‘क्रीमी लेयर’ में लागू नहीं हो सकता SC/ST आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने रखा पक्ष

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता। सरकार ने इस संबंध में दायर जनहित याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है।

दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' का सिद्धांत लागू नहीं होता। सरकार ने इस संबंध में दाखिल जनहित याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था और न्यायालय के पूर्व फैसलों के अनुसार एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने का कोई आधार नहीं है। सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि एससी और एसटी के लिए आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने और आरक्षण व्यवस्था में आय आधारित बदलाव के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग न्यायिक हस्तक्षेप के दायरे में नहीं आती।

OBC के लिए लागू है क्रीमी लेयर का सिद्धांत

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि क्रीमी लेयर की अवधारणा केवल अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEBC) के संदर्भ में विकसित हुई है। हलफनामे में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ 'अशोक कुमार ठाकुर बनाम भारत संघ' मामले में पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि एससी और एसटी पर क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं होता।

आरक्षण नीति में बदलाव से पहले जरूरी होगी व्यापक समीक्षा

सरकार ने कहा कि यदि आरक्षण नीति में कोई बड़ा बदलाव करना हो, विशेष रूप से आरक्षित वर्गों के भीतर आय आधारित प्राथमिकता लागू करनी हो, तो उससे पहले व्यापक समीक्षा और सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों का गहन अध्ययन आवश्यक होगा। सरकार का कहना है कि बिना विस्तृत अध्ययन के ऐसी नीति लागू करना उचित नहीं होगा।

नीति बनाना सरकार का अधिकार

हलफनामे में केंद्र ने यह भी कहा कि किसी विशेष प्रकार की नीति बनाने का निर्देश कार्यपालिका को नहीं दिया जा सकता, क्योंकि यह न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर का विषय है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से रमाशंकर प्रजापति एवं अन्य तथा अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर जनहित याचिकाओं को खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि ये याचिकाएं कानून के तहत सुनवाई योग्य नहीं हैं।

क्या है क्रीमी लेयर?

'क्रीमी लेयर' की अवधारणा 1992 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक मंडल आयोग मामले के फैसले के बाद लागू हुई थी। इसके तहत आर्थिक और सामाजिक रूप से अपेक्षाकृत संपन्न OBC परिवारों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। हालांकि, यह व्यवस्था वर्तमान में SC और ST वर्ग पर लागू नहीं है।

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