Bareilly News : दरगाह आला हज़रत से पौधारोपण का संदेश, 108वें उर्स में होगी प्रकृति संरक्षण की अपील
उर्स-ए-रज़वी पर बड़ी पहल, दुनियाभर में 'एक पौधा आला हज़रत के नाम' लगाने का आह्वान
बरेली स्थित दरगाह आला हज़रत से उर्स-ए-रज़वी पर पर्यावरण संरक्षण की बड़ी मुहिम शुरू की गई है। फ़रमान मियाँ की देखरेख में दुनियाभर के अकीदतमंद 'एक पौधा आला हज़रत के नाम' लगाकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रहे हैं।
बरेली, अमृत विचार। सुन्नी बरेलवी मरकज़ दरगाह आला हज़रत से 108वें उर्स-ए-रज़वी के खास मौके पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक शानदार और व्यापक जनजागरूकता अभियान का आगाज किया गया है। इस मुहिम को "एक पौधा आला हज़रत के नाम" का नारा दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनियाभर में मौजूद आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ फ़ाज़िले बरेलवी के अकीदतमंदों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करना और उनकी धार्मिक आस्था को प्रकृति संरक्षण के पवित्र संदेश के साथ जोड़ना है।
फ़रमान मियाँ की देखरेख में चल रहा अभियान
इस वैश्विक मुहिम का संचालन जमाअत रज़ा-ए-मुस्तफ़ा और आला हज़रत ताजुश्शरिया वेलफेयर सोसाइटी के राष्ट्रीय महासचिव व 'भारत गौरव रत्न' से सम्मानित समाजसेवी फ़रमान हसन ख़ान (फ़रमान मियाँ) की देखरेख में किया जा रहा है। फ़रमान मियाँ ने देश-विदेश में रहने वाले अकीदतमंदों, उलेमाओं, इमामों, मदरसों, मस्जिदों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से विशेष अपील की है। उन्होंने आह्वान किया है कि सभी अपने-अपने क्षेत्रों में 'आला हज़रत के नाम' पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं और पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम को एक बड़े जनआंदोलन का रूप दें।
'पौधारोपण इंसानियत और आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी'
बढ़ते प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए फ़रमान मियाँ ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और लगातार घटते वन क्षेत्र जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे नाजुक समय में पौधारोपण केवल एक सामाजिक कार्य नहीं रह गया है, बल्कि यह इंसानियत और हमारी आने वाली पीढ़ियों के प्रति एक बड़ी सामूहिक ज़िम्मेदारी है। अगर हर व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो धरती को दोबारा हरा-भरा बनाया जा सकता है।
उर्स की तकरीरों में गूंजेगा प्रकृति संरक्षण का संदेश
उर्स-ए-रज़वी के दौरान देशभर से आने वाले उलेमा अपनी तक़रीरों (प्रवचनों) में पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों की हिफ़ाज़त का पैगाम देंगे। इसके अलावा मरकज़ से जुड़े मदरसे, मस्जिदें और सामाजिक संगठन भी अपने-अपने स्तर पर पौधारोपण के कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
"आला हज़रत की तालीम केवल दीन तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह इंसानियत, समाज की भलाई और प्रकृति के संरक्षण का भी संदेश देती है। यदि हम उनके नाम पर एक पौधा लगाकर उसकी परवरिश करें, तो यह उनके प्रति हमारी सच्ची मोहब्बत और आने वाली नस्लों के लिए एक अनमोल तोहफ़ा होगा।" - फ़रमान हसन ख़ान (फ़रमान मियाँ)
भारत समेत कई देशों में दिखने लगा असर
जमात रज़ा-ए-मुस्तफा के पूर्व प्रवक्ता समरान खान ने बताया कि फ़रमान मियाँ के इस आह्वान का व्यापक असर अभी से देखने को मिल रहा है। अभियान की शुरुआत के साथ ही भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों में रहने वाले अकीदतमंदों द्वारा बड़ी संख्या में पौधे लगाए जा चुके हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि उर्स-ए-रज़वी के मुख्य आयोजनों तक इस संख्या में तेजी से इजाफा होगा।
