स्कूल में सर्पदंश से छात्र की मौत: जांच पूरी न FIR, खाकी के साये में अंतिम संस्कार
बाराबंकी, अमृत विचार। हैदरगढ़ कोतवाली क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय में सांप के डसने से 8 वर्षीय छात्र की मौत के मामले में घटना के 24 घंटे बाद भी न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही जांच समिति अपनी रिपोर्ट पूरी कर सकी। इस बीच पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में मासूम का अंतिम संस्कार कराया गया। मामले को लेकर परिजनों और ग्रामीणों में अब भी नाराजगी बनी हुई है।
स्कूल में हुआ था हादसा
कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पूरे बढ़ई का पुरवा, मजरे सहावर निवासी अशोक कुमार का 8 वर्षीय बेटा अंशू गांव के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा तीन का छात्र था। सोमवार को वह रोज की तरह स्कूल गया था। बताया जा रहा है कि उस समय विद्यालय में प्रधानाध्यापक और दो सहायक अध्यापक अनुपस्थित थे, जबकि विद्यालय में केवल शिक्षामित्र अमिता सिंह मौजूद थीं।
आरोप है कि अंशू स्कूल परिसर के शौचालय गया था, जहां उसे जहरीले सांप ने डस लिया। घटना के बाद अन्य बच्चों ने शिक्षामित्र को इसकी जानकारी दी, लेकिन तत्काल गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। बताया जाता है कि अंशू दर्द से तड़पता रहा और बाद में उसे एक बेंच पर लिटा दिया गया, लेकिन परिजनों को तुरंत सूचना नहीं दी गई।

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परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप
परिजनों का आरोप है कि सुबह करीब 11 बजे हुई घटना की जानकारी उन्हें लगभग ढाई घंटे बाद दी गई। सूचना मिलते ही परिवार के लोग बच्चे को लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों ने सर्पदंश की पुष्टि भी की। इसके बाद परिजन और ग्रामीण अस्पताल के बाहर शव रखकर विरोध प्रदर्शन करने लगे।
जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार
घटना के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई, जिसमें एडीएम न्यायिक, एएसपी दक्षिणी और बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को शामिल किया गया। हालांकि, 24 घंटे बीतने के बाद भी समिति किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। मृतक बच्चे के पिता की ओर से दी गई तहरीर पर भी अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। कोतवाली प्रभारी अनिल पांडेय ने बताया कि जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं बीएसए नवीन पाठक का कहना है कि जांच जारी है और रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
पुलिस निगरानी में हुआ अंतिम संस्कार
मंगलवार को विरोध जता रहे परिजनों और ग्रामीणों को समझाकर गांव भेजा गया। इसके बाद गांव स्थित पैतृक बाग में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मासूम अंशू का अंतिम संस्कार कराया गया। घटना के बाद पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।
एक शिक्षामित्र पर 90 बच्चों की जिम्मेदारी
जानकारी के अनुसार, देवगरपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक सुरेंद्र कुमार, सहायक अध्यापिकाएं मधु रावत और अनुराधा, तथा एक शिक्षामित्र अमिता सिंह तैनात हैं। घटना वाले दिन प्रधानाध्यापक ऑडिट कार्य के लिए क्षेत्रीय बीईओ कार्यालय गए थे, जबकि दोनों सहायक अध्यापिकाएं अवकाश पर थीं। विद्यालय में करीब 90 बच्चे पंजीकृत हैं और घटना वाले दिन उनकी जिम्मेदारी केवल एक शिक्षामित्र पर थी। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते बच्चे के परिवार को सूचना दे दी जाती और तत्काल इलाज कराया जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
