Aviation Jobs: देश में खुलेंगे 11 नए फ्लाइंग स्कूल, 30 हजार से ज्यादा पायलटों की जरूरत; युवाओं के लिए बढ़ेंगे करियर के मौके
भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर को कुशल पायलटों की जरूरत है। AAI ने सात एयरपोर्ट पर 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। अगले 10 साल में देश को करीब 30 से 31 हजार अतिरिक्त पायलटों की जरूरत पड़ने का अनुमान है।
नई दिल्लीः भारत में तेजी से विस्तार कर रहे एविएशन सेक्टर को मजबूत करने के लिए देश में 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य देश में पायलटों की बढ़ती मांग को पूरा करना और घरेलू स्तर पर पायलट ट्रेनिंग की क्षमता बढ़ाना है।
एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने फरवरी 2026 में शुरू किए गए ई-टेंडर के तहत सात एयरपोर्ट पर 11 नए FTO स्लॉट की टेंडर प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। नए फ्लाइंग स्कूल शुरू होने से पायलट बनने की तैयारी कर रहे युवाओं को देश में ही ट्रेनिंग के अधिक विकल्प मिल सकेंगे।
अगले 10 साल में 31 हजार अतिरिक्त पायलटों की जरूरत
सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, आने वाले एक दशक में भारत को करीब 30 से 31 हजार अतिरिक्त पायलटों की जरूरत होगी। एविएशन सेक्टर के विस्तार के साथ यह मांग और बढ़ने की संभावना है।
अगले पांच वर्षों में देश की एयरलाइंस कंपनियां अपने बेड़े में करीब 500 नए विमान शामिल कर सकती हैं। इसके अलावा देश में लगभग 50 नए एयरपोर्ट विकसित किए जाने की संभावना है।
एविएशन सेक्टर के विस्तार का अंदाजा एयर इंडिया की तैयारियों से भी लगाया जा सकता है। टाटा ग्रुप की एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया अगले 18 महीनों में अपने फ्लीट में करीब 50 से 60 नए विमान शामिल करने की तैयारी कर रही है।
देश में 41 FTO, 63 फ्लाइंग बेस से हो रही ट्रेनिंग
अप्रैल 2026 तक देश में DGCA से मंजूर 41 फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) मौजूद हैं, जो कुल 63 फ्लाइंग बेस से संचालित हो रहे हैं।
11 नए FTO शुरू होने के बाद देश की घरेलू पायलट ट्रेनिंग क्षमता में और इजाफा होगा। इससे भारतीय छात्रों को पायलट ट्रेनिंग के लिए विदेश जाने की जरूरत कम हो सकती है।
इन 11 नए FTO में शुरुआती चरण में करीब 60 से 70 ट्रेनिंग विमान शामिल होने की उम्मीद है। पूरी क्षमता पर पहुंचने के बाद इनका बेड़ा 110 से 120 विमानों तक हो सकता है।
ट्रेनिंग क्षमता की बात करें तो नए संस्थानों से शुरुआत में हर साल करीब 400 से 500 विमानन प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। पूरी क्षमता पर यह संख्या बढ़कर करीब 1,500 प्रोफेशनल्स सालाना तक पहुंच सकती है।
CPL जारी होने की संख्या में भी तेजी
भारत में पायलट बनने को लेकर युवाओं की रुचि बढ़ने का संकेत कमर्शियल पायलट लाइसेंस यानी CPL जारी होने के आंकड़ों से भी मिलता है।
2018 में देश में 640 CPL जारी किए गए थे। यह संख्या बढ़कर 2024 में 1,628 हो गई।
हाल के वर्ष में DGCA ने विदेशी संस्थानों से ट्रेनिंग लेने वाले कैडेट्स को 615 CPL जारी किए। इसी अवधि में 2,309 स्टूडेंट पायलट लाइसेंस (SPL) भी जारी किए गए। ये आंकड़े देश में पायलट ट्रेनिंग के लिए बढ़ती मांग और नामांकन की ओर संकेत करते हैं।
रीजनल एयरपोर्ट पर फ्लाइंग ट्रेनिंग से छात्रों को फायदा
नए FTO को रीजनल एयरपोर्ट पर शुरू किए जाने से पायलट बनने की तैयारी कर रहे छात्रों को ट्रेनिंग के लिए अधिक सुलभ और किफायती विकल्प मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही रीजनल एयरपोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल भी किया जा सकेगा। घरेलू स्तर पर ट्रेनिंग क्षमता बढ़ने से भारत को भविष्य में एविएशन सेक्टर के लिए जरूरी कुशल मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिल सकती है।
एविएशन सेक्टर में करियर बनाने वालों के लिए बड़ा अवसर
भारत में एयरलाइंस के बढ़ते बेड़े, नए एयरपोर्ट और बढ़ती हवाई यात्रा के बीच पायलटों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में 11 नए FTO की शुरुआत एविएशन और पायलट ट्रेनिंग सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
खासकर उन युवाओं के लिए यह पहल महत्वपूर्ण है जो कमर्शियल पायलट बनना चाहते हैं और ट्रेनिंग के लिए विदेश जाने के बजाय भारत में ही बेहतर विकल्प तलाश रहे हैं।
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