बरेली: सख्ती बेअसर, फर्जी सट्टों के सहारे सप्लाई हो रहा गन्ना
अमृत विचार, बरेली। प्रदेश सरकार गन्ना खरीद में पारदर्शिता और किसानों को सहूलियत देने का भले ही दावा करें, लेकिन मिलीभगत के चलते जिले के कुछ केंद्रों पर बिचौलियां खेल करने से बाज नहीं आ रहे। किसानों के लिए पर्ची वितरण के लिए संदेश भेजने के लिए दर्ज किए जा रहे मोबाइल नंबर में माफिया …
अमृत विचार, बरेली। प्रदेश सरकार गन्ना खरीद में पारदर्शिता और किसानों को सहूलियत देने का भले ही दावा करें, लेकिन मिलीभगत के चलते जिले के कुछ केंद्रों पर बिचौलियां खेल करने से बाज नहीं आ रहे। किसानों के लिए पर्ची वितरण के लिए संदेश भेजने के लिए दर्ज किए जा रहे मोबाइल नंबर में माफिया और बिचौलया किस्म के लोग अपना मोबाइल नंबर दर्ज करा रहे हैं।
वहीं , दूसरी तरफ सत्यापन के बाद भी यह खेल विभाग की पकड़ से दूर है। जनपद में इस वर्ष करीब पौने दो लाख किसानों ने 90 हजार हेक्टेयर में गन्ना बोया है, जबकि गत वर्ष रकबा 1.04 लाख हेक्टेयर था। इस बार नवंबर महीने में जिले की समस्त चीनी मिलों ने पेराई सत्र शुरू कर दिया था।
पूर्व की व्यवस्था के तहत पर्ची वितरक किसानों के घर पर्ची पहुंचाते थे, इसमें धांधली की शिकायतें शासन तक पहुंचती थी। लिहाजा सरकार ने कोरोना काल में परेशान किसानों को राहत देने के मकसद से पुरानी व्यवस्था खत्म कर नई व्यवस्था लागू कर दी। इसके तहत किसानों के नंबर पर ऑनलाइन पर्ची भेजी रही है।
लेकिन नेताओं के संरक्षण में पल रहे माफिया गन्ना खरीद सिस्टम में पूरी तरह से हावी हो गए हैं। वह छोटे किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमानी कीमत पर उनका गन्ना खरीद पर्ची वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था में भी सेंध लगा रहे हैं। चहेतों के नाम की पर्ची पर गन्ना डलवाया जा रहा है।
वहीं, सूत्रों की मानें तो पोर्टल पर माफिया ने पंजीकृत किसान की जगह अपना मोबाइल नंबर दर्ज करा दिए हैं। जिन किसानों के मोबाइल नंबर अपडेट नहीं होते हैं, ऐसे किसानों का माफिया पता लगाकर उनके स्थान पर अपना मोबाइल नंबर दर्ज करा देते हैं। इस खेल में एक बड़ा रैकेट फरीदपुर की चीनी मिल में भेजकर मोटी कमाई करने में जुटा है। इस खेल में किसान बेबस और अफसर फेल नजर आ रहे हैं। इसका खामियाजा सैकड़ों किसानों को उठाना पड़ रहा है।
ऐसे चल रहा फर्जी सट्टे पर गन्ना सप्लाई का खेल
गन्ना विभाग और राजस्व विभाग के संयुक्त सत्यापन के बाद भी गन्ना माफिया फर्जी सट्टे बनवाने में कामयाब हो रहे हैं। सत्यापन के दौरान पिछले दिनों बड़ी संख्या में सट्टे निरस्त किए गए थे। इतना सब कुछ होने के बाद भी कुछ माफिया फर्जी सट्टे बनवाकर किसानों से औने-पौने दामों में गन्ना खरीद मोटी कमाई करने में लगे हैं। इधर, डीसीओ पीएन सिंह का कहना है पर्ची वितरण से लेकर सभी तरह की व्यवस्थाएं हाईटेक हैं। सेंटरों और चीनी मिलों की लगातार निगरानी की जा रही है। यदि कहीं गड़बड़ी मिलती है तो संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी।
भुगतान की समस्या से परेशान किसानों ने बढ़ाया गेहूं का रकबा
गन्ना घटतौली से लेकर पर्ची समय से नहीं मिलने समेत कई अन्य दिक्कतें होने पर किसानों ने इस बार गेहूं का रकबा बढ़ा दिया है। वर्ष 2019-20 में करीब एक लाख हेक्टेयर भूमि पर करीब पौने दो लाख किसानों ने गन्ने की फसल की थी। जबकि वर्ष 2020-21 में 80 हजार हेक्टेयर भूमि पर गन्ना उगाया है। करीब बीस हजार हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की फसल नहीं लगी है। ऐसा इसलिए क्योंकि किसानों का मानना है कि गन्ने की फसल लगाने से उसके मूल्य का समय से भुगतान नहीं होता है। अगर धान गेहूं की फसल लगाएंगे, तो जब चाहे उसे बेचकर अपनी जरूरतों को पूरा कर लेंगे।
गन्ना किसानों को कभी सहूलियत नहीं मिली है। सिर्फ सख्ती का दावा किया जाता है। मोबाइल नंबर पर पर्ची भेजने की बात कही गई है, यह व्यवस्था भी कारगर साबित नहीं होती दिख रही। कई बार तो सेंटर पर ऐसे लोग दिख जाते हैं। जिनके पास खेती भी नहीं है।- सीताराम, भुता
सरकार भले ही सख्ती का दावा करें, लेकिन धरातल पर इसका असर नहीं दिखाई देता। गन्ना भुगतान का मामला हो सेंटर पर गन्ना तौल का दिक्कत उठानी ही पड़ती है। पर्ची समय से नहीं आने की वजह से स्थिति यह हो गई कि कहीं गन्ना सूख न जाए। – पोशाकी लाल, त्रिकुनिया
