UPI पर अफवाह न फैलाएं... निर्मला सीतारमण ने जयराम रमेश को दिया जवाब, बोलीं- ग्राहकों पर नहीं लगेगा शुल्क
वित्त मंत्री ने कहा- प्रस्तावित बदलाव से बैंक और फिनटेक कंपनियां बुनियादी ढांचे व सुरक्षा में अधिक निवेश कर सकेंगी
UPI पर MDR विवाद के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जयराम रमेश के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि MDR केवल व्यापारियों पर लागू होता है, ग्राहकों पर नहीं।
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कराधान एवं अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें यूपीआई (UPI) लेनदेन से जुड़े प्रस्तावित बदलावों को लेकर 'अफवाह फैलाने' से बचना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) केवल व्यापारियों पर लागू होता है, अंतिम उपभोक्ताओं या ग्राहकों पर नहीं। सीतारमण ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे, नवाचार और सुरक्षा में अधिक निवेश करने में मदद मिलेगी। इसका लाभ अंततः सभी यूपीआई उपयोगकर्ताओं को मिलेगा।
'MDR ग्राहकों पर नहीं लगता'
वित्त मंत्री ने कहा कि जयराम रमेश को तथ्यों को समझे बिना बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा, "अफवाह फैलाने से पहले कृपया इस पर विचार करें कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) केवल व्यापारियों पर लागू होता है, न कि अंतिम उपयोगकर्ताओं या ग्राहकों पर। इससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को बुनियादी ढांचे, नवाचार और सुरक्षा में अधिक निवेश करने में मदद मिलेगी।"
संसद में चर्चा का भी दिया तर्क
सीतारमण ने कांग्रेस पर संसद के बाहर इस मुद्दे को उठाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा में विधेयक पर रचनात्मक ढंग से भागीदारी की होती तो इन सभी मुद्दों पर सदन के भीतर विस्तार से चर्चा हो सकती थी। उन्होंने कहा, "यदि आपकी पार्टी विधेयक पेश होने के समय संसद में रचनात्मक रूप से भाग लेती, तो इन सभी मुद्दों पर सदन में चर्चा हो सकती थी।"
क्या बोले थे जयराम रमेश?
इससे पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि कराधान एवं अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 में प्रस्तावित बदलावों से वह वैधानिक गारंटी समाप्त हो सकती है, जिसके तहत यूपीआई लेनदेन शुल्क मुक्त रहे हैं। उनका दावा था कि इससे भविष्य में डिजिटल भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का रास्ता खुल सकता है।
उन्होंने सरकार के इस तर्क को भी खारिज किया कि यूपीआई को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए एमडीआर जरूरी है। रमेश ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं और इसके लिए व्यापारियों या उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस नेता ने वित्त वर्ष 2025-26 में आरबीआई द्वारा केंद्र सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष हस्तांतरण का भी हवाला दिया।
यह भी पढ़ें:-Mohan Bhagwat : जेन जी के आंदोलन को देशविरोधी न कहें, छात्रों की शिकायतें वास्तविक; शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी
