मुरादाबाद: न सुधर सकी मिड-डे-मील की गुणवत्ता और न शिक्षा
मुरादाबाद,अमृत विचार। बेसिक शिक्षा विभाग के लिए साल 2020 उतार-चढ़ाव भरा रहा। वर्ष की शुरुआत में ही शिक्षा के साथ ही बच्चों को मिड-डे-मील के तहत दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता में सुधार का लक्ष्य निर्धारित तो किया गया, पर न तो शिक्षा और न ही मिड-डे-मील की गुणवत्ता सुधर सकी। मार्च में संक्रमण …
मुरादाबाद,अमृत विचार। बेसिक शिक्षा विभाग के लिए साल 2020 उतार-चढ़ाव भरा रहा। वर्ष की शुरुआत में ही शिक्षा के साथ ही बच्चों को मिड-डे-मील के तहत दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता में सुधार का लक्ष्य निर्धारित तो किया गया, पर न तो शिक्षा और न ही मिड-डे-मील की गुणवत्ता सुधर सकी। मार्च में संक्रमण का ग्रहण लग जाने के बाद विभागीय अधिकारियों के साथ ही शिक्षकों की लचर कार्यप्रणाली का खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ा।
मार्च में कोरोना के कारण लगाए गए लाकडाउन ने वर्ष के अंत तक छात्र-छात्रों की पढ़ाई प्रभावित की। जिससे बच्चों का भविष्य अधर में फंसकर रह गया। यहां तक कि बच्चों की परीक्षाएं भी बीच में ही स्थगित कर दी गई। रही सही कसर वर्ष के अंत में बच्चों को बांटे गए स्वेटर भी मानक के अनुरूप नहीं निकले तो विभाग को फजीहत ही झेलनी पड़ी। कहीं बच्चों को छोटे, तो कहीं नाप से बड़े स्वेटर बांट दिए गए। हैरानी की बात है कि इस मझधार से विभाग छात्रों को निकालने में सफल नहीं हो सका।
विभाग को झेलनी पड़ी थी फजीहत
जून में अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में शिक्षकों की पदस्थापना की प्रक्रिया शुरु हुई। इस प्रक्रिया में विभागीय अधिकारियों द्वारा नियम विरुद्ध पदस्थापना की गई। जब इसकी हवा जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय से बाहर महकी तो विभाग को फजीहत झेलनी पड़ी। अमृत विचार ने इसको लेकर मुहिम भी चलाई। जिसके परिणाम स्वरुप लखनऊ से निदेशक ने एडीबेसिक को जांच सौंपी, जिसमें बीएसए दोषी पाए गए।
कोई रास्ता नहीं निकाल पाया विभाग
नौनिहालों की पढ़ाई मार्च माह में संक्रमण के कारण बंद हुए स्कूल की वजह से प्रभावित होनी शुरू हो गई। इसके बाद शासन और विभाग की ओर से तमाम प्रयास किए गए ताकि पढ़ाई की सुचारू रूप से जारी रखा जा सके। इसके लिए टीवी पर भी कक्षाएं प्रसारित हुईं और आनलाइन भी बच्चों को पढ़ाने का प्रयास किया गया, मगर विभाग की हर कोशिश फीकी ही पड़ती गई। विभाग पढ़ाई को प्रभावित होने से रोकने के लिए कोई रास्ता नहीं निकाल पाया।
टैबलेट देने का वादा हो गया हवा-हवाई
संक्रमण के चलते छात्र-छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए विभाग ने उन बच्चों का रिकार्ड जिला स्तर से मांगा, जो स्मार्ट फोन से वंचित थे। ब्लाकवार बीआरसी और शिक्षकों की ओर से ऐसे छात्रों की संख्या की गणना की गई। मगर समय के साथ विभाग की ओर से इन बच्चों को टैबलेट दिए जाने का वादा हवा-हवाई होकर ही रह गया। जिसका खामियाजा छात्रों को अभी भी भुगतना पड़ रहा है।
अब तक नहीं मिल सके बच्चों को स्वेटर
ठंड पूरी तरह से अपनी आमाद दर्ज करा चुकी है। ऐसे में छात्रों को स्वेटर वितरण करने का सिलसिला जारी है। पर हैरत की बात यह है कि अभी तक सभी बच्चों को स्वेटर का वितरण नहीं हो सका है। जबकि 20 नवंबर तक जिले भर के परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत बच्चों को स्वेटर का वितरण हो जाने का लक्ष्य विभाग ने रखा था। वर्ष का अंत होने पर आ गया, मगर विभाग की लापरवाही न सुधर सकी।
बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए विभाग की ओर से हर संभव प्रयास किया गया। मगर वर्ष के तीसरे माह में ही वैश्विक महामारी ने संकट के बादल खड़े कर दिए। जिस वजह से बच्चों की प्रभावित हुई। पर इसके लिए आनलाइन आदि माध्यमों से बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने का प्रयास किया गया।-योगेंद्र कुमार, बीएसए
