विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा की मंजूरी, नए टैक्स कानून से विदेशी निवेश को आसान बनाने की तैयारी

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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लोकसभा ने विपक्ष के हंगामे के बीच कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक 2026 पारित कर दिया। विधेयक में विदेशी निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और डिजिटल भुगतान से जुड़े कई बदलाव प्रस्तावित हैं।

दिल्ली। लोकसभा ने गुरुवार को विपक्ष के हंगामे के बीच ‘कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026’ को बिना चर्चा के पारित कर दिया। विपक्षी दल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और अन्य सदस्यों के शोर-शराबे के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विधेयक सदन में पेश किया। विपक्ष राम मंदिर चढ़ावे में कथित चोरी और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा था। हंगामे के कारण विधेयक पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी और इसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई।

विदेशी निवेश और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने का लक्ष्य

सरकार के अनुसार, इस विधेयक का उद्देश्य विश्वसनीय नीतिगत व्यवस्था और प्रक्रियागत निश्चितता उपलब्ध कराकर भारत में विदेशी निवेश को आकर्षित करना और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। लोकसभा ने इस संबंध में जून में जारी अध्यादेश को अस्वीकृत करने वाले आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन के सांविधिक संकल्प को भी खारिज कर दिया। इसके अलावा विपक्षी सदस्यों के कई संशोधन प्रस्ताव भी नामंजूर कर दिए गए।

फंड मैनेजरों और विदेशी कंपनियों को मिलेगी राहत

विधेयक में विदेशी निवेश से जुड़े नियमों को आसान बनाने का प्रस्ताव है। इसके तहत विदेशी फंड मैनेजरों के भारत में आने की प्रक्रिया को सरल किया जाएगा। इसके अलावा विदेशी निवेश को भारत में कारोबार में लगा पैसा नहीं माना जाएगा, जिससे निवेश व्यवस्था को अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को मिलेगा प्रोत्साहन

विधेयक में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत उन विदेशी कंपनियों को मिलने वाली कर छूट को 2040-41 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जो भारत में किसी फैक्टरी को मशीनरी और उपकरण उपलब्ध कराती हैं और अनुबंध निर्माण के तहत इलेक्ट्रॉनिक सामान बनवाती हैं। इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और इनके प्रमुख पार्ट्स व एक्सेसरीज शामिल हैं।

क्लाउड कंपनियों के लिए नियम आसान

विधेयक में भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए मंजूरी की अनिवार्यता खत्म करने का प्रस्ताव भी शामिल है। साथ ही, भारतीय डेटा सेंटर को केवल प्रत्यक्ष स्वामित्व के बजाय पट्टे (Lease) के आधार पर संचालित करने की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है।

डिजिटल भुगतान नियमों में बदलाव का प्रस्ताव

विधेयक में संदाय और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 और आयकर अधिनियम की धारा 269एसयू में बदलाव का प्रस्ताव किया गया है। मौजूदा नियमों के तहत 50 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार वाले बड़े व्यवसायों के लिए रुपे डेबिट कार्ड और भीम-यूपीआई क्यूआर कोड जैसे निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम स्वीकार करना अनिवार्य है।

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