अलग-अलग जिम्मेदारियां, एक ही मंजिल: तनीषा-ध्रुव की जोड़ी ने मिश्रित युगल में पकड़ी जीत की रफ्तार

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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पेरिस ओलंपिक के बाद साथ आई जोड़ी लगातार कर रही है सुधार, कोर्ट पर आगे तनीषा का आक्रमण तो पीछे से ध्रुव संभालते हैं मोर्चा

नई दिल्ली। भारतीय मिश्रित युगल बैडमिंटन जोड़ी तनीषा क्रास्टो और ध्रुव कपिला पिछले दो वर्षों में लगातार अपने खेल को निखार रही है। दोनों की भूमिकाएं भले ही अलग हैं, लेकिन लक्ष्य एक है—कोर्ट पर बेहतर तालमेल के साथ लगातार अच्छा प्रदर्शन करना। सिंगापुर सुपर 750 में सेमीफाइनल तक पहुंच चुकी इस जोड़ी ने बुधवार को मकाऊ के लियोंग इओक चोंग और एनजी वेंग ची को सीधे गेम में 21-11, 21-11 से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई।

पेरिस ओलंपिक के बाद साथ आई यह जोड़ी अब न सिर्फ अपनी रणनीति, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में एक-दूसरे का साथ देने की कला भी सीख चुकी है।

कोर्ट पर दोनों की अलग-अलग जिम्मेदारी

मिश्रित युगल में तनीषा कोर्ट के अगले हिस्से में आक्रामक भूमिका निभाती हैं। उनका काम मौके बनाना और लगातार दबाव बनाए रखना है। वहीं ध्रुव कोर्ट के पिछले हिस्से को संभालते हुए कवरेज देते हैं और तनीषा को आक्रमण के लिए जरूरी समय और जगह उपलब्ध कराते हैं।

ध्रुव के मुताबिक, पिछले दो साल इस साझेदारी को समझने और बेहतर बनाने में बेहद अहम रहे हैं। शुरुआत में दोनों इस बात को समझने की कोशिश कर रहे थे कि उन्हें किस तरह खेलना है, जबकि पिछले साल से अनुभव का फायदा मिलने लगा और इस साल प्रदर्शन में भी उसका असर दिखाई दे रहा है।

टैन किम हर की कोचिंग से बदला तनीषा का खेल

भारतीय टीम से मलेशियाई युगल कोच टैन किम हर के दोबारा जुड़ने के बाद तनीषा के खेल में भी बदलाव आया है। तनीषा ने बताया कि पहले उनका खेल काफी हद तक महिला युगल की शैली जैसा था, लेकिन कोच टैन ने मिश्रित युगल की जरूरत के मुताबिक उन्हें आगे बढ़कर ज्यादा आक्रामक खेलने पर काम कराया।

इस बदलाव का सीधा फायदा ध्रुव को भी मिला, क्योंकि तनीषा के आगे आक्रामक दबाव बनाने से उन्हें पीछे से अधिक मौके मिलते हैं। दोनों के मुताबिक, मिश्रित युगल में यह तालमेल बेहद जरूरी है।

ध्रुव के लिए भी फिटनेस पर खास जोर

टैन किम हर की ट्रेनिंग शैली का असर ध्रुव के खेल में भी दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, अब ट्रेनिंग पहले की तुलना में अधिक शारीरिक है। इससे उन्हें फिटनेस बनाए रखने और कोर्ट पर तेजी से मूव करने में मदद मिल रही है।

हालांकि ध्रुव और तनीषा अभी भी टीम के अन्य कोचों के साथ ट्रेनिंग करते हैं, लेकिन मुख्य कार्यक्रम टैन किम हर की निगरानी में चल रहा है।

जीत में ज्यादा खुश नहीं, हार में ज्यादा निराश नहीं

इस जोड़ी के खेल में सबसे बड़ा बदलाव सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि मानसिक स्तर पर भी आया है। ध्रुव का कहना है कि दोनों अब जीत के बाद जरूरत से ज्यादा उत्साहित होने और हार के बाद अत्यधिक निराश होने के बजाय स्थिर रहने की कोशिश करते हैं।

उनके मुताबिक, पहले प्रदर्शन में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता था, लेकिन अब दोनों ने यह समझना शुरू कर दिया है कि खराब दिन आने पर भी मैच में अपनी लय कैसे बनाए रखनी है।

हार के बाद बैठकर देखते हैं पूरा मैच

तनीषा और ध्रुव की साझेदारी की एक खास बात यह भी है कि खराब प्रदर्शन के बाद दोनों एक-दूसरे से दूरी बनाने के बजाय साथ बैठकर मैच का विश्लेषण करते हैं।

वे सिर्फ अपनी गलतियों पर चर्चा नहीं करते, बल्कि उन चीजों को भी देखते हैं जो उन्होंने अच्छी की थीं। इससे दोनों को अपनी कमियों को समझने के साथ-साथ आत्मविश्वास वापस हासिल करने में मदद मिलती है।

तनीषा के मुताबिक, खराब दिन हर खिलाड़ी के आते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि उसके बाद दोनों फिर से एक साथ खड़े रहें। उनका मानना है कि उनकी साझेदारी में खराब दिनों की तुलना में अच्छे दिन कहीं ज्यादा रहे हैं।

कोर्ट के बाहर भी दिखती है अच्छी बॉन्डिंग

दोनों की आपसी समझ सिर्फ बैडमिंटन कोर्ट तक सीमित नहीं है। वे एक-दूसरे के खेल का विश्लेषण करने, हार के बाद समर्थन देने और निजी पसंद को लेकर मजाक करने में भी सहज हैं।

इसका सबसे दिलचस्प उदाहरण माचा चाय है। ध्रुव को माचा पसंद है और वह खासकर यात्रा के दौरान इसे पीना पसंद करते हैं। वहीं तनीषा को इसका स्वाद बिल्कुल पसंद नहीं है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में माचा के स्वाद की तुलना घास से कर दी।

यानी कोर्ट पर दोनों की रणनीति कितनी भी गंभीर हो, कोर्ट से बाहर उनकी बॉन्डिंग में दोस्ताना अंदाज भी बरकरार है। यही सहजता शायद उनकी साझेदारी को लगातार मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।

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