देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल में बढ़े आत्महत्या के मामले, 2025 में 59 मौत; 5 साल में सबसे ज्यादा केस दर्ज 

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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सीआरपीएफ में 2025 के दौरान आत्महत्या के 59 मामले सामने आए, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक हैं। अधिकांश मामलों में गैर-राजपत्रित जवान शामिल रहे और पारिवारिक समस्याएं व ड्यूटी का दबाव प्रमुख कारण बताए गए।

दिल्ली। देश के सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में वर्ष 2025 के दौरान आत्महत्या के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस साल 59 जवानों ने आत्महत्या की, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है। सूत्रों के मुताबिक, आत्महत्या करने वाले कर्मियों में 80 प्रतिशत से अधिक गैर-राजपत्रित (कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल) रैंक के जवान थे। हालांकि, इस मामले पर सीआरपीएफ की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

पांच साल में 262 आत्महत्या के मामले

वर्ष 2021 से 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, सीआरपीएफ में आत्महत्या के 262 मामले सामने आए। इनमें से 202 मामलों (करीब 77 प्रतिशत) में जवानों ने ड्यूटी के दौरान अपनी जान दी, जबकि बाकी मामलों में वे अवकाश पर थे। वर्षवार आंकड़े इस प्रकार हैं 2025: 59 मामले, 2024: 46 मामले, 2023: 57 मामले, 2022: 43 मामले, 2021: 57 मामले पारिवारिक समस्याएं और ड्यूटी का दबाव प्रमुख वजह सीआरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश मामलों में आत्महत्या की घटनाएं पारिवारिक समस्याओं से जुड़ी पाई गई हैं। कठिन परिस्थितियों में लगातार ड्यूटी और मानसिक दबाव भी इन समस्याओं को बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कारण माना गया है। अधिकारियों ने बताया कि जवानों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कई कल्याणकारी और परामर्श संबंधी पहलें लगातार चलाई जा रही हैं।

आत्महत्या के तरीकों के आंकड़े

पांच वर्षों के आंकड़ों के अनुसार 128 जवानों ने फंदे से लटककर जान दी। 118 जवानों ने खुद को गोली मारी। 12 मामलों में ज़हर खाकर आत्महत्या की गई। दो-दो मामलों में ट्रेन के आगे कूदने और नस या गला काटने की घटनाएं सामने आईं। गैर-राजपत्रित जवानों की संख्या सबसे अधिक जुलाई 2026 तक के आंकड़ों को शामिल करने पर पिछले पांच वर्षों में कुल 281 कर्मियों ने आत्महत्या की। इनमें 237 गैर-राजपत्रित कर्मी, 43 अधीनस्थ अधिकारी, 1 राजपत्रित अधिकारी शामिल थे। आंकड़ों के अनुसार, आत्महत्या करने वालों में लगभग 84 प्रतिशत गैर-राजपत्रित रैंक के जवान थे। करीब 3.25 लाख कर्मियों वाला सीआरपीएफ देश का सबसे बड़ा आंतरिक सुरक्षा बल है। बल का 95 से 97 प्रतिशत हिस्सा आतंकवाद-रोधी अभियान, उग्रवाद-रोधी अभियान और कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसी जिम्मेदारियों में तैनात रहता है।

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