बरेली: नेपाल के दो हाथियों ने उत्तराखंड-यूपी बार्डर पर फैलाई दहशत

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अमृत विचार, बरेली। 18 माह बाद फिर नेपाल के दो हाथियों ने उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश बार्डर सीमा पर दहशत फैला दी है। बरेली वन प्रभाग के डीएफओ भरत लाल ने हाथियों को बहेड़ी की सीमा में घुसने से रोकने के लिए न केवल वनकर्मियों की टीमें तैनात की हैं बल्कि तराई केंद्रीय वन प्रभाग (उत्तराखंड) के …

अमृत विचार, बरेली। 18 माह बाद फिर नेपाल के दो हाथियों ने उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश बार्डर सीमा पर दहशत फैला दी है। बरेली वन प्रभाग के डीएफओ भरत लाल ने हाथियों को बहेड़ी की सीमा में घुसने से रोकने के लिए न केवल वनकर्मियों की टीमें तैनात की हैं बल्कि तराई केंद्रीय वन प्रभाग (उत्तराखंड) के एसडीओ से भी संपर्क कर हाथियों को वापस भेजने की रणनीति बनाई है।

डीएफओ के साथ मुख्य वन संरक्षक रुहेलखंड जोन ललित कुमार वर्मा भी हाथियों के सीमा पर पहुंचने को लेकर अलर्ट हैं। बताया जा रहा है कि दोनों हाथी नेपाल से आए हैं। सीमा पर पहुंचे हाथियों का रास्ता भी पिछली बार आए हाथियों के जैसा दिख रहा है। जुलाई, 2019 में नेपाल से दो हाथी पीलीभीत के रास्ते बहेड़ी सीमा में पहुंचे थे। मुख्य वन संरक्षक वर्मा ने बताया कि बहेड़ी और किच्छा सीमा क्षेत्र में हाथियों का मूवमेंट है। वहां के ग्रामीणों को सक्रियता बरतते हुए गन्ने के खेतों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।

बहेड़ी रेंज के समस्त स्टाफ को निगरानी में लगाया है। बहेड़ी सीमा से 10 किलोमीटर दूर हाथियों की चहलकदमी देखी गई है। हालांकि, यह भी आशंका जताई जा रही है कि दोनों हाथी रात में बहेड़ी सीमा में दाखिल हो सकते हैं। हाथियों के सितारगंज-पंतनगर-नैनीताल मार्ग पर चलने का वीडियो भी वायरल हो रहा है। ग्रामीण दूर से उन्हें भगाते हुए दिख रहे हैं।

जून, 2019 में हाथियों ने ले ली थी दो लोगों की जान
जून, 2019 की रात नेपाल से भटकर पीलीभीत के रास्ते दो जंगली हाथी बहेड़ी क्षेत्र में घुसे थे। खेतों को नुकसान पहुंचाने के साथ दोनों हाथियों ने दो लोगों को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया था। हाथी तिगड़ी गांव तक पहुंचे थे। हाथी वन कर्मचारियों पर कई बार हमलावर हुए थे। वन्य कर्मी हेमंत पर जानलेवा हमला किया था।

तब तत्कालीन थाना प्रभारी श्याम सिंह ने दो हवाई फायर कर किसी तरह अपनी जान बचाई थी। कई लोग जान बचाने को नदी में कूद गए थे। इलाज के दौरान वनकर्मी की मौत हो गई थी। एक अन्य ग्रामीण की जान भी गई थी। दोबारा हाथियों के आने से बहेड़ी क्षेत्र के ग्रामीणों के पुराने जख्म ताजा हो गए हैं। उन्हें डर सता रहा है कि इस बार न हाथी किसी पर हमला कर दें।

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