नेपाल में उफान पर 3 नदिया, बाढ़ से मरने वालों की संख्या पहुंची 1127, लोगों से सतर्क रहने की अपील
नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है, जबकि 4,858 लोग लापता हैं। राहत और बचाव अभियान में अब तक 6,541 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है।
काठमांडू। नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है और 4,858 लोग अभी भी लापता हैं। समाचार पत्र 'द काठमांडू पोस्ट' ने बुधवार को पुलिस के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को बचाया गया है और 4,858 लोग अभी भी लापता हैं। गौरतलब है कि 26 अगस्त की सुबह उत्तरी नेपाल में उस समय भीषण बाढ़ आ गई जब चीन की तरफ से पानी का एक विशाल सैलाब भोटेकोशी नदी में आकर मिल गया था। यह बाढ़ एक बड़े ग्लेशियर के टूटने और उसके बाद हुए भूस्खलन के कारण आई थी।
नेपाल में बाढ़ का खतरा
नेपाल के विभिन्न हिस्सों में हुई बारिश के बाद तीन बड़ी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चले जाने के कारण बुधवार को अधिकारियों ने इस हिमालयी देश के मध्य, पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
इन तीन नदियों का बढ़ा जलस्तर
जल एवं मौसम विज्ञान विभाग के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग के अनुसार दो सितंबर को सुबह छह बजे तक सिंधुली जिले में सुन कोशी नदी, गोरखा में बूढ़ी गंडकी नदी और डडेलधुरा में महाकाली नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर था। प्रभाग ने मंगलवार को बताया कि लामजुंग जिले में मार्स्यांगदी नदी का जलस्तर रात 11 बजकर 15 मिनट पर भुकुंडेबेसी जलस्तर निगरानी केंद्र में खतरे के निशान के ऊपर दर्ज किया गया।
लोगों से सुरक्षित जगह पर जानें की अपील
विभाग की ओर से जारी ताजा जानकारी के अनुसार, मार्स्यांगदी नदी में जलस्तर अब भी बढ़ रहा है। नदी में पानी का बहाव बढ़ने से बाढ़ का खतरा अधिक है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है इसलिए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
विभाग ने इन नदियों के किनारे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने को कहा है क्योंकि बाढ़ का खतरा बना हुआ है। अधिकारियों ने नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से भी सतर्क रहने और पानी का स्तर और बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है। नेपाल में इन दिनों लगातार बारिश हो रही है क्योंकि काठमांडू समेत देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय है।
भारत की स्पेशल टीम रेस्क्यू मिशन में तैनात
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी नवीनतम जानकारी के अनुसार, राहत अभियानों के तहत चिलिमे स्थित जलविद्युत सुरंगों में अपनी पकड़ मजबूत करने के बाद, भारतीय टनल बचाव दल को अत्यधिक सीमित स्थान, कठिन इलाके के कारण खासी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इन कठिनाइयों के बावजूद, नवीन तरीकों का उपयोग करते हुए बचाव दल सुरंग में और अधिक गहराई तक पहुंचने में सफल रहा है।
सुरंग के अंदर फंसे किसी भी व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए यह अभियान कल भी जारी रहेगा। इसी के साथ, भारत से भेजी गयी फॉरेंसिक टीम ने भी नेपाल के अपने समकक्षों के साथ समन्वय स्थापित कर अपने कार्यों का दायरा बढ़ाया है। यह टीम डीएनए परीक्षण और विश्लेषण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम दे रही है, जिससे नेपाल में डीएनए नमूनों की जांच प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी।
भारत का पांचवां विमान नेपाल रवाना
भारत ने बुधवार को बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित नेपाल के लिए पांच टन से अधिक आवश्यक दवाओं की पांचवीं खेप भेजी और साथ ही 11 सदस्यीय बचाव दल भी रवाना किया गया।
नेपाली अधिकारियों ने बताया कि पिछले सप्ताह हिमालयी देश में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,000 से अधिक हो गई है।
बचावकर्मियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों से और शव बरामद किए जाने के बाद मृतकों की संख्या में यह बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन दलों ने 12,000 से अधिक लोगों को बचा लिया है, जबकि लगभग 4,000 लोग अब भी लापता हैं। खोज और बचाव अभियान जारी है।
भारत ने नेपाल भेजी राहत सामग्री
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, ''भारत का पांचवां विमान नेपाल के लिए रवाना हो गया है। इसमें विशेष उपकरणों से लैस 11 सदस्यीय बचाव दल और 5.5 टन आवश्यक दवाएं भेजी गई हैं।''
भारत अब तक नेपाल को कुल 68.5 टन राहत सामग्री पहुंचा चुका है। दिल्ली ने खोज और बचाव अभियानों के लिए उपकरणों के साथ चिकित्सकों और पैरा चिकित्सकों की एक टीम तथा तकनीकी दल भी भेजा था।
भारत ने राहत सामग्री की पहली खेप 26 अगस्त को भेजी थी, जिस दिन नेपाल में अचानक बाढ़ आई और तबाही मची थी। यह खेप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने नेपाली समकक्ष बालेन्द्र शाह से बातचीत करने के कुछ घंटे बाद भेजी गई थी। मोदी ने शाह को स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था।
