बरेली: पूर्व नगर आयुक्त के कार्यकाल में चला करोड़ों के घोटाले का खेल
अमृत विचार, बरेली। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की भूमि को लेकर पद की गरिमा के खिलाफ जाकर कार्य करने वाले तत्कालीन नगर आयुक्त राजेश कुमार श्रीवास्तव के कार्यकाल में नगर निगम में कई गड़बड़ियां हुईं। पोर्टेबल शॉप के नाम पर मनमाने तरीके से केमिकल्स कंपनी की रसीद पर करोड़ों रुपये हजम कर लिए गए। इसमें शामिल …
अमृत विचार, बरेली। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की भूमि को लेकर पद की गरिमा के खिलाफ जाकर कार्य करने वाले तत्कालीन नगर आयुक्त राजेश कुमार श्रीवास्तव के कार्यकाल में नगर निगम में कई गड़बड़ियां हुईं। पोर्टेबल शॉप के नाम पर मनमाने तरीके से केमिकल्स कंपनी की रसीद पर करोड़ों रुपये हजम कर लिए गए।
इसमें शामिल लोगों की पहुंच सत्ता के गलियारे में होने के कारण करीब डेढ़ साल से जांच अटकी हुई है। इतना ही नहीं नगर निगम से पत्रावलियों को गायब करने का भी खेल चलता रहा है।
पूर्व नगर आयुक्त के कार्यकाल में पोर्टेबल शॉप आवंटन में गड़बड़ी करने का प्लान बेहद चालाकी से निगम के जिम्मेदारों और ठेकेदारों की मिलीभगत से बनाया गया था क्योंकि सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की फाइलों को गायब करने की तरह ही पोर्टेबल शाप के आवंटन की पत्रावलियां भी निगम के पास मौजूद नहीं हैं।
शहर के नॉन वेंडिंग जोन इंदिरा मार्केट में आवंटित की गईं 240 पोर्टेबल शॉप में गड़बड़ी करने वाले ने तो तत्कालीन नगर आयुक्त से मिलकर बड़ी साजिश रची है। इस मामले की जांच हुई तो पोर्टेबल शॉप बेचकर करोड़ों रुपये अपनी जेब में डाल चुके तत्कालीन नगर आयुक्त राजेश कुमार श्रीवास्तव, निगम के तीन बड़े ठेकेदार, दो सफेदपोश भाजपा नेता और अधिकारी-कर्मचारियों के फंसने की चर्चा रही।
इस मामले में पात्रों को दरकिनार कर अपात्रों को पोर्टेबल शॉप आवंटित करने के प्रकरण में तत्कालीन परियोजना अधिकारी डूडा विनय कुमार की भूमिका संदिग्ध रही। इस मामले में पूर्व नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन ने प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग को जुलाई माह में भेजे पत्र में भी पूरे प्रकरण में परियोजना अधिकारी डूडा विनय सिंह को जिम्मेदार ठहराया था।
उन्होंने 11 जुलाई 2019 को पूर्व नगर आयुक्त ने पोर्टेबल शॉप आवंटित प्रकरण की रिपोर्ट शासन को भेजी थी लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसी तरह करीब एक साल पहले औद्योगिक क्षेत्र परसाखेड़ा रोड नंबर एक और दो पर स्थित पोर्टेबल शॉप का निर्माण कामना स्टेयर्स एंड केमिकल्स ने किया था। यहां करीब 88 दुकानें दुकानदारों को आवंटित कर दीं। सभी दुकानदारों से करोड़ों की रकम लेने के बाद फर्म ने रसीद भी विश्वास के लिये सभी को काट कर दे दी।
यह सब नगर निगम के जिम्मेदारों की देखरेख में हुआ है। इससे साफ जाहिर होता है कि नगर निगम की मिलीभगत रही है। सबसे गंभीर बात तो यह रही कि उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास परिषद ने इसे अवैध मानकर हटवा दिया। इस मामले में निगम के पास कोई फाइल मौजूद नहीं रही।
इसी बीच रजऊ परसपुर स्थित सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की भूमि को लेकर पूर्व नगर आयुक्त ने अपने दायित्वों से इतर कार्य किया। सर्वोच्च न्यायालय में केस की पैरवी करने की जगह मुकदमे को वापस लेने के साथ ही सालिड वेस्ट मैननेजमेंट प्लांट को दूसरी जगह भेजने की नींव डाल दी।
सूत्रों की मानें तो पूर्व नगर आयुक्त के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाले कई जिम्मेदार कर्मचारी और अधिकारी भी रहे हैं। गलत तरीके से कार्य कराने वालों के लिए ऐसा मौका इस दौरान मिला था कि जो चाहते वह होता था। अब देखना है कि दो बड़े मामलों में गड़बड़ी उजागर होने के बाद कार्रवाई शासन स्तर से होती है अथवा नहीं। अगर कार्रवाई हुई तो कई जिम्मेदारों पर गाज गिरनी तय है।
