Raja Raghuvanshi Murder Case : सुप्रीम कोर्ट से सोनम रघुवंशी को बड़ा झटका, जमानत रद्द कर सरेंडर का दिया आदेश

Amrit Vichar Network
Edited By Deepak Mishra
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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान नई पीढ़ी और न्यूक्लियर फैमिली पर भी की टिप्पणी

राजा रघुवंशी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि ट्रायल में देरी होने पर छह महीने बाद वह दोबारा जमानत याचिका दाखिल कर सकती हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नई पीढ़ी, मोबाइल की बढ़ती निर्भरता और न्यूक्लियर फैमिली सिस्टम पर भी अहम टिप्पणियां कीं।

नई दिल्ली। इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि मुकदमे की सुनवाई में देरी होती है तो छह महीने बाद सोनम दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती हैं। सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसी याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।

बचाव पक्ष ने रखी ये दलील

सुनवाई के दौरान सोनम रघुवंशी के वकील ने अदालत को बताया कि मामले में कुल 94 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल चार गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है और सोनम को कड़ी शर्तों के साथ जमानत मिली थी। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि सोनम जमानत की सभी शर्तों का पालन कर रही हैं और उनके फरार होने की कोई आशंका नहीं है। वकील ने कहा कि सोनम ने सरेंडर नहीं किया था, बल्कि उन्हें उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था, जबकि उनकी गिरफ्तारी को सरेंडर बताया जा रहा है।

मेघालय सरकार ने जमानत का किया विरोध

मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गिरफ्तारी को लेकर दी जा रही दलीलों का कोई आधार नहीं है। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपी ने स्वयं सरेंडर किया था और इसका उल्लेख चार्जशीट में भी दर्ज है। तुषार मेहता ने कहा कि जिस दस्तावेज को लेकर विवाद किया जा रहा है, उसमें केवल एक कानूनी धारा का नंबर टाइप करने में तकनीकी त्रुटि हुई थी। इतनी छोटी तकनीकी गलती के आधार पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जमानत बरकरार रहती है तो सोनम के फरार होने की आशंका बनी रहेगी।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिए थे दो विकल्प

इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी के वकील से पूछा था कि क्या वह स्वयं सरेंडर करेंगी या फिर अदालत उनकी जमानत रद्द करने पर फैसला सुनाए। अपने जवाब में सोनम ने अदालत से कहा कि वह बेगुनाह हैं और उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने दावा किया कि अभियोजन पक्ष का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और केवल आरोपों के आधार पर उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता।

नई पीढ़ी और न्यूक्लियर फैमिली पर कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बदलते सामाजिक परिवेश और नई पीढ़ी को लेकर भी अहम टिप्पणियां कीं। अदालत ने कहा, "आज की पीढ़ी हमसे ज्यादा जानकार हो सकती है, लेकिन दबाव से निपटने के मामले में ज्यादा कमजोर है।" इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "जानकारी ज्यादा है, लेकिन ज्ञान नहीं।" जस्टिस वराले ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आजकल व्हाट्सऐप पर साझा की जाने वाली हर बात को ही ज्ञान मान लिया जाता है। अदालत ने कहा कि आज की पीढ़ी बेहद अधीर हो गई है और हर समस्या का तत्काल समाधान चाहती है।

'बच्चों को तुरंत मोबाइल थमा देना चिंता का विषय'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संयुक्त परिवार में रहने से लोग कठिन परिस्थितियों और निराशा से जूझना सीखते हैं, जबकि न्यूक्लियर फैमिली में छोटी-छोटी बातों पर लोग अधिक परेशान हो जाते हैं। अदालत ने एक हालिया उदाहरण देते हुए कहा कि उसने एक होटल में देखा, जहां रोते हुए बच्चे को शांत कराने के लिए उसके माता-पिता ने तुरंत मोबाइल फोन थमा दिया। कोर्ट ने इसे चिंता का विषय बताते हुए कहा कि बच्चों की भावनाओं को समझने के बजाय उन्हें गैजेट दे दिए जाते हैं। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि एक रिपोर्ट के अनुसार न्यूक्लियर फैमिली सिस्टम बढ़ने के साथ डिप्रेशन के मामलों में भी वृद्धि देखी जा रही है।

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