UP Teacher Transfer : घर कब लौटेंगे? वर्षों से घर वापसी की राह देख रहे शिक्षकों ने चुनावी साल में फूंका आंदोलन का बिगुल, बोले- अब सिर्फ ज्ञापन नहीं, आर-पार की लड़ाई
UP Teacher Transfer : आठ साल... दस साल... और अब भी घर वापसी का इंतजार। लखीमपुर में जुटे शिक्षकों ने कहा- अब सिर्फ ज्ञापन नहीं, आंदोलन होगा। आखिर क्यों अटकी है वरिष्ठता आधारित तबादला नीति? पढ़िए अमृत विचार की रिपोर्ट।
अमृत विचार, लखनऊ । बुधावार की शाम के पांच बज रहे थे। काशीनगर स्थित प्राथमिक शिक्षक भवन में धीरे-धीरे शिक्षक जुटने लगे। बाहर सूरज ढलने की तैयारी में था और भीतर वर्षों से मन में दबा एक सवाल फिर सामने आ गया- घर कब लौटेंगे? बैठक शुरू हुई तो कमरे में दिन का उजाला था, लेकिन चर्चा इतनी लंबी चली कि बाहर अंधेरा हो गया और शिक्षक भवन की रोशनी बल्बों के भरोसे जल उठी। सूरज ढल गया, मगर उन शिक्षकों की उम्मीद नहीं ढली, जो वर्षों से अपने गृह जनपद लौटने का इंतजार कर रहे हैं। यह कोई औपचारिक बैठक भर नहीं थी। यहां पहुंचे अधिकांश शिक्षक एक ही दर्द लेकर आए थे। अंतर्जनपदीय सामान्य स्थानांतरण । उनका कहना था कि उन्होंने सरकारी सेवा का बड़ा हिस्सा अपने परिवार, माता-पिता, पत्नी, बच्चों और सामाजिक जीवन से दूर रहकर बिताया है। अब उन्हें लगने लगा है कि यदि इस बार भी आवाज बुलंद नहीं की गई तो शायद पूरी नौकरी अपने घर से दूर ही पूरी करनी पड़े।
बैठक में क्या तय हुआ?
काशीनगर स्थित प्राथमिक शिक्षक भवन में आयोजित बैठक में प्रदेश संयोजक डॉ.धर्मेंद्र सिंह सहित संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी और जिले के विभिन्न ब्लॉकों से आए सैकड़ों शिक्षक मौजूद रहे। बैठक के दौरान अंतर्जनपदीय समिति के प्रदेश अध्यक्ष तीर्थमणि त्रिपाठी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब केवल ज्ञापन सौंपने से काम नहीं चलेगा। संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगा। इसके लिए प्रत्येक ब्लॉक में सक्रिय साथियों को जोड़ने, संगठन को मजबूत करने और व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने पर सहमति बनी। बैठक में कहा गया कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का समय नजदीक है। ऐसे में शिक्षकों की मांग को प्रभावी ढंग से शासन तक पहुंचाने का यह महत्वपूर्ण अवसर है।
अब हिम्मत दिखाने की जरूरत
वक्ताओं ने कहा कि यदि सभी शिक्षक एकजुट होकर प्रयास करें तो एक-महीने के भीतर सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद की जा सकती है। हमारी बात शासन तक पहुंच चुकी है, अब हिम्मत दिखाने की जरूरत है। बैठक में वक्ताओं ने शिक्षकों से भावनात्मक अपील भी की। उन्होंने कहा कि वर्षों से ज्ञापन दिए गए, मांगें उठाई गईं, लेकिन अब समय संगठन को और मजबूत बनाने का है। प्रत्येक जिले और प्रत्येक ब्लॉक में सक्रिय कार्यकर्ताओं की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया गया। शिक्षकों से कहा गया कि उनकी एकता और संख्या ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। यदि सभी साथी तन, मन और धन से इस अभियान में जुड़ते हैं तो सरकार तक उनकी बात और प्रभावी ढंग से पहुंच सकती है।
जिंदगी का सबसे कीमती समय घर से दूर गुजर गया
बैठक के दौरान कई शिक्षकों ने अपनी पीड़ा भी साझा की। किसी ने कहा कि माता-पिता बूढ़े हो गए, लेकिन उनके साथ रहने का अवसर नहीं मिला। किसी ने कहा कि बच्चों का बचपन नौकरी की मजबूरी में दूसरे जिले से ही गुजर गया। कुछ शिक्षकों ने कहा कि परिवार और समाज से दूर रहते-रहते जीवन का सबसे बहुमूल्य समय निकल गया। शिक्षकों का कहना था कि यह केवल तबादले का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह उनके पारिवारिक, सामाजिक और मानसिक जीवन से जुड़ा प्रश्न बन चुका है।
PTR का ' भूत ' फिर चर्चा के केंद्र में
बैठक में सबसे ज्यादा चिंता पीटीआर (Pupil Teacher Ratio) को लेकर जताई गई। शिक्षकों का कहना था कि यदि सरकार स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह पीटीआर के आधार पर ही लागू करती रही तो सामान्य अंतर्जनपदीय स्थानांतरण बेहद कठिन हो जाएगा। उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में शिक्षक पूरी सेवा अपने गृह जनपद से दूर बिताने को विवश हो सकते हैं। बैठक में मौजूद शिक्षकों ने सरकार से आग्रह किया कि स्थानांतरण नीति पर पुनर्विचार किया जाए और वरिष्ठता को प्रमुख आधार बनाया जाए।
शिक्षक संगठनों पर भी उठे सवाल
बैठक के दौरान केवल सरकार ही चर्चा के केंद्र में नहीं रही। कई शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा विभाग के विभिन्न शिक्षक संगठनों की भूमिका पर भी चिंता जताई। शिक्षकों का कहना था कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी संगठनों को एक मंच पर आना चाहिए। बैठक में जूनियर शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ और चर्चित शिक्षक नेता विवेकानंद से भी इस विषय पर सक्रिय पहल करने का अनुरोध किया गया। कुछ शिक्षकों ने अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त करते हुए कहा कि कई शिक्षक नेता अब शिक्षकों की मूल समस्याओं पर पहले जैसी सक्रियता नहीं दिखा रहे। कुछ ने अधिकारियों से नजदीकी होने की आशंका भी जताई।
हर ब्लॉक से पहुंचे शिक्षक, संगठन ने जताया आभार
बैठक में दुर्गेश पांडेय, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, राजेंद्र तिवारी, शिव प्रकाश, रवि यादव, विजय कुमार पांडेय, अविनाश तिवारी और नंदलाल सहित जिले के पदाधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा विभिन्न ब्लॉकों से आए लगभग सैकड़ों शिक्षकों ने बैठक में भाग लिया। बैठक के अंत में सभी उपस्थित शिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि आंदोलन की सफलता संख्या और संगठनात्मक मजबूती पर निर्भर करेगी। इसलिए प्रत्येक ब्लॉक में अधिक से अधिक शिक्षकों को सक्रिय करने का अभियान चलाया जाएगा।
तीन मांगें, जिन पर अड़े शिक्षक
-आकांक्षी और सामान्य जिलों के लिए लागू व्यवस्था की समीक्षा।
- वरिष्ठता आधारित अंतर्जनपदीय स्थानांतरण शुरू करने पर निर्णय।
- स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित बनाया जाए।
