बरेली: मिलेगी राहत, सेना की भूमि पर ओवरब्रिज निर्माण को मिली अनुमति

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली,अमृत विचार। रक्षा मंत्रालय से एनओसी जल्द जारी होगी… यह सुनते-सुनते दो साल गुजर गए। इससे लालफाटक क्षेत्र के साथ उस तरफ जाने वालों की दुश्वारियां बढ़ती चली गईं। सेतु निगम के अफसरों पर दबाव तो था ही, डीएम-मंडलायुक्त भी एनओसी न मिलने को लेकर परेशान हो गए थे। हालांकि, लोगों को जल्द राहत मिलेगी। …

बरेली,अमृत विचार। रक्षा मंत्रालय से एनओसी जल्द जारी होगी… यह सुनते-सुनते दो साल गुजर गए। इससे लालफाटक क्षेत्र के साथ उस तरफ जाने वालों की दुश्वारियां बढ़ती चली गईं। सेतु निगम के अफसरों पर दबाव तो था ही, डीएम-मंडलायुक्त भी एनओसी न मिलने को लेकर परेशान हो गए थे। हालांकि, लोगों को जल्द राहत मिलेगी। रक्षा मंत्रालय से एनओसी मिल गई है। इससे अधिकारियों का कहना है कि 2021 में ओवरब्रिज का निर्माण पूरा हो जाएगा। रेलवे भी अपने हिस्सों में तेजी से कार्य करा रहा है।

12 जनवरी की सुबह खुशखबरी लेकर आई। कैंट की ओर उतरने वाले लालफाटक ओवरब्रिज के हिस्से को बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय की अनुमति मिल गई। एनओसी के संबंध में अनुमति पत्र जारी होने का संदेश संयुक्त सचिव शासन का सुबह मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद के पास पहुंच गया है। वर्किंग परमिशन का पत्र भी आ गया है।

मंडलायुक्त ने बताया कि दो दिन में अनापत्ति प्रमाण पत्र भी आ जाएगा। प्रॉपर चैनल से शासन में होते हुए अनापत्ति प्रमाण पत्र बरेली आएगा। मंडलायुक्त ने सेतु निगम के वरिष्ठ अधिकारी को फोन करके सूचना देने के साथ ही कैंट की ओर वाले हिस्से को छह माह में पूरा कराने के निर्देश दिए। 2016 में स्वीकृति मिलने के बाद से ओवरब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है। बदायूं की तरफ वाले हिस्से का निर्माण पूरा हो चुका है। कैंट की तरफ वाला हिस्सा शेष है।

एनओसी को लेकर केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, सांसद धर्मेंद्र कश्यप भी कई बार रक्षामंत्री से मुलाकात कर चुके थे। 28 दिसंबर, 2020 को नोडल अधिकारी/अपर मुख्य सचिव (सूचना) नवनीत सहगल बरेली आए तो तब उन्होंने रक्षा मंत्रालय में बात करके यह बताया कि सात दिन में एनओसी जारी हो जाएगी। तब हर किसी की उम्मीद सात दिनों पर टिकी थीं। सात दिन गुजर गए लेकिन आस बनी रही। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मेहनत रंग लाई।

जाम से निजात दिलाने को 2016 में स्वीकृत हुआ था ओवरब्रिज
लालफाटक क्रासिंग पर जाम अधिक होने के चलते वर्ष 2016 में राज्य सरकार ने ओवरब्रिज स्वीकृत किया था। ओवरब्रिज का एक हिस्सा कैंट और दूसरा बदायूं रोड को जोड़ेगा। कैंट एरिया में 6500 वर्गमीटर जमीन पर ओवरब्रिज का निर्माण होना है। रक्षा मंत्रालय की एनओसी पर मामला अटका हुआ था। दो साल पहले रक्षा संपदा विभाग की तरफ से संयुक्त सर्वे के बाद एनओसी के लिए प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय भेजा गया था। जिलाधिकारी नितीश कुमार भी रक्षा मंत्री से फोन पर बात कर चुके थे। 84 करोड़ रुपये की लागत से लालफाटक पर 980 मीटर लंबा ओवरब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है।

रेलवे ने 24 पिलर के लिए निर्माण कार्य शुरू किया
लालफाटक के निर्माणाधीन ओवरब्रिज के बीच दोनों क्रासिंग के ऊपर आरओबी निर्माण कराने के लिए रेलवे ने तेजी से कार्य शुरू करा दिया है। ब्रांच लाइन और बड़ी लाइन के बीच में रेलवे 24 पिलर बनाएगा। हिस्सों को जोड़ने के लिए 32 गार्डर रखे जाएंगे। पाइलिंग का 65 प्रतिशत कार्य हो चुका है। रेलवे के कान्ट्रेक्ट इंजीनियर सुरेद्र सिंह के अनुसार छह माह में रेलवे सिविल कार्य पूरा करते हुए ओवरब्रिज के हिस्सों को जोड़ देगा। ब्रांच लाइन पर आठ फाउंडेशन बनाए जाएंगे। उनमें दोनों साइड से 16 पिलर खड़े होंगे। बड़ी लाइन पर चार फाउंडेशन बनेंगे और आठ पिलर खड़े किए जाएंगे। रेलवे के हिस्से में 46 मीटर के दो और 35 मीटर के दो स्पाइन हैं। इनमें 46 मीटर के 16 और 35 मीटर के 16 गार्डर रखे जाएंगे। रेलवे का 30 करोड़ रुपये खर्च होना बताया जा रहा है।

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