बरेली: ठंड में दुधारू पशुओं पर नहीं ध्यान तो हो जाएंगे परेशान
अमृत विचार, बरेली। सुबह-शाम ठंड कहर बरपा रही है। बारिश के बाद से मौसम में तेजी से बदलाव दिख रहा है। आने वाले दिनों में ठंड का प्रकोप और बढ़ेगा। इसलिए पशुपालक दुधारू पशुओं के रहने व उनके आहार का ठीक से प्रबंध करें नहीं तो उनकी तबीयत खराब होने के साथ ही दूध उत्पादन …
अमृत विचार, बरेली। सुबह-शाम ठंड कहर बरपा रही है। बारिश के बाद से मौसम में तेजी से बदलाव दिख रहा है। आने वाले दिनों में ठंड का प्रकोप और बढ़ेगा। इसलिए पशुपालक दुधारू पशुओं के रहने व उनके आहार का ठीक से प्रबंध करें नहीं तो उनकी तबीयत खराब होने के साथ ही दूध उत्पादन में गिरावट आ सकती है।
पशु विशेषज्ञ सर्दी के मौसम में पशुओं को संतुलित आहार में ऊर्जा, प्रोटीन, खनिज तत्व, पानी, विटामिन वसा आदि पोषक तत्व की सलह दे रहे हैं। इधर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) ललित कुमार वर्मा का कहना है कि ठंड में पशुओं के खान-पान और दूध निकालने का समय एक रखना चाहिए क्योंकि सर्दी के मौसम में अंदर व बाहर के तापमान में अंतर होता है।
पशु के शरीर का सामान्य तापमान विशेष तौर से गाय का 101.5 डिग्री फारेनहाइट व भैंस का 98.3 से 103 डिग्री फारेनहाइट होता है। ऐसे में पशुओं को ठंड से बचाने के लिए खिड़कियों पर बोरी व टाट के पर्दे आदि लगाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
ठंड में अवश्य रखें सेंधा नमक का ढेला
शीतलहर में पशु के खाने के ऊपर सेंधा नमक का ढेला रखें ताकि पशु जरूरत के अनुसार उसे चाटता रहे। सर्दी में पशुओं को हरे चारे के साथ सूखा चारा भी दें। पशुओं को सर्दी के मौसम में गुनगुना, ताजा व स्वच्छ पानी भरपूर मात्रा में पिलाएं क्योंकि पानी से ही दूध बनता है और सारी शारीरिक प्रक्रियाओं में पानी का अहम योगदान रहता है। इसके अलावा धूप निकलने पर पशुओं को बाहर बांधें और दिन गर्म होने पर नहलाकर सरसों के तेल की मालिश करें। जिससे पशुओं को खुश्की आदि से बचाया जा सकता है। साथ ही सर्दियों में दुधारू पशुओं को कपास के बिनौले अधिक मात्रा में खिलाना चाहिए। बिनौला दूध के अंदर चिकनाई की की मात्रा को बढ़ाता है। इसलिए बाजरा किसी भी संतुलित आहार में 20 फीसदी से अधिक नहीं मिलाना चाहिए।
बेहतर स्वास्थ्य के लिए ताजा पानी ही पिलाएं
पशुओं के लिए पशुशाला में स्वच्छ और ताजे पानी का प्रबंध हो क्योंकि पानी की कमी से पशुओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और उनका दूध उत्पादन भी प्रभावित होता है। इसलिए सर्दियों में पशुओं को तालाब, पोखर, नालों, और नदियों का गंदा और दूषित पानी बिल्कुल न पिलाएं बल्कि उन्हें दिन में तीन से चार बार साफ-स्वच्छ पानी पिलाना चाहिए। पानी पिलाने को टैंक की दीवारों की बिना बुझे चूने से पुताई करने के साथ ही नीचे भी चूना डाल दें। इससे पानी हल्का, स्वच्छ होने के साथ काफी हद तक पशुओं के शरीर की कैल्शियम की पूर्ति भी करता है।
