सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों पर कागज उछालने की घटना पर विधि विशेषज्ञ बोले-अब दंड देने का वक्त आ गया 

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Published By Ateeq Khan
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प्रोफेसर अमित सिंह कहते हैं कि पिछली बार जब सीजेआई के साथ घटना घटी थी। तब भी न्यायालय ने उसे क्षमा किया था। इस बार भी कोर्ट ने माफ कर दिया। लेकिन अब समय आ गया है कि न्यायालय को अपनी गरिमा बनाए रखने के लिए दंड देना चाहिए।

अमृत विचार, लखनऊ : सुप्रीम कोर्ट में एक केस की सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों पर कागज उछालने और भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के लिए अभद्र भाषा के इस्तेमाल की घटना पर विधि विशेषज्ञ गहरी चिंता जता रहे हैं। उनका तर्क है कि ऐसी घटनाएं आम लोगों के मन में न्याय के प्रति सम्मान को भी प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए न्यायालय की गरिमा बनाए रखने के लिए ये जरूरी है कि ऐसे लोगों को दंड मिलना चाहिए। 

केस यूपी से जुड़ा है। एडवोकेट प्रबल प्रताप जोकि लखनऊ की जानकीपुरम कॉलोनी में किराये पर रहते हैं-उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपनी एक याचिका की पैरवी के दौरान कोर्टरूम में हंगामा खड़ा कर दिया। पहले तो न्यायाधीशों को मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट कहकर संबोधित किया...फिर उनकी तरफ फाइल में रखे कागज उछाल दिए। बेकाबू वकील को सुरक्षाकर्मियों ने पकड़ लिया। इस बीच उसने सीजेआई के लिए आपत्तिजनक भाषा का भी उपयोग किया। इस सब घटनाक्रम के बाद न्यायाधीशों ने उसे माफ कर दिया। यह कहते हुए कि वह हताश और परेशान है। बेंच ने उसके प्रति सहानुभूति भी जताई। 

पीड़ित हो सकते हैं तरीका गलत

उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष रहे सीनियर एडवोकेट शिरीष मेहरोत्रा ने कहा कि ये अनुशासनहीनता है। वह कहते हैं कि वकील जरूर पीड़ित हो सकते हैं लेकिन उनका तरीका पूरी तरह से गलत था। बार काउंसिल इस पर कड़ा कदम उठा सकती है। न्यायाधीशों को मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट कहकर संबोधित करने पर भी हैरानी जताते हुए कहते हैं कि जज सर्वेंट नहीं होते। उन्हें इस तरह संबोधित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने अपनी मर्यादा दिखाते हुए कोई एक्शन नहीं लिया। लेकिन बार जरूर कार्रवाई कर सकती है। 
 
बरेली की एमजेपी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी में लॉ डिपार्टमेंट के डीन प्रोफेसर अमित सिंह घटना पर गहरी चिंता जाहिर करते हैं। प्रोफेसर सिंह के मुताबिक, वकीलों से न्यायालय के सर्वोच्च सम्मान की अपेक्षा की जाती है। सुप्रीमकोर्ट न्याय का सबसे बड़ा फोरम है। स्तरहीन आचरण से उसका सम्मान नहीं गिराएंगे। लेकिन ऐसा लगता है कि नई पीढ़ी के कुछ लोग कम समय में सस्ती लोकप्रियता, रीलबाजी के लिए स्टंट करने लग गए हैं। 

वकीलों से सर्वोच्च सम्मान की अपेक्षा 

प्रोफेसर अमित सिंह कहते हैं कि पिछली बार जब सीजेआई के साथ घटना घटी थी। तब भी न्यायालय ने उसे क्षमा किया था। इस बार भी कोर्ट ने माफ कर दिया। लेकिन अब समय आ गया है कि न्यायालय को अपनी गरिमा बनाए रखने के लिए दंड देना चाहिए। अन्यथा भविष्य में ऐसी घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो सकती है। कितनी खराब बात है कि न्यायाधीशों की तरफ कोई जूता उछाल दे रहा है तो कोई कागज...।

अगर लोग ऐसा ही करते रहेंगे तो आम जन मानस के मन मन से न्याय के लिए सम्मान कम होता जाएगा। न्यायालय की अवमानना मानते हुए इस मामले में कार्रवाई की जाए। हर नागरिक की ये जिम्मेदारी है कि सेना और न्यायालय का मान-प्रतिष्ठा बरकरार रहे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में एडवोकेट आशीष कुमार सिंह न्यायाधीशों की तरफ कागज उछालने के पूरे घटनाक्रम की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। एडवोकेट आशीष कुमार को सुनिए...। 

 

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