हल्द्वानी : आखिर कहां गए एमबीपीजी के 12 कंप्यूटर

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हल्द्वानी,अमृत विचार। कोराना महामारी के दौरान एमबीपीजी कालेज की ओर से प्रशासन को कंप्यूटर दिये गये थे लेकिन अब कालेज प्रबंधन कंप्यूटर के आने की राह तक रहा है। कालेज प्रबंधन की ओर से जिलाधिकारी को तीन बार पत्राचार कर दिया गया है। इसके बावजूद जिलाधिकारी की ओर से सही जवाब नहीं दिया गया है। …

हल्द्वानी,अमृत विचार। कोराना महामारी के दौरान एमबीपीजी कालेज की ओर से प्रशासन को कंप्यूटर दिये गये थे लेकिन अब कालेज प्रबंधन कंप्यूटर के आने की राह तक रहा है। कालेज प्रबंधन की ओर से जिलाधिकारी को तीन बार पत्राचार कर दिया गया है। इसके बावजूद जिलाधिकारी की ओर से सही जवाब नहीं दिया गया है। वहीं, कंप्यूटर कहां पर हैं, किसी को पता नहीं है। बस कालेज प्रबंधन को टरकाया जा रहा है।

एमबीपीजी डिग्री कालेज में कंप्यूटर लैब में 20 कंप्यूटर थे। जहां पर विद्यार्थियों को कंप्यूटर की शिक्षा दी जाती है। कोरोना महामारी के चलते प्रशासन की ओर से बीते मार्च महीने में कालेज प्रबंधन से कंप्यूटर की डिमांड की गयी थी। इस पर कालेज प्रबंधन की ओर से लैब से 12 कंप्यूटर उपलब्ध कराये गये थे। नौ महीने से अधिक का समय हो गया है और कालेज प्रबंधन को कंप्यूटर नहीं मिले हैं। कालेज प्रबंधन की ओर से जिलाधिकारी डॉ. सविन बंसल से तीन बार पत्राचार किया गया है।

कालेज प्रबंधन के मुताबिक, अब तक जिलाधिकारी डॉ. बंसल की ओर से सही जवाब नहीं मिला है। एमबीपीजी कालेज के प्राचार्य डॉ. बीआर पंत ने बताया कि कोरोना के दौरान प्रशासन की ओर से कंप्यूटर की डिमांड की गयी थी। इस पर लैब से 12 कंप्यूटर दिये गये थे। जिलाधिकारी से पत्राचार किया गया है। फिलहाल अभी तक कालेज को कंप्यूटर नहीं मिल सके हैं।

  • एमबीपीजी कालेज की अनदेखी
    हल्द्वानी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यूएसनगर जिलाधिकारी की ओर से रुद्रपुर के एसबीएस कालेज को 50 लाख रुपये दिये गये हैं। कहा कि एमबीपीजी कालेज की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना था कि कालेज को कुछ दें नहीं तो लिया हुआ सामान ही जल्द लौटा दिया जाए।
  • दो कंप्यूटर स्टेडियम में धूल फांक रहे
    हल्द्वानी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि एमबीपीजी कालेज के दो कंप्यूटर हल्द्वानी के स्टेडियम में लगे हुए हैं। उनका कहना था कि उन्हें सिर्फ टरकाया जा रहा है। कंप्यूटर के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो एक से दूसरे विभाग का नाम बताया गया। इस दौरान विभागों से बात करने पर अहसास हुआ कि कंप्यूटर हैं कहां, किसी को पता नहीं।