कोरोना से लेकर किसान आंदोलन तक, जानिए 2020 में हुईं देश की बड़ी घटनाएं

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Edited By Amrit Vichar
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साल 2020 जाने को है और नया साल दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। इस पूरे साल लोग कोरोना वायरस से उपजीं चुनौतियों से जूझते रहे। कोरोना के कारण शायद ही लोग इस साल को भुला पाएंगे लेकिन इसके अलावा देश में कुछ और ऐसी घटनाएं हुईं हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। …

साल 2020 जाने को है और नया साल दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। इस पूरे साल लोग कोरोना वायरस से उपजीं चुनौतियों से जूझते रहे। कोरोना के कारण शायद ही लोग इस साल को भुला पाएंगे लेकिन इसके अलावा देश में कुछ और ऐसी घटनाएं हुईं हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। दिल्ली दंगा, भारतीय और चीनी सैनिकों में झड़प, निर्भया के दोषियों को फांसी, राममंदिर का भूमि पूजन और देश में चल रहे किसान आंदोलन को भी भुलाया नहीं जा सकता है। तो आइए नजर डालते हैं इस साल देश में घटित बड़ी घटनाओं पर…

सीएए-एनआरसी को लेकर दिल्ली दंगा और शाहीन बाग में प्रदर्शन
नागरिकता संशोधन विधेयक संसद की मंजूरी के बाद कानून तो बन गया लेकिन इसके साथ ही इसका विरोध भी शुरू हो गया। 2020 की शुरुआत सीएए और एनआरसी के विरोध के साथ हुई। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में पूर्वोत्तर से उठी आवाज 2020 की शुरुआत तक देशभर में विरोध प्रदर्शन का रूप ले चुकी थी। फरवरी में विरोध की आग इतनी बढ़ गई देश के कई इलाकों के साथ ही राजधानी भी दिल्ली भी झुलसने लगी। सीएए के विरोध में भड़की हिंसा फरवरी महीने के अंत तक दंगों में तब्दील हो गई। कई इलाकों में वाहनों में तोड़-फोड़, आगजनी और पत्थरबाजी हुई। 23 फरवरी से 29 फरवरी तक दिल्ली के उत्तर पूर्वी हिस्से में दंगे होते रहे। इन दंगों में 53 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए। दिल्ली के शाहीनबाग में सीएए और एनआरसी के विरोध में लंबे समय तक प्रदर्शन चला। इस दौरान कड़ाके की ठंड के बीच शाहीन बाग में सैकड़ों महिलाएं सड़क पर बैठी रहीं। शाहीनबाग में 82 साल की बिलकिस दादी प्रदर्शन का चेहरा बनीं। टाइम मैगजीन ने बिलकिस बानो को 100 सबसे ज्यादा प्रभावशाली लोगों की अपनी सूची में शामिल किया।

कोरोना वायरस का कहर और तबलीगी जमात
साल 2020 में कोरोना वायरस ने देश और दुनिया को हिलाकर रख दिया। इस वैश्विक महामारी ने 180 से ज्यादा देशों को अपनी चपेट में ले लिया। जब भारत में लोग होली के रंग में सराबोर होने की तैयारी कर रहे थे उसी वक्त पूरी दुनिया के लिए खौफ बन चुके इस वायरस ने यहां भी अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया। भारत में जनवरी के दौरान कोरोना के मामले सामने आए थे जबकि कोरोना संक्रमण से पहली मौत 17 मार्च को कर्नाटक में हुई थी। इस बाद भारत भी कोरोना के शिकंजे में फंस गया और अब तक एक करोड़ से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। वहीं, करीब डेढ़ लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। अब पूरे देश की निगाहें कोरोना वैक्सीन की ओर लगी हैं। लोगों को बड़े पैमाने पर वैक्सीन की टीका लगाने की तैयारियां की जा रही हैं। उम्मीद की जा रही है कि जनवरी में वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी। देश जब कोरोना से जूझ रहा था उसी दौरान तबलीगी जमात का भी जिक्र हुआ। मार्च में दिल्ली के निज़ामुद्दीन स्थित मरकज़ में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हजारों की संख्या में देश-विदेश के लोग शामिल हुए। जब यह बात सामने आई कि बड़ी संख्या में जमाती कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, तो यह एक बड़ा मुद्दा बन गया। सरकार ने संसद में बताया कि तबलीगी जमात के कार्यक्रम में भारी भीड़ लंबी अवधि तक एक परिसर में एकत्र रही, जिससे कई व्यक्तियों में संक्रमण फैला।

