23 देशों के दौरे, 180 करोड़ से ज्यादा खर्च... संसद में सामने आए पीएम मोदी की विदेश यात्राओं के आंकड़े
सरकार ने राज्यसभा में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2025 में 23 देशों की विदेश यात्राओं पर 180 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए। इन दौरों के दौरान 316 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और निवेश सहयोग को बढ़ावा मिला।
दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2025 में की गई विदेश यात्राओं पर 180 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। यह जानकारी केंद्र सरकार ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब के जरिए दी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री ने 2025 में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, जापान समेत 23 देशों का दौरा किया। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने बताया कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राएं भारत के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, निवेश बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर भारत की भागीदारी को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की जाती हैं।
2026 में अब तक 74.58 करोड़ रुपये खर्च
सरकार के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर करीब 74.58 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसमें जुलाई 2026 में इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा भी शामिल है।
2025 में किन देशों की यात्रा पर कितना खर्च
राज्यसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में प्रमुख विदेश यात्राओं पर हुआ खर्च इस प्रकार है
| फ्रांस | 25.59 करोड़ |
| ब्राजील | 17.72 करोड़ |
| अमेरिका | 16.54 करोड़ |
| सऊदी अरब | 15.54 करोड़ |
| चीन | 10.59 करोड़ |
| ब्रिटेन | 9.91 करोड़ |
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने मॉरीशस, थाईलैंड, श्रीलंका, साइप्रस, कनाडा, क्रोएशिया, घाना, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, अर्जेंटीना, नामीबिया, मालदीव, जापान, भूटान, दक्षिण अफ्रीका, जॉर्डन, ओमान और इथियोपिया का भी दौरा किया।
2021 से 2024 तक 295 करोड़ रुपये खर्च
सरकार ने बताया कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर करीब 295 करोड़ रुपये खर्च हुए।
| 2024 | 109 करोड़ |
| 2023 | 93 करोड़ |
| 2022 | 55.82 करोड़ |
| 2021 | 36 करोड़ |
| 316 एमओयू पर हुए हस्ताक्षर |
विदेश मंत्रालय के अनुसार, जुलाई 2021 से दिसंबर 2025 के बीच प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान 316 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। सरकार ने बताया कि अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत में 381.8 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया। मंत्रालय का कहना है कि इन उच्चस्तरीय विदेश यात्राओं से व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और वैश्विक साझेदारी को मजबूती मिली है।
