Jalaun News: आरक्षण के खिलाफ उरई में अनशन, जातिगत आरक्षण की समीक्षा से लेकर UGC नियमों में बदलाव तक उठीं मांगें

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उरई के गांधी चबूतरा पर आरक्षण हटाओ आंदोलन के तहत अनशन किया गया। आंदोलनकारियों ने जातिगत आरक्षण की व्यापक समीक्षा, UGC के 2026 के नियमों की पुनर्समीक्षा और SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए कानूनी सुधार की मांग उठाई।

उरई/जलौन, अमृत विचार। आरक्षण हटाओ आंदोलन के तत्वावधान में रविवार को गांधी चबूतरा, उरई में अनशन आयोजित किया गया। अनशन के दौरान आंदोलनकारियों ने जातिगत आरक्षण की व्यापक समीक्षा, UGC के वर्ष 2026 में जारी नए नियमों एवं विनियमों की पुनर्समीक्षा तथा SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक कानूनी सुधार किए जाने की मांग उठाई।

आंदोलनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी जाति, समुदाय या वर्ग का विरोध करना नहीं है। उनका कहना है कि आंदोलन समान नागरिक अधिकार, योग्यता के आधार पर अवसर, सामाजिक समरसता और कानून के समान एवं निष्पक्ष अनुपालन की मांग को लेकर किया जा रहा है।

आंदोलन के दौरान जातिगत आरक्षण की व्यापक समीक्षा कर इसे चरणबद्ध रूप से समाप्त करने की दिशा में नीति बनाने की मांग की गई। आंदोलनकारियों ने कहा कि शिक्षा और रोजगार में अवसर उपलब्ध कराने में जाति के साथ आर्थिक स्थिति, पारिवारिक परिस्थितियों, प्रतिभा और वास्तविक जरूरत को भी आधार बनाया जाना चाहिए।

UGC के 2026 के नियमों की पुनर्समीक्षा की मांग

UGC के नए नियमों को लेकर आंदोलनकारियों ने कहा कि वर्ष 2026 में जारी नियमों एवं विनियमों की पुनर्समीक्षा की जाए। जिन प्रावधानों को वे पक्षपातपूर्ण या भेदभावपूर्ण मानते हैं, उन्हें वापस लेकर सभी वर्गों के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए। SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर आंदोलनकारियों ने कहा कि कानून का उद्देश्य पीड़ित वर्गों की सुरक्षा करना है, लेकिन किसी भी निर्दोष व्यक्ति के विरुद्ध इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने दुर्भावनापूर्ण मामलों में निष्पक्ष जांच, उचित कानूनी प्रक्रिया और निर्दोष नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

सरकार से वार्ता और उच्चस्तरीय समिति की मांग

आंदोलनकारियों ने केंद्र एवं राज्य सरकार से प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाने तथा सभी मांगों पर सार्थक चर्चा करने की अपील की। साथ ही नीतिगत एवं विधायी सुधारों के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि अनशन शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का माध्यम है। मांगों पर सकारात्मक पहल होने तक आंदोलन को संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखने की बात कही गई।

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