भारत के सामने इंग्लैंड की कड़ी चुनौती, 32 साल से वर्ल्ड कप में जीत का इंतजार; सेमीफाइनल की राह के लिए मुकाबला अहम
इंग्लैंड के खिलाफ जीत के लिए उतरेगा भारत
वेल्स को 3-1 से हराकर भारत ने की शुरुआत, अब दुनिया की तीसरे नंबर की इंग्लैंड टीम से सामना; हरमनप्रीत की टीम के लिए गोल स्कोरिंग और फॉरवर्ड तालमेल बड़ी चुनौती
एम्सटेलवीन। एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप में वेल्स के खिलाफ जीत से अभियान शुरू करने वाली भारतीय टीम के सामने अब पूल चरण की सबसे बड़ी चुनौती है। भारत का सामना सोमवार को विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर मौजूद इंग्लैंड से होगा। विश्व कप के इतिहास में भारत को इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी जीत 1994 में मिली थी। यानी भारतीय टीम को इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में इंग्लैंड के खिलाफ जीत का 32 साल से इंतजार है।
भारत ने शनिवार को अपने पहले पूल मैच में विश्व रैंकिंग में 15वें स्थान पर मौजूद वेल्स को 3-1 से हराया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर से दो गोल किए, जबकि संजय ने भी पेनल्टी कॉर्नर के जरिए गोल दागा।
दूसरी ओर, इंग्लैंड ने अपने पहले मुकाबले में पाकिस्तान को 4-1 से मात देकर मजबूत शुरुआत की है।
नए फॉर्मेट में हर अंक की अहमियत
इस बार विश्व कप का प्रारूप बदला हुआ है। पहले पूल की शीर्ष दो टीमें सीधे क्वार्टर फाइनल में पहुंचती थीं, लेकिन अब पूल चरण के बाद शीर्ष दो टीमें दूसरे चरण में जाएंगी। इस चरण में आठ टीमों को दो पूल में बांटा जाएगा और दोनों पूल की शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी।
ऐसे में पहले चरण के अंक बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि भारत और इंग्लैंड दोनों अगले दौर में पहुंचते हैं तो दूसरे चरण में उनका दोबारा आमना-सामना नहीं होगा और पहले चरण में हासिल किए अंक आगे की स्थिति को प्रभावित करेंगे। इसलिए इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबला भारत की सेमीफाइनल उम्मीदों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फील्ड गोल की कमी दूर करनी होगी
वेल्स के खिलाफ भारत की फॉरवर्ड लाइन ने कई अच्छे मौके बनाए और पेनल्टी कॉर्नर भी हासिल किए, लेकिन फील्ड गोल करने में टीम सफल नहीं रही। इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ भारत को पेनल्टी कॉर्नर पर निर्भरता कम करने के साथ फील्ड गोल के मौके भी भुनाने होंगे।
डिफेंस में खासकर जरमनप्रीत सिंह का प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन भारतीय फॉरवर्ड खिलाड़ियों को बेहतर तालमेल के साथ मौके बनाने और उन्हें गोल में बदलने पर ध्यान देना होगा।
प्रो लीग में भारत-इंग्लैंड का मुकाबला रहा बराबरी का
विश्व कप से पहले प्रो लीग के लंदन चरण में भारत और इंग्लैंड का सामना हुआ था। दोनों टीमों ने पेनल्टी शूटआउट में एक-एक जीत दर्ज की और बोनस अंक हासिल किए थे।
प्रो लीग 2025-26 में इंग्लैंड ने 16 मैचों में सिर्फ दो मुकाबले गंवाए और बेल्जियम के बाद दूसरे स्थान पर रहा। वहीं भारतीय टीम नौ टीमों की तालिका में पाकिस्तान से ऊपर आठवें स्थान पर रही।
प्रो लीग के प्रदर्शन को लेकर कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि खेल में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन टीम का पूरा ध्यान अब विश्व कप पर है। उन्होंने बेहतर तैयारी और मौजूदा फॉर्म पर भरोसा जताते हुए मैच-दर-मैच आगे बढ़ने तथा अधिक से अधिक गोल के मौके बनाने पर जोर दिया।
मानसिक मजबूती भी आएगी काम
टूर्नामेंट से पहले मानसिक मजबूती के लिए स्विट्जरलैंड में आयोजित तीन दिन के बूट कैंप का अनुभव भी भारतीय टीम के काम आ सकता है। इंग्लैंड जैसी मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ दबाव में संयम बनाए रखना और मिले मौकों का फायदा उठाना भारत के लिए अहम होगा।
विश्व कप में इंग्लैंड का रिकॉर्ड मजबूत
इंग्लैंड की टीम 2006 से पिछले पांच विश्व कप में शीर्ष पांच में जगह बनाती रही है। विश्व कप क्वालीफायर में उसने जापान को 5-0, मेजबान मिस्र को 3-0 और अमेरिका को 5-0 से हराया था। इसके बाद मलेशिया को 7-1 और पाकिस्तान को 4-1 से मात दी।
वहीं विश्व कप में भारत का इंग्लैंड के खिलाफ रिकॉर्ड बेहतर नहीं रहा है। भारत ने आखिरी बार 1994 के सिडनी विश्व कप में पांचवें-छठे स्थान के मुकाबले में इंग्लैंड को एक गोल से हराया था। इसके बाद 2002, 2006 और 2010 के विश्व कप में इंग्लैंड ने भारत को समान 3-2 के अंतर से हराया। 2023 के पिछले विश्व कप में दोनों टीमों के बीच मुकाबला गोलरहित ड्रॉ रहा था।
भारत के लिए हर मैच अहम
पूल डी में भारत-इंग्लैंड मुकाबला इस ग्रुप की शीर्ष दो टीमों की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत को इंग्लैंड के बाद 19 अगस्त को पाकिस्तान से मुकाबला खेलना है।
2026 पुरुष हॉकी विश्व कप 14 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड में आयोजित हो रहा है।
