Success Story: दादी को कैंसर से खोया, अब कैंसर मरीजों की सेवा करने चाहते है NEET-UG 2026 टॉपर आर्यन गुप्ता, बनना चाहते हैं oncologist
लुधियाना । मेहनत, लगन और एक मजबूत संकल्प ने लुधियाना के आर्यन गुप्ता को NEET-UG 2026 में संयुक्त रूप से देश का टॉपर बना दिया है। आर्यन ने हरियाणा के पांशुल बंसल के साथ ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की है। 720 में से 715 अंक प्राप्त करने वाले आर्यन ने अपनी इस सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और उन सभी लोगों को दिया है, जिन्होंने उनका लगातार हौसला बढ़ाया।
आर्यन की कहानी सिर्फ एक परीक्षा में सफलता की नहीं, बल्कि एक ऐसे सपने की है जिसकी शुरुआत बचपन के एक दर्दनाक अनुभव से हुई। उन्होंने बताया कि वह भविष्य में कैंसर रोग विशेषज्ञ (ऑन्कोलॉजिस्ट) बनना चाहते हैं। इसकी वजह उनकी दादी की कैंसर से हुई मौत है। आर्यन ने कहा, "जब मैं तीसरी कक्षा में था, तब कैंसर की वजह से मेरी दादी का निधन हो गया था। उसी दिन मैंने तय कर लिया था कि मैं इसी क्षेत्र में काम करूंगा।"
16-17 घंटे की पढ़ाई से हासिल किया मुकाम
डॉक्टर परिवार से आने वाले आर्यन ने बताया कि उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान हर दिन करीब 16 से 17 घंटे पढ़ाई की। कई बार ऐसा भी हुआ जब पढ़ाई और लक्ष्य को लेकर उन्हें नींद तक नहीं आती थी, लेकिन उन्होंने अपने संकल्प को कमजोर नहीं होने दिया। आर्यन ने कहा, "मैंने अपने लिए एक लक्ष्य तय कर रखा था और उसी पर लगातार मेहनत करता रहा। आज ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल करना किसी सपने जैसा लग रहा है।" उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं और परिवार में इस उपलब्धि को लेकर खुशी का माहौल है।
माता-पिता और शिक्षकों को दिया सफलता का श्रेय
आर्यन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और समर्थकों को देते हुए कहा कि यह उपलब्धि अकेले उनकी नहीं है। उन्होंने कहा कि जीवन में अभी बहुत कुछ करना बाकी है और आगे भी वह पूरी मेहनत के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे।
NEET-UG 2026 में शानदार प्रदर्शन
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अनुसार, इस वर्ष कुल 11.21 लाख उम्मीदवार नीट-स्नातक परीक्षा में सफल हुए हैं। परीक्षा में 690 से अधिक अंक हासिल करने वाले 138 उम्मीदवारों में बड़ी संख्या पहली बार परीक्षा देने वाले छात्रों की रही। NTA के मुताबिक, 1,492 उम्मीदवारों ने 650 या उससे अधिक अंक हासिल किए, जबकि 10,160 उम्मीदवारों ने 600 या उससे अधिक अंक प्राप्त किए। आर्यन गुप्ता की सफलता उन छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल करने का सपना देखते हैं। उनके लिए डॉक्टर बनना सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि दादी की याद में लिया गया एक संकल्प है।
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