Bareilly News : आंवला नगर पालिका में 32.50 लाख का घपला, चेयरमैन- ईओ व ठेकेदार फंसे
टीएसी की जांच रिपोर्ट में खुली विकास कार्यों की पोल, मंडलायुक्त ने शासन को भेजी आख्या
आंवला नगर पालिका में 32.50 लाख के वित्तीय घपले की पोल खुल गई है। प्राविधिक परीक्षक (टीएसी) की जांच रिपोर्ट में वाटर कूलर से लेकर निर्माण कार्यों में धांधली की पुष्टि हुई है, जिसमें चेयरमैन, तत्कालीन ईओ और ठेकेदार दोषी मिले हैं।
बरेली, अमृत विचार। नगर पालिका परिषद आंवला में विकास कार्यों में वित्तीय घपले और तकनीकी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। प्राविधिक परीक्षक (टीएसी) ग्राम्य विकास विभाग की विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर पालिका में कुल 32.50 लाख रुपये की वसूली और कटौती प्रस्तावित की गई है। जांच रिपोर्ट में पालिका अध्यक्ष आबिद अली, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ) जितेंद्र कुमार, संबंधित अभियंताओं और ठेकेदार को दोषी पाया गया है। मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी ने आगे की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव को भेज दी है।
बताया गया है कि सितंबर 2025 में सभासद सूरज पाल मौर्य, सचिन गुप्ता, रानी देवी, माया, अनुप्रिया आदि ने मंडलायुक्त से निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। जिसके बाद मंडलायुक्त ने कमेटी बनाकर जांच कराई। टीएसी के प्राविधिक परीक्षक राजेश कुमार ने बीते दिनों स्थलीय निरीक्षण किया और दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल में बड़े पैमाने पर धांधली की पुष्टि हुई। हालांकि, जांच समिति ने शिकायत के कुछ बिंदुओं पर राहत भी दी है। पुरानी इंटरलॉकिंग टाइल्स को बेचकर गबन करने का आरोप जांच में पूरी तरह गलत पाया गया। वहीं अध्यक्ष की ओर से अपने रिश्तेदार को ठेका देने और श्मशान भूमि के कार्यों में धन गबन के आरोप भी साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिए गए।
वाटर कूलर और घटिया पोल मामले में दोष उजागर
निजी शिक्षण संस्थानों में नियम-कायदों को ताक पर रखकर सार्वजनिक धन से वाटर कूलर स्थापित करने के खेल में जांच समिति ने चेयरमैन आबिद अली, तत्कालीन ईओ जितेंद्र कुमार, जल निगम के अवर अभियंता शेर बहादुर पाल और ठेकेदार (रवि ट्रेडर्स) को मुख्य रूप से दोषी ठहराया है। इस मद में 20.44 लाख रुपये की वसूली तय की गई है। इसके अलावा, 155 मिमी की जगह 135 मिमी के घटिया पोल लगाने के मामले में भी इन्हीं अफसरों, ठेकेदार (बांके बिहारी एसोसिएट्स) और सहायक अभियंता ए.के. हल्दानी को उत्तरदायी मानते हुए 2.33 लाख की रिकवरी निकाली गई है।
आउटसोर्सिंग वेतन और निर्माण में भी गड़बड़ी पकड़ी
जांच में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के सत्यापन, तकनीकी योग्यता और वेतन भुगतान में भी गंभीर झोल मिला है। फर्जीवाड़े के तहत 6.41 लाख का संदिग्ध भुगतान पाया गया, जिसकी शत-प्रतिशत वसूली की ठेकेदार मंसूरी अली, ईओ जितेंद्र कुमार, चेयरमैन आबिद अली और सफाई नायक भारत कुमार, मनोज कुमार, पंकज चन्द्रा को दोषी बताया गया है। वहीं, सीसी रोड व नाली निर्माण में गुणवत्ता खराब मिलने पर 50 हजार रुपये और साइन बोर्ड के वजन में कटौती पर 22 हजार से अधिक की वसूली प्रस्तावित की है। इसके अलावा ठेकेदार व कर्मचारियों का 5.78 लाख का ईपीएफ समय पर जमा न कराने पर अध्यक्ष व ईओ की जवाबदेही तय की गई है।
नगर पालिका परिषद आंवला में टीएसी जांच के दौरान 32.50 लाख रुपये की गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और तकनीकी कमियां उजागर हुई हैं। दोषी मिले चेयरमैन, अधिकारियों व ठेकेदारों से इस धनराशि की वसूली व कटौती की संस्तुति की गई है। पूरे मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट नियमानुसार आगे की प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को प्रेषित कर दी गई है। - भूपेंद्र एस. चौधरी, मंडलायुक्त।
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