लिए न्याय पंचायत स्तर पर बड़ी संख्या में मनरेगा के तहत गौ आश्रय स्थल खुलवाए गये हैं। यह कहते हुए बरेली से लेकर लखनऊ के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी थकते नहीं हैं लेकिन रविवार को जो सच …
बरेली, अमृत विचार। सरकार गायों को सर्दी से बचाने के लिए उनका पूरा ख्याल रख रही है। इसके लिए न्याय पंचायत स्तर पर बड़ी संख्या में मनरेगा के तहत गौ आश्रय स्थल खुलवाए गये हैं। यह कहते हुए बरेली से लेकर लखनऊ के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी थकते नहीं हैं लेकिन रविवार को जो सच सामने आया, उससे सरकार के गायों की सेवा के दावे कागजी साबित हुये।
गायों को ठंड से बचाने के लिए सरकार ने एक रुपये का अलग से बजट जारी नहीं किया। एक गाय के लिए प्रतिदिन चारा उपलब्ध कराने से लेकर इलाज और सेवा में खर्च के लिए जो 30 रुपये मिल रहे हैं उसी में से गायों को जूट का कोट पहनाने के निर्देश दिये गये थे जबकि 30 रुपये में गाय को पेट भरने के लिए चारा तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसी स्थिति में गायों को ठंड से बचाने के लिए जूट का कोट कहां से उपलब्ध कराएं, यह सोचकर पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी भी परेशान हो गये।
शासन से ज्यादा दबाव पड़ने पर गौ आश्रय स्थलों में रह रहीं 2993 गायों को ठंड से बचाने के लिए पशु चिकित्सा विभाग फटे-पुराने व खराब हो चुके जूट के बोरों का इंतजाम करा रहा है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने जिला पूर्ति अधिकारी से दो हजार जूट के बोरों की मांग की है। जिला पूर्ति अधिकारी सीमा त्रिपाठी ने सभी कोटेदारों को चावल व गेहूं आने वाले खराब हो चुके बोरों को जल्द उपलब्ध कराने के लिए निर्देश दिये हैं लेकिन अभी तक बोरे उपलब्ध नहीं हो सके हैं।
अधिकारी बताते हैं कि सहभागिता योजना के तहत 838 गायों को लोगों ने गोद ले लिया है। वे अपने घरों पर गायों की सेवा कर रहे हैं। उन्हें प्रति माह एक गाय का 900 रुपया दिया जा रहा है। जनपद में मनरेगा के तहत 144 गौशालाएं बनाई गई हैं। इसके अलावा नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों में भी गौ आश्रय स्थल बने हैं। इनमें 3831 गौवंश रह रहे हैं। 30 रुपये प्रतिदिन मिलने वाली धनराशि में से गौ आश्रय स्थल पर तैनात कर्मचारियों की तनख्वाह भी निकाली जा रही है। इधर, दमखोदा में बनी गौशाला की चहारदीवारी है। तिरपाल भी पड़ा है लेकिन गायों को जूट के बोरे उपलब्ध नहीं हुये हैं।
गौशालाओं में रह रहीं गायों को जूट के बोरे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके लिए अलग से बजट नहीं मिला है। इसलिए, जिला पूर्ति अधिकारी से खराब हो चुके दो हजार बोरों की मांग की गई है। बोरे मिलने पर गौशालाओं में उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार के निर्देश हैं कि एक गाय के लिए प्रतिदिन जो 30 रुपये मिल रहे हैं, उसी में से जूट का बोरा गाय को उपलब्ध कराएं लेकिन उस बजट में बोरा उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है। -डा. ललित कुमार वर्मा, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
