Assam Floods : बाढ़ से मृतकों की संख्या पहुंची 97, 1.68 लाख से ज्यादा लोग अब भी प्रभावित; गोलाघाट में सबसे ज्यादा असर

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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असम में बाढ़ की स्थिति अब भी गंभीर है। दो और मौतों के बाद मृतकों की संख्या 97 पहुंच गई है, जबकि 15 जिलों में 1.68 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। रेलवे सेवाएं आंशिक रूप से बहाल कर दी गई हैं।

गुवाहाटी। असम में बाढ़ की स्थिति शुक्रवार को भी गंभीर बनी हुई है। राज्य में बाढ़ से दो और लोगों की मौत के बाद इस साल अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 97 हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक, राज्य के 15 जिलों में अभी भी 1.68 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में गोलाघाट, शिवसागर, उदलगुड़ी, कामरूप मेट्रोपॉलिटन, नगांव, कामरूप, दरांग, सोनितपुर, होजाई, लखीमपुर, बिस्वनाथ, जोरहाट, चराइदेव, कार्बी आंगलोंग और धेमाजी शामिल हैं।

गोलाघाट में सबसे ज्यादा असर

अधिकारियों के अनुसार, गोलाघाट जिला बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित है, जहां करीब 54 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। इसके बाद शिवसागर में लगभग 49 हजार और जोरहाट में करीब 27 हजार लोग बाढ़ की चपेट में हैं। बुधवार को राज्य के 14 जिलों में करीब 1.6 लाख लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन अब प्रभावितों की संख्या बढ़कर 1.68 लाख से अधिक हो गई है।

राहत शिविरों में हजारों लोग शरण लेने को मजबूर

राज्य के छह जिलों में 133 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में करीब 45 हजार विस्थापित लोगों को आश्रय और जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। बाढ़ के कारण 14,382 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि अभी भी पानी में डूबी हुई है। कई इलाकों में तटबंध, सड़कें, पुल और अन्य सार्वजनिक ढांचे भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।

शिवसागर में रेल संपर्क बहाल

बाढ़ के पानी से रेलवे ट्रैक को हुए नुकसान के कारण करीब दो सप्ताह से प्रभावित शिवसागर जिले में रेल संपर्क बहाल कर दिया गया है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने बताया कि गुरुवार दोपहर से राज्य के कुछ हिस्सों में सीमित रूप से ट्रेन सेवाएं फिर शुरू कर दी गई हैं। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बताया कि सेलेंघाट-अमगुड़ी-सिमलुगुड़ी-शिवसागर टाउन रेल खंड को बहाल कर दिया गया है और गुरुवार शाम चार बजे से इस मार्ग पर परिचालन शुरू हो गया। रेल सेवा बहाल होने के बाद गुवाहाटी से डिब्रूगढ़ के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी फिर से शुरू होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अधिकारियों का आभार जताया।

सुरक्षा के मद्देनजर डीजल इंजन से चलेंगी ट्रेनें

एनएफआर के महाप्रबंधक चेतन कुमार श्रीवास्तव ने प्रभावित रेल खंडों का निरीक्षण किया। इस दौरान पाया गया कि कई बाढ़ प्रभावित लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, अपने सामान और मवेशियों के साथ रेलवे पटरियों के आसपास रह रहे हैं। लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल बहाल किए गए रेल मार्गों पर केवल डीजल इंजन वाली ट्रेनों के संचालन का फैसला लिया गया है। रेलवे के अनुसार, यह कदम बिजली के झटके के खतरे को कम करने और सामान्य स्थिति बहाल होने तक यात्रियों व स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

कई ट्रेनों का बदला गया मार्ग

एनएफआर के मुताबिक, नागालैंड एक्सप्रेस, गुवाहाटी-लेडो-गुवाहाटी इंटरसिटी एक्सप्रेस, लमडिंग-तिनसुकिया-लमडिंग डेमू और तिनसुकिया-जोरहाट टाउन पैसेंजर जैसी ट्रेनें मोरानहाट के रास्ते संचालित होंगी। वहीं लंबी दूरी की ट्रेनें फिलहाल उत्तर लखीमपुर-रंगापाड़ा-उत्तर रंगिया के वैकल्पिक मार्ग से चलाई जाएंगी। यात्रियों की सुविधा के लिए व्यवधान के दौरान विशेष ट्रेनों का संचालन भी जारी रखा गया है।

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