देश में लॉकडाउन और प्रवासियों का पलायन
भारत में कोरोना के मामले लगातार सामने आने के बाद सरकार सतर्कता बरतते हुए देश में 25 मार्च से 21 दिन का पूर्ण लॉकडाउन लगाया। इस दौरान ट्रेन, बस और हवाई जहाज के साथ ही आम जन जीवन थम गया। लोग जहां थे वहीं फंसकर रह गए। सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें उठानी पड़ी जो रोजी-रोटी के लिए अपना घर छोड़कर दूसरे शहरों में नौकरी या मजदूरी कर रहे थे। यातायात के साधन बंद होने की कारण प्रवासियों ने पैदल ही घर वापसी शुरू कर दी। लॉकडाउन के बावजूद हजारों-लाखों की संख्या में तपती धूप के बीच अपने घर के लिए रवाना होते रहे। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में 8 मई को रेलवे ट्रैक पर सो रहे 16 मजदूरों पर मालगाड़ी गुजरने के हादसे ने इस दर्द को और बढ़ा दिया।

निर्भया को मिला इंसाफ, दोषियों को फांसी
दिल्ली में चलती बस में निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। दिसंबर 2012 को हुई इस घटना में निर्भया को न्याय दिलाने के लिए देश के कोने-कोने से आवाज उठी। संसद से लेकर सड़कों तक पर निर्भया केस की गूंज सुनाई दी। सोशल मीडिया से उठी आवाज एक आवाज से जन सैलाब उमड़ पड़ा। बड़ी संख्या में लोग इंडिया गेट पहुंचे और निर्भया के गुनाहगारों को फांसी पर चढ़ाने की मांग की। आखिरकार 20 मार्च 2020 को करीब सात साल पहले 16 दिसंबर 2012 की उस खौफनाक रात का हिसाब-किताब कर दिया गया। निर्भया के चारों दोषियों पवन, मुकेश, अक्षय और विनय को तिहाड़ के जेल नंबर तीन में फांसी के तख्ते पर लटकाया गया। निर्भया के एक दोषी राम सिंह ने 2013 में तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी।

राम मंदिर का शिलान्यास
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का रास्ता तैयार किया। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 के दौरान अयोध्या के राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद का पटाक्षेप किया लेकिन इसका भूमि पूजन अगस्त 2020 में किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2020 में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया और मंदिर की आधारशिला रखी। मंदिर का निर्माण भारत की प्राचीन निर्माण पद्धति से किया जा रहा है। कई सालों तक भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं का इस पर कोई असर न हो इसपर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। राम मंदिर तैयार होने में 36-40 महीने का समय लगने का अनुमान है।

गलवान घाटी में भारत-चीन के सैनिकों की झड़प
पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच लंबे समय से सैन्य गतिरोध चल रहा है। इस बीच बीती 15-16 जून की रात लद्दाख बॉर्डर पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। इसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए। इस घटना में चीन के करीब 40 सैनिकों के मारे जाने की बात सामने आई, लेकिन चीन ने इसकी पुष्टि नहीं की। इसके बाद चीन ने गलवान घाटी में सैन्य तैनाती बढ़ा दी, जवाब में भारत ने भी सैनिकों की संख्या बढ़ा दी। दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए कई दौर की वार्ता हुई, बावजूद इसके कोई ठोस हल नहीं निकल सका है। वहीं इस झड़प के बाद भारत ने चीन पर कड़े प्रतिबंध लगाए और करीब 100 चीनी ऐप्लिकेशन बैन कर दिए। इस दौरान देश में चीन के सामान का विरोध भी शुरू हो गया, जिससे चीन को अब तक करोड़ों डॉलर का नुकसान हो चुका है।

राफेल की भारत में एंट्री
चीन और पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे थे। ऐसे में भारत की सैन्य शक्ति बढ़ना जरूरी हो चुका था। इस बीच 27 जुलाई को फ्रांस से पांच लड़ाकू विमान राफेल भारत पहुंचे। इससे भारतीय वायु सेना की ताकत काफी बढ़ गई। इन लड़ाकू विमानों को 10 सितंबर को आधिकारिक तौर पर भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। इसके बाद 4 नवंबर को तीन और राफेल भारत आए। अब राफेल विमानों की कुल संख्या 8 हो गई है। आपको बता दें भारत ने फ्रांस 36 राफेल विमानों का सौदा किया है।

मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन
साल 2020 में मध्य प्रदेश में राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ। मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार गिरी और शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बने। मध्य प्रदेश में राजनीतिक हलचल उस वक्त शुरू हुई जब राहुल गांधी के भरोसेमंद ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा के खेमे में शामिल हो गए। साथ ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक 22 कांग्रेस विधायकों ने अपना इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई और सप्ताह भर चले राजनीतिक रस्साकशी में कमलनाथ सरकार गिर गई। 20 मार्च को कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया। 23 मार्च को शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद राज्य में उपचुनाव हुए। 3 नवंबर को 28 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने 19 सीटें जीतकर सत्ता बचा ली जबकि कांग्रेस मात्र नौ सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी।

कोरोना काल में बिहार में चुनाव
कोरोना काल में बिहार विधानसभा चुनाव बेहद खास रहा, क्योंकि महामारी के बीच यह देश में पहला चुनाव था। चुनाव आयोग की गाइडलाइन के बीच यह चुनाव सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ। बिहार में इस बार राष्ट्रीय जनता दल सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन भाजपा की मदद से जनता दल यूनाइटेड लगातार चौथी बार सरकार बनाने में कामयाब रही। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुमानों और एग्जिट पोल्स में तेजस्वी यादव की अगुवाई वाले महागठबंधन की सरकार बनने का दावा किया गया था, लेकिन सभी दावे धराशाई हो गए। एनडीए एक बार फिर बिहार की सत्ता पर काबिज होने में कामयाब रही। बीजेपी के आशीर्वाद से नीतीश कुमार सीएम की कुर्सी पाने में कामयाब रहे। इस चुनाव में एनडीए से बगावत कर अकेले लड़ने वाली लोजपा को एक सीट पर संतोष करना पड़ा। कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की वजह से 75 सीटें जीतने वाली राजद सत्ता से दूर रह गई।

कानपुर का बिकरू कांड
कानपुर का बिकरू गांव अचानक से उस वक्त सुर्खियों में आ गया जब 3 जुलाई कुख्यात बदमाश विकास दुबे ने अपने साथियों के साथ मिलकर पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला कर दिया। इसमें सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए। ये पुलिस टीम विकास दुबे को पकड़ने गई थी, लेकिन विकास दुबे को दबिश की जानकारी पहले ही मिल गई थी। इस कांड के बाद विकास दुबे और उसके साथी फरार हो गए। इस मामले में पुलिस ने विकास दुबे को मध्यप्रदेश के उज्जैन से पकड़ा था और कानपुर के पास भागने की कोशिश करते वक्त कथित एनकाउंटर में उसे मार गिराया गया। इस दौरान पुलिस ने सिर्फ आठ दिन में विकास दुबे के पूरे गैंग का सफाया कर दिया था।

कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन
साल 2020 के जाते-जाते राजधानी दिल्ली को किसानों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। इन दिनों दिल्ली में केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन सर्द मौसम में भी जारी है। कृषि कानूनों को लेकर इन दिनों देश में सियासी सरगर्मियां भी तेज हो गईं हैं। खेती-किसानी में सुधार के मकसद से केंद्र सरकार सितंबर महीने में 3 नए कृषि विधेयक लाई थी, जो संसद की मंजूरी और राष्ट्रपति की मुहर के बाद कानून बन गए। किसानों को ये कानून पसंद नहीं आ रहे हैं। किसानों को इन कानूनों से फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खत्म हो जाने का डर सता रहा है। पंजाब समेत कई राज्यों के किसान इस वक्त दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं और कृषि कानूनों वापस लेने की मांग कर रहे हैं। किसान ‘दिल्ली चलो अभियान’ के तहत राष्ट्रीय राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में डेरा डाले हुए हैं। सरकार की ओर से किसानों को कानूनों में संशोधन करने का प्रस्ताव दिया था लेकिन किसान कानूनों को रद्द करने से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं। किसान संगठनों और सरकार के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है, जो बेनतीज रही। किसानों के मान-मनौव्वल का सिलसिला अब भी जारी है।

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