अमित पाठक के जाते ही पुलिस विभाग में खौफ खत्म, खेल शुरू... जमीन विवाद के मामले में जांच रिपोर्ट बदलने का आरोप
सत्ता पक्ष के दो विधायकों ने डीजीपी से की शिकायत, संयुक्त निदेशक अभियोजन के अभिमत का हवाला देकर सीबीसीआईडी जांच की मांग
बहराइच के पयागपुर जमीन विवाद में जांच रिपोर्ट बदलने के आरोप लगे हैं। आईजी अमित पाठक के तबादले के बाद विपक्षियों को क्लीन चिट देने का मामला डीजीपी तक पहुंचा। सत्ता पक्ष के दो विधायकों ने सीबीसीआईडी जांच की मांग की।
राज्य ब्यूरो/लखनऊ, अमृत विचार : देवीपाटन परिक्षेत्र के आईजी रहे अमित पाठक के स्थानांतरण के बाद बहराइच पुलिस के कुछ अफसरों ने जांचों और विवेचनाओं में खेल करना शुरू कर दिया है। यह बात तब उजागर हुई जब पयागपुर के एक जमीनी विवाद का मामला पुलिस महानिदेशक के पास पहुंचा।
मंगलवार को सत्ता पक्ष के दो विधायकों ने डीजीपी से शिकायत करते हुए कहा कि अमित पाठक के कार्यकाल में जांच अधिकारी सीओ सिटी ने जिन विपक्षियों को अपनी जांच आख्या में दोषी ठहराया था, पाठक का स्थानांतरण होते ही अपनी जांच में उन्हीं दोषियों को क्लीन चिट दे दिया।
विधायकों ने डीजीपी को संयुक्त निदेशक अभियोजन का वह अभिमत भी दिखाया, जिसमें संयुक्त निदेशक ने विपक्षी के खिलाफ एफआईआर की संस्तुति कर रखी थी। फिलहाल डीजीपी ने समस्त प्रकरण की रिपोर्ट तलब की है।
गौरतलब हो कि 08 फरवरी 2026 को पयागपुर निवासी एवं शिकायतकर्ता संजीव जायसवाल ने तत्कालीन आईजी अमित पाठक से शिकायत की थी कि दो विपक्षीगणों ने मिलकर कूटरचना करते हुए उनकी जमीन को कब्जा कर लिया है। इस शिकायत के आधार पर अमित पाठक ने सीओ सिटी को प्रकरण की जांच करने का निर्देश दिया।
बताया जा रहा कि सीओ सिटी ने जांच के दौरान विपक्षियों को दोषसिद्ध किया। लेकिन जमीनी विवाद का मामला होने के कारण सीओ सिटी ने संयुक्त निदेशक अभियोजन से अभिमत मांगा। अभिमत में संयुक्त निदेशक अभियोजन ने मामले को एफआईआर दर्ज कराने योग्य माना। इस दौरान अमित पाठक का स्थानांतरण हो गया। जैसे ही अमित पाठक का स्थानांतरण हुआ जांच रिपोर्ट ही बदल गई। नई आख्या में जिन विपक्षियों को आरोपसिद्ध किया गया था, उन्हें क्लीनचिट दे दिया गया। विवाद जहां का तहां ही रह गया।
बताया जा रहा है कि मूल आख्या में बदलाव करने का खेल हुआ है। बिधायक सवायजपुर और विधायक मल्लावां ने डीजीपी से प्रकरण की सीबीसीआईजी जांच कराने की मांग की है। हालांकि डीजीपी संपूर्ण फाइल तलब की है। विधायकों का कहना है कि अभिमत तभी मांगा जाता है जब एफआईआर लायक अपराध मिलता है। अन्यथा क्लीनचिट देने की स्थिति में अभिमत नहीं मांगते नहीं सुना।
दूसरा जब रिपोर्ट में दोष पाए जाने की स्थिति में ही अभिमत में एफआईआर की संस्तुति की जाती है। उन्होंने डीजीपी के समक्ष यह भी संदेह जताया कि बिना किसी बड़े अधिकारी के मिलीभगत के यह खेल हो ही नहीं सकता। इसलिए संपूर्ण प्रकरण की जांच होनी चाहिए।
