Mohan Bhagwat : जेन जी के आंदोलन को देशविरोधी न कहें, छात्रों की शिकायतें वास्तविक; शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी
RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले- जेन जी और जेन अल्फा अधिक ईमानदार
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि जेन जी और जेन अल्फा सवाल पूछने वाली पीढ़ी है। लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन सहमति बनाने का माध्यम है और छात्रों की समस्याओं का समाधान संवाद से निकाला जाना चाहिए।
लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हालिया छात्र आंदोलनों और जेन जी (Gen Z) को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि यदि जेन जी विरोध-प्रदर्शन कर रही है तो उन्हें 'देशविरोधी' (Anti-National) नहीं कहा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह देश की अपनी नई पीढ़ी है और उनके मुद्दों को संवाद के जरिए समझकर समाधान निकालने की जरूरत है।
एक छात्र संवाद कार्यक्रम में भागवत ने कहा, "अगर जेन जी प्रदर्शन कर रही है तो इसका मतलब यह नहीं कि वे एंटी-नेशनल हैं। वे हमारे अपने लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं।" उन्होंने कहा कि जेन जी और जेन अल्फा मौजूदा पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार हैं और उनके साथ देशभक्ति तथा सेवा की ईमानदार अपील अधिक प्रभावी होती है।
'लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन भी सहमति बनाने का माध्यम'
भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन भी सहमति बनाने का एक माध्यम है। विभिन्न विचारों के बीच संवाद से ही व्यापक सहमति बनती है। यदि किसी कारण से लोगों की बात नहीं सुनी जाती है, तब आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है, लेकिन उसका उद्देश्य समाज में विभाजन पैदा करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।
'छात्रों की शिकायतें वास्तविक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी'
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हाल की घटनाओं में छात्रों की शिकायतें वास्तविक हैं और भारत की शिक्षा व्यवस्था में अभी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर गंभीर संवाद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले की पीढ़ी बड़ों की बात बिना सवाल किए मान लेती थी, लेकिन आज की जेन जी और जेन अल्फा सवाल पूछती है, तार्किक जवाब चाहती है और अपनापन भी चाहती है। लोकतंत्र में यही सही तरीका है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी में इसे 'डिबेट' और भारतीय परंपरा में 'शास्त्रार्थ' कहा जाता है, जहां विभिन्न दृष्टिकोणों से सत्य का व्यापक स्वरूप सामने आता है।
आंदोलन पर आंबेडकर के विचार पढ़ने की सलाह
भागवत ने कहा कि वह यह नहीं कहेंगे कि जेन जी को आंदोलन नहीं करना चाहिए, लेकिन लोकतंत्र में विरोध करने के भी तरीके हैं। उन्होंने इस संदर्भ में डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान सभा में दिए गए भाषणों और संविधान की भावना को समझने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवा किसी व्यक्ति के विरोध में नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं।
पैलेट गन मामले पर बोले- पूरी जानकारी नहीं
छात्रों पर कथित पैलेट गन फायरिंग के सवाल पर भागवत ने कहा कि उनके पास इस घटना की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस संबंध में मीडिया में खबर पढ़ी है, इसलिए बिना पूरी जानकारी के टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि बिना पूरी जानकारी के किसी एक पक्ष पर भरोसा करने की बात होगी तो वह जेन जी पर विश्वास करेंगे।
'शिक्षा कमाई का माध्यम नहीं होनी चाहिए'
शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए और इसकी उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सबसे पहले शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, "शिक्षा हमारे बच्चों और अगली पीढ़ी के निर्माण के लिए है, पैसा कमाने का माध्यम नहीं।" उन्होंने शिक्षकों के करीब 10 लाख रिक्त पदों का उल्लेख करते हुए शिक्षा पर सकल बजट का 6 प्रतिशत खर्च किए जाने की लंबे समय से चली आ रही मांग का भी समर्थन किया।
सोशल मीडिया पर भी जताई चिंता
सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर भागवत ने कहा कि केवल नियम और अनुशासन बनाना पर्याप्त नहीं है। लोगों का दृष्टिकोण भी बदलना होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के जरिए फर्जी वीडियो आसानी से बनाए जा रहे हैं, इसलिए प्रामाणिक और विश्वसनीय स्रोतों की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।
चीन-पाकिस्तान और एलजीबीटी पर भी रखी राय
पाकिस्तान और चीन के साथ नागरिक समाज के संपर्क पर पूछे गए सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि संघर्ष या युद्ध की स्थिति में ऐसे संवाद उचित नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चीन और पाकिस्तान के साथ हमेशा के लिए संवाद बंद नहीं किया जा सकता। युद्ध और आतंकवाद के समय भारत को अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप स्पष्ट रुख रखना चाहिए।
एलजीबीटी समुदाय पर उन्होंने कहा कि वे भी समाज का हिस्सा हैं। हालांकि समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि विवाह संस्था के साथ छेड़छाड़ समाज के लिए कठिनाइयां पैदा कर सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसा तरीका विकसित किया जाना चाहिए, जिससे दो लोग सम्मानपूर्वक साथ रह सकें।
महिलाओं की भूमिका पर क्या बोले भागवत?
महिलाओं की भूमिका पर भागवत ने कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में सक्षम हैं और उन्हें सभी प्रकार के कार्यों के लिए प्रशिक्षण तथा अवसर मिलने चाहिए। आरएसएस में महिलाओं की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि संगठन की स्थापना के समय परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन अब समय बदल चुका है और ऐसे प्रश्न स्वाभाविक हैं।
