20 दिन में 20 रुपये किलो बढ़े दाम: चीनी के बढ़ते बेतहाशा दामों पर केंद्र का एक्शन, 1 सितंबर से लागू होगा नया नियम

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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रक्षाबंधन से पहले चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। करीब 20 दिनों में कीमत 20 रुपये प्रति किलो बढ़कर 65 रुपये तक पहुंच गई है। व्यापारियों को त्योहार तक चीनी के 70 रुपये किलो तक पहुंचने की आशंका है।

लखनऊ, अमृत विचार। चीनी के बढ़ते भाव ने रक्षाबंधन के त्योहार पर कड़वाहट घोल दी है। पिछले करीब 20 दिनों में चीनी के दाम 20 रुपये बढ़कर 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। व्यापारी त्योहार तक भाव 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात कह रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक, बढ़ते भाव का प्रमुख कारण चीनी की जमाखोरी, आपूर्ति से अधिक मांग, सट्टेबाजी, गन्ने के उत्पादन में कमी और इथेनॉल सम्मिषण नीति है। पहली अगस्त के आसपास चीनी 45 रुपये प्रति किलो बिक रही थी।

त्योहारी सीजन में 70 रुपये तक पहुंच सकता है भाव

फतेहगंज बाजार के थोक चीनी व्यापारी अमित अग्रवाल ने कहा कि इस गति से चीनी का भाव कभी नहीं बढ़ा। मेरी यादाश्त में 20 रुपये प्रति किलोग्राम की तेजी कभी नहीं आई। त्योहारी सीजन में इतने अधिक भाव बढ़ने का असर मिठाई से लेकर बेकरी कारोबार पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिस तेजी से दाम बढ़ रहे हैं, उस पर अगर सरकार ने तत्काल संज्ञान नहीं लिया तो प्रति किलो भाव 70 रुपये तक पहुंचने में देर नहीं लगेगी। मिलों से ही चीनी महंगी आ रही है।

गन्ने की फसल प्रभावित होने की आशंका

सिटी स्टेशन के रचित सिंघल और दूसरे व्यापारी राधेश्याम ने कहा कि चीनी उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्यों में मानसून के चलते गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। इससे चीनी का उत्पादन घटने की आशंका है। गन्ने के उत्पादन में भी कमी की सूचना मिल रही है। इसके अलावा चीनी के बढ़े दामों का कारण एथेनॉल नीति एक बड़ी वजह हो सकती है।

मिठाई और बेकरी उत्पादों पर भी पड़ेगा असर

पांडेयगंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि अगर जल्द ही चीनी की बेकाबू कीमतों पर लगाम नहीं लगी तो आने वाले त्योहारी सीजन में मिठाइयों और बेकरी उत्पादों के दाम भी आसमान छूने लगेंगे।

त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए भंडारण सीमा तय कर दी है। इसके तहत महीने में 10 टन से अधिक चीनी की खपत करने वाले उपभोक्ता 15 दिन की खपत से अधिक स्टॉक नहीं रख सकेंगे।

खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि खाद्य मंत्रालय ने इस संबंध में 'चीनी (थोक उपभोक्ताओं के लिए भंडारण सीमा) आदेश, 2026' को अधिसूचित कर दिया है। यह आदेश एक सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा। इस आदेश के दायरे में कन्फेक्शनरी, शीतल पेय बनाने वाली कंपनियां, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, मिठाई विक्रेता और अन्य संस्थागत खरीदार आएंगे।

20 दिन में चीनी 20 रुपये किलो तक महंगी

त्योहारों के बीच चीनी की कीमतों में तेजी से उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी है। पिछले करीब 20 दिनों में चीनी के दाम करीब 20 रुपये बढ़कर 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि अगर तेजी जारी रही तो त्योहारी सीजन में चीनी का भाव 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है। कारोबारियों के मुताबिक, चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे जमाखोरी, मांग के मुकाबले कम आपूर्ति, सट्टेबाजी, गन्ने के उत्पादन में कमी और इथेनॉल सम्मिषण नीति जैसे कारण बताए जा रहे हैं।

मिल स्तर पर भी बढ़े चीनी के दाम

चीनी उद्योग के एक संगठन के मुताबिक, मंगलवार को देशभर में चीनी की औसत मिल-स्तरीय बिक्री कीमत बढ़कर 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई, जो एक साल पहले 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 18 अगस्त को चीनी का खुदरा दाम सालाना आधार पर करीब 13 प्रतिशत बढ़कर 52.30 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। एक साल पहले यह 46.34 रुपये प्रति किलोग्राम था।

पहले से लागू थी कारोबारियों के लिए स्टॉक सीमा

इससे पहले सरकार ने एक अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी कारोबारियों के पास 30 दिन के लिए अधिकतम 4,000 क्विंटल स्टॉक रखने की सीमा तय की थी। चीनी मिलों के स्तर पर बिक्री कीमतों में तेज वृद्धि के बीच सरकार ने अब थोक उपभोक्ताओं के लिए भी भंडारण सीमा तय की है। नए आदेश के तहत प्रत्येक मिल द्वारा किसी थोक उपभोक्ता को सीधे या कारोबारियों के जरिये बेची गई चीनी की मासिक मात्रा का सत्यापन किया जाएगा। खपत का निर्धारण विक्रेता और/या खरीदार द्वारा दाखिल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न में चीनी के लिए लागू एचएसएन कोड के आधार पर किया जाएगा।

किन पर लागू होगा आदेश?

आदेश में थोक उपभोक्ता का मतलब ऐसे कन्फेक्शनरी निर्माता, शीतल पेय विनिर्माता, खाद्य प्रसंस्करण इकाई, मिठाई विक्रेता या अन्य संस्थागत खरीदार से है, जिसकी औसत मासिक खपत पिछले एक साल में कम से कम 10 टन रही हो। इसमें मौजूदा महीने की खपत शामिल नहीं होगी। हालांकि, केंद्र या राज्य सरकारों, केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन और स्थानीय निकायों से संबंधित संस्थानों पर यह आदेश लागू नहीं होगा। चीनी की मांग आमतौर पर अगस्त से नवंबर के दौरान बढ़ती है। इस अवधि में गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार होते हैं। ऐसे में मांग बढ़ने के बीच सरकार ने स्टॉक सीमा तय कर कीमतों पर नियंत्रण रखने की कोशिश की है।

नए पेराई सत्र से पहले स्टॉक पर नजर

चीनी का पेराई सत्र 2026-27 एक अक्टूबर से शुरू होने वाला है। उद्योग का अनुमान है कि नया सत्र शुरू होते समय चीनी का शुरुआती स्टॉक 40-42 लाख टन रह सकता है। कुछ शोधकर्ताओं ने इसके 32-35 लाख टन रहने का अनुमान जताया है। दोनों ही अनुमान करीब 50 लाख टन की अनुमानित घरेलू जरूरत से कम हैं। ऐसे में नए पेराई सत्र से पहले चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर नजर बनी हुई है।

 

 

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