बरेली: ‘सीबीआई’ का काम और ईमानदार एसएसपी ने जेल से रिहा करा दिया निर्दोष

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बरेली,अमृत विचार। एबीवीपी के कार्यकर्ता कमल गुप्ता के भाई के कत्ल के आरोप में शैंकी को 51 दिन जेल में बिताने पड़े। वहीं सच्चाई जानने के बाद एबीवीपी के नेता और भाजपा के नेताओं ने पुलिस पर काफी दबाव बनाया कि किसी तरह से मामले को निपटा दिया जाए और हादसा दिखाकर योगेश की फाइल …

बरेली,अमृत विचार। एबीवीपी के कार्यकर्ता कमल गुप्ता के भाई के कत्ल के आरोप में शैंकी को 51 दिन जेल में बिताने पड़े। वहीं सच्चाई जानने के बाद एबीवीपी के नेता और भाजपा के नेताओं ने पुलिस पर काफी दबाव बनाया कि किसी तरह से मामले को निपटा दिया जाए और हादसा दिखाकर योगेश की फाइल को बंद कर दिया जाए। लेकिन सीबीआई में दस साल बिताकर आए इंस्पेक्टर बारादरी शितांशु शर्मा और एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने किसी की भी न सुनी।

एक-एक शख्स के कई बार बयान दर्ज किए गए। बयानों में लोगों ने बार-बार अपने बयान बदले। इसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाई तो मौके पर मौजूद लोग टूट गए और फिर सच बताया। सच यह था कि कमल गुप्ता खुद गोली चला रहे थे। पहली गोली हवा में चली और फिर दूसरा फायर हुआ लेकिन तमंचे से गोली नहीं चली। इसके बाद कमल ने तमंचे को झटका दिया तो तमंचे में फंसी गोली अचानक निकल गई और योगेश की पीठ में लग गई। इसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

बता दें कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) नेता कमल गुप्ता के भाई योगेश के कुछ समय पहले गोली लग गई थी। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया था। इसके बाद परिवार ने नेताओं के साथ मिलकर हंगामा काटा और मोहल्ले के एक युवक समेत चार लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने हत्यारोपी शैंकी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। लेकिन जब मामले की जांच की गई तो पता चला कि गोली एबीवीपी नेता से ही गलती से चल गई थी। पुलिस ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपी और शैंकी को बेकसूर बताया, जिसके बाद उसे रिहा कर दिया गया।

15 नवंबर को एबीवीपी कार्यकर्ता कमल गुप्ता के भाई योगेश गुप्ता के घर के बाहर अचानक गोली लग गई थी, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पीड़ित परिवार ने हंगामा काटा तो पुलिस ने मोहल्ले के रहने वाले अजय गुप्ता उर्फ शैंकी, मुकेश समेत चार लोगों पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज करके शैंकी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस की जांच में पता चला कि शैंकी तो घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था, जबकि मौके पर खड़े लोगों ने बताया कि गोली कमल गुप्ता से चली थी। इसके बाद पुलिस ने शैंकी को बेकसूर मानते हुए कोर्ट में 169 की रिपोर्ट भेजी। इसके बाद उसे बुधवार को रिहा कर दिया गया। वहीं कमल अभी तक फरार चल रहा है।

“शैंकी का योगेश की हत्या से कुछ लेना देना नहीं है। वह बेकसूर है। इसलिए उसे रिहा कराया गया है। इस मामले में दोषी ही जेल जाएगा।” -रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी

कप्तानों ने दर्द सुना होता तो इनको नहीं काटनी होती जेल
संजय शर्मा, बरेली। राई का पहाड़, रास्सी का सांप, सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का… जैसी कहावतें पुलिस पर ऐसे ही नहीं बनी है। कुछ दरोगा और इंस्पेक्टरों ने पुलिस की छवि को बहुत ही गंदा किया है। उन्होंने रुपये लेकर अपना ईमान बेच दिया और बेगुनाह को गुनाहगार बनाकर जेल भेज दिया। महीनों ये बेकसूर जिला जेल की दीवारों से सिर टकराते रहे लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं मिला। उनका परिवार सड़क पर आ गया। किसी का घर तो किसी का मकान बिक गया। लेकिन इसके बाद भी कुछ लोगों को इंसाफ मिला लेकिन कुछ लोग अब भी इंसाफ के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।

हलवाई को बना दिया डकैत
सुभाषनगर के रहने वाले मनोज कश्यप को इज्जतनगर पुलिस ने डकैती के मामले में गिरफ्तार किया और बिना पूछताछ के ही उसे जेल भेज दिया। सात माह तक जेल में रहने के बाद मनोज की पत्नी पुलिस अधिकारियों के चक्कर काटती रही लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी। मीडिया ने जब उसके मुद्दे को उछाला तो तत्कालीन एडीजी प्रेम प्रकाश ने मामले की जांच कराई तो पता चला कि जिस मनोज कश्यप को पुलिस ने जेल भेजा है वह तो बेकसूर था। जब उसी नाम का व्यक्ति उसी मोहल्ले में रहता है। वह लुटेरा था। इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। कई मामलों में मीडिया ने लगातार सच को उठाया तो मीडिया ने उन्हें इंसाफ दिलाया।

मजदूर को बना दिया डोडा तस्कर
बिथरी के नवाबगंज का निवासी शाहबाज एक दुकान पर काम करता था। 8 अप्रैल 2018 को काम से लौटकर घर जा रहा था। इसी बीच बिथरी में पुलिस ने एक ईट भट्ठे पर दबिश देकर छह कुंतल डोडा बरामद किया और आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। शाहबाज पास में लगे नल पर पानी पी रहा था। पुलिस उसे थी ले आई और डोडा तस्कर बनाकर जेल भेज दिया। विवेचक ने भट्ठा मालिक, उसके रिश्तेदार समेत सात लोगों के नाम रुपये लेकर निकाल दिए। सिर्फ शाहबाज के नाम पर चार्जशीट दाखिल कर दी, जबकि वह बेकसूर था। तमाम शिकायतों के बाद मामले की जांच की गई तो पता चला की सच में वह बेकसूर था। लेकिन आज भी वह पुलिस के कारण न्यायालय के चक्कर काटने को मजबूर है।

बबली से छेड़खानी कजरी के बयान
आंवला में एक मारपीट के मामले में सजा कराने के लिए युवती की तरफ से मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामले में कार्रवाई हो इसके लिए वादी ने दरोगा से मिलकर नाबालिग बेटी को कोर्ट में पेश कराकर छेड़खानी का आरोप लगावाते हुए बयान दर्ज करा दिए। सच्चाई सामने आने पर पीड़ित ने मामले की जांच कराई। क्राइम ब्रांच ने जब जांच की तो पता चला की युवती ने मुकदमा दर्ज कराया था और किशोरी के बयान दर्ज कराए गए थे।

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