Smart Meter पर यूपी में बड़ा एक्शन! 92 हजार उपभोक्ताओं को लौटाए 32.75 करोड़, अफसरों से आयोग ने मांगा जवाब
स्मार्ट मीटर की तय दर से ज्यादा वसूली का मामला; छह डिस्कॉम के MD आयोग के सामने हुए पेश, नए कनेक्शनों में नॉन-स्मार्ट मीटर लगाने और सॉफ्टवेयर की खामियों पर फैसला सुरक्षित
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर बिजली नियामक आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। निर्धारित दर से अधिक वसूली और कास्ट डाटा बुक के उल्लंघन के मामले में पावर कॉरपोरेशन और सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों को आयोग के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ा। सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने शपथ पत्र देकर बताया कि 92,231 उपभोक्ताओं से वसूले गए अतिरिक्त 32.75 करोड़ रुपये उनके बिजली बिलों में वापस किए जा चुके हैं।
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की पीठ में अध्यक्ष अरविंद कुमार, सदस्य संजय कुमार सिंह और सदस्य लीगल गिरीश कुमार वैश्य शामिल रहे। सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद आयोग ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
92 हजार उपभोक्ताओं को वापस किए गए 32.75 करोड़
सुनवाई के दौरान पावर कॉरपोरेशन और डिस्कॉम अधिकारियों की ओर से बताया गया कि स्मार्ट मीटर से जुड़ी निर्धारित दर से अधिक वसूली के मामले में 92,231 उपभोक्ताओं को कुल 32.75 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं।
यह रकम उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में समायोजित किए जाने की जानकारी आयोग के सामने दी गई।
3.75 लाख नए कनेक्शन में सिर्फ 92 हजार पर स्मार्ट मीटर
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सुनवाई के दौरान नए बिजली कनेक्शनों में स्मार्ट और नॉन-स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के मुताबिक, 3,75,859 नए कनेक्शनों में से केवल 92,231 कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लगाए गए, जबकि करीब 75 प्रतिशत उपभोक्ताओं को नॉन-स्मार्ट मीटर दिए गए।
परिषद ने नोएडा, कानपुर, गाजियाबाद, लखनऊ, आगरा और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों में नॉन-स्मार्ट मीटर के जरिए कनेक्शन दिए जाने को नियमों के दोहरे पालन का मामला बताया।
करोड़ों के सॉफ्टवेयर सिस्टम पर भी उठे सवाल
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉरपोरेशन के सॉफ्टवेयर और मॉनिटरिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। परिषद ने स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए पूछा कि यदि स्मार्ट मीटर अनिवार्य हैं तो विभागीय सॉफ्टवेयर नॉन-स्मार्ट मीटर के जरिए नए कनेक्शन जारी करने की अनुमति कैसे दे रहा है।
परिषद अध्यक्ष ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि केवल बार-बार माफी मांगने से नियामक आदेशों के उल्लंघन की समस्या खत्म नहीं होगी।
छह प्रबंध निदेशक हुए व्यक्तिगत रूप से पेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए पावर कॉरपोरेशन और सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। अधिकारियों ने अपने पक्ष में शपथ पत्र भी दाखिल किए।
आयोग ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। अब अंतिम आदेश में यह स्पष्ट होगा कि आयोग अधिकारियों की जवाबदेही और स्मार्ट मीटर व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर क्या दिशा-निर्देश जारी करता है।
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