बरेली: कागजों में धान खरीद का लक्ष्य पूरा, केंद्रों से लौटाए जा रहे किसान

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। जिले में 1 अक्टूबर से शुरू हुई धान की सरकारी खरीद 31 जनवरी तक होनी है। सरकारी आंकड़ों में 1.75 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष 43 हजार किसानों से सवा दो लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है मगर हकीकत यह है कि लक्ष्य पूरा होने पर बड़ी संख्या में किसान …

अमृत विचार, बरेली। जिले में 1 अक्टूबर से शुरू हुई धान की सरकारी खरीद 31 जनवरी तक होनी है। सरकारी आंकड़ों में 1.75 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष 43 हजार किसानों से सवा दो लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है मगर हकीकत यह है कि लक्ष्य पूरा होने पर बड़ी संख्या में किसान परेशान हैं। उन्हें लक्ष्य पूरा होने की बात कहकर लौटाया जा रहा है। वहीं, माफिया सरकारी केंद्रों से लेकर राइस मिल मालिकों तक किसानों से औने-पौने दाम में खरीदे धान को सरकारी धान में चढ़वाने की कोशिशों में लगे हैं।

इधर, जिला प्रशासन गड़बड़ी करने वालों पर सख्त है। कई केंद्र प्रभारी निलंबित करने के साथ ही लेखपालों पर एफआईआर कराई जा चुकी है। इसके बावजूद गड़बड़ी तो नहीं रुकी लेकिन धान खरीद में माफियों और बिचौलियों को शामिल न कर पाने का खतरा भांपकर एजेंसियां धान खरीद से हाथ खड़े करने लगी हैं। धान खरीद के जिले में यूपीएसएस ने 23 केंद्र ले रखे थे। पहले तो शासन से शुरुआत में यूपीएसएस को धान खरीद से बाहर कर दिया गया था।

बाद में यह एजेंसी खरीद में शामिल की गई थी। अब प्रशासन की सख्ती बढ़ी तो अचानक यूपीएसएस ने धान खरीद से कदम पीछे हटा लिए। लक्ष्य पूरा होने और आर्थिक स्थिति खराब होने का हवाला देकर केंद्र सरेंडर करने की चिट्ठी लिखी। इसके बाद केंद्र बंद हो गए। इसी तरह क्रय एजेंसी नैफेड के 15 क्रय केंद्र थे।

इनके क्रय केंद्रों पर गड़बड़ी मिलने के बाद प्रभारियों पर कार्रवाई की गई तो लक्ष्य पूरा होने और आर्थिक दिक्कत का हवाला देते हुए नैफेड भी धान खरीद से पीछे हट गई। पीसीएफ, यूपी एग्रो, पीसीयू समेत कई अन्य एजेंसियों के भी केंद्र बंद हो गए हैं। जिले में कुल मिलाकर 113 केंद्र बंद कर दिए गए हैं। क्रय एजेंसियां भले ही केंद्र बंद करने के पीछे वजह कुछ भी बताएं मगर इसे प्रशासन की सख्ती से ही जोड़कर देखा जा रहा है।

इस बार 38 हजार क्विंटल ज्यादा खरीदा गया धान
धान खरीद के दो साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल की अपेक्षा इस बार 11 हजार किसानों से 38 हजार क्विंटल धान अधिक खरीद गया है। सरकारी आंकड़ों में वर्ष 2019-20 में 1.94 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी जबकि इस वर्ष 1.75 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष 2.32 लाख मीट्रिक धान खरीदा जा चुका है। इससे स्पष्ट है कि धान खरीद और किसानों की संख्या बढ़ी है मगर हकीकत यह है कि सैकड़ों किसान अब भी क्रय केंद्रों के बंद होने की वजह से धान बेचने को परेशान हैं।

सीएम पोर्टल पर हो चुकी है शिकायत
मीरगंज, नवाबगंज, बहेड़ी, आंवला में यूपीएसएस, पीसीयू समेत कई एजेंसियों के क्रय केंद्र बंद हो चुके हैं। इनके बंद होने से सबसे ज्यादा दिक्कत उन किसानों को है जिन्होंने खरीद शुरू होने पर केंद्रों पर बिचौलियों के सक्रिय होने की वजह से धान बेचा नहीं था। उन्हें आस थी कि आखिरी समय में केंद्रों पर धान कम पहुंचने से बिचौलियों की सक्रियता कम हो जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अचानक केंद्र बंद होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई। हजारों क्विंटल धान उनके पास डंप पड़ा है। मीरंगज के तमाम किसान तो इसकी शिकायत सीएम पोर्टल पर भी कर चुके हैं।

मंडी परिसर में लगा धान के बोरों का ढेर
पिछले दिनों बारिश में सैकड़ों बोरी धान भीगने पर जिलाधिकारी नितीश कुमार ने तिरपाल, धान का उठान आदि व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी स्थिति जस की तस है। शहर स्थित अनाज मंडी के अलावा नवाबगंज मंडी परिसर में केंद्रों पर धान की बोरियों का ढेर लगा है। धान के उठान की व्यवस्था अब भी धीमी है। इसके अलावा टिन शेड की मरम्मत को लेकर भी अब तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किये गए हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर बारिश हुई तो किसानों का धान भीग जाएगा।

धान की सरकारी खरीद लक्ष्य से अधिक हो चुकी है। किसानों का नियमित तरीके से भुगतान भी हो रहा है। खरीद पूरी होने या अन्य किसी समस्याओं की वजह से शासन स्तर से यूपीएसएस समेत कई अन्य एजेंसियों के प्रबंधकों के अनुरोध पर केंद्र बंद कर दिए गए हैं। करीब 25 केंद्रों पर ही धान खरीद चल रही है। – सुनील भारती, डिप्टी आरएमओ

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