बरेली: किसान आंदोलन बवाल- किसी ने सरकार को घेरा तो कोई साजिश बता रहा

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, बरेली। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर किसान आंदोलन की कड़ी में आयोजित ट्रैक्टर रैली के दौरान हुए बवाल की हर तरफ चर्चाएं हैं। दो दिन से सोशल मीडिया से लेकर गली मोहल्लों में लोगों के बीच दिल्ली का मामला छाया है। कोई किसान के उग्र तेवरों को लेकर …

अमृत विचार, बरेली। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर किसान आंदोलन की कड़ी में आयोजित ट्रैक्टर रैली के दौरान हुए बवाल की हर तरफ चर्चाएं हैं। दो दिन से सोशल मीडिया से लेकर गली मोहल्लों में लोगों के बीच दिल्ली का मामला छाया है। कोई किसान के उग्र तेवरों को लेकर सवाल उठा रहा है, तो किसी ने कृषि कानूनों को लेकर अब तक निर्णय न लेने पर सरकार की नाकामी बताई है। जनप्रतिनिधियों ने पुलिस के इंतजाम नाकाफी बताकर निंदा की है, तो वहीं कुछ लोगों ने किसान आंदोलन में खुराफातियों के शामिल होने की बात कहकर दिल्ली में हुए बवाल को लेकर चिंता जताई है।

खुद हिंसा कराना चाहती थी सरकार
किसान आंदोलन को लेकर भाजपा सरकार संवेदनशील नहीं है। यही कारण रहा जो इतिहास में कभी नहीं हुआ वह गणतंत्र दिवस पर देखने को मिला। 10 बार की वार्ता