मेरठ जेल में गूंज रहे प्यार और जुदाई के नगमे, ‘रेडियो परवाज’ बना बंदियों का साथी

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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जेल की बैरकों में सुबह-शाम बजते हैं बंदियों की पसंद के गीत, पुरुषों को पुराने प्यार और बेवफाई के नगमे पसंद, महिला बंदियों की फरमाइश में मां और परिवार से जुड़े गीत

मेरठ: ऊंची दीवारों और लोहे की सलाखों के बीच जिंदगी बिता रहे मेरठ जिला जेल के बंदियों के लिए संगीत अब मनोरंजन के साथ भावनाओं को व्यक्त करने का जरिया भी बन गया है। करीब तीन महीने पहले शुरू हुआ ‘रेडियो परवाज’ बंदियों के बीच खासा लोकप्रिय हो रहा है। यहां सबसे ज्यादा फरमाइश प्यार, जुदाई और बेवफाई से जुड़े पुराने फिल्मी गीतों की आ रही है।

8 मई से शुरू हुआ ‘रेडियो परवाज’

जेल में 8 मई को ‘रेडियो परवाज’ की शुरुआत हुई थी। इसके जरिए रोजाना बंदियों की पसंद के गीत प्रसारित किए जाते हैं। मेरठ के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, जेल प्रशासन ने रेडियो स्टेशन के लिए जगह उपलब्ध कराई, जबकि इंडिया विजन फाउंडेशन ने इसका पूरा तंत्र तैयार किया।

बंदी एक दिन पहले पर्ची के जरिए अपनी पसंद के गीत की फरमाइश करते हैं। अगले दिन उस गीत को रेडियो पर बजाया जाता है। फरमाइश के दौरान बंदी का नाम नहीं लिया जाता, बल्कि केवल उसकी बैरक संख्या बताई जाती है।

70 से 90 के दशक के गानों की सबसे ज्यादा मांग

रेडियो पर सबसे अधिक फरमाइश 1970, 1980 और 1990 के दशक के फिल्मी गीतों की आ रही है। पुरुष बंदी प्रेम, जुदाई और बेवफाई से जुड़े गीतों के अलावा भक्ति और जिंदगी की परिस्थितियों पर आधारित पुराने गाने भी सुनना पसंद करते हैं।

महिला बंदियों की पसंद में भी प्यार और दर्द भरे गीत शामिल हैं, लेकिन उनकी फरमाइश में मां, बच्चों और परिवार से जुड़े गीतों की मांग अधिक रहती है।

1,900 पुरुष और 63 महिला बंदी

मेरठ जिला जेल में करीब 1,900 पुरुष और 63 महिला बंदी हैं। जेल अधीक्षक के अनुसार, रेडियो सेवा शुरू होने के बाद बंदियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। रोजाना अलग-अलग बैरकों से गीतों की फरमाइश आती है।

उन्होंने कहा कि संगीत और सकारात्मक माहौल बंदियों का मानसिक तनाव कम करने के साथ उनके सुधार और पुनर्वास में भी मददगार हो सकता है।

जेल में बना पूरा रेडियो सेटअप

‘रेडियो परवाज’ के लिए जेल के भीतर कंप्यूटर, मिक्सर, आधुनिक स्पीकर और ‘सारेगामा कारवां’ समेत कई उपकरण लगाए गए हैं। जेल की सभी बैरकों में स्पीकर लगाए गए हैं।

रेडियो का प्रसारण सुबह और शाम करीब दो-दो घंटे किया जाता है। खास बात यह है कि रेडियो जॉकी यानी आरजे की जिम्मेदारी भी एक बंदी संभाल रहा है। उसे इंडिया विजन फाउंडेशन की ओर से इसके लिए प्रशिक्षण दिया गया है।

बंदियों को अपनी आवाज में गाने का भी मौका

रेडियो परवाज सिर्फ गाने सुनाने तक सीमित नहीं है। इच्छुक बंदियों को स्टूडियो में जाकर अपनी आवाज में गीत गाने का अवसर भी दिया जाता है। इस तरह रेडियो बंदियों के लिए अपनी रचनात्मकता और भावनाओं को व्यक्त करने का मंच भी बन रहा है।

यूपी की 11 जेलों में चल रहे रेडियो केंद्र

इंडिया विजन फाउंडेशन के अनुसार, उत्तर प्रदेश की जेलों में ‘रेडियो परवाज’ के 11 केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनमें आगरा जिला जेल, आगरा केंद्रीय जेल, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, मुरादाबाद, वाराणसी केंद्रीय जेल, आजमगढ़, मेरठ, सहारनपुर और लखनऊ की जिला जेल शामिल हैं।

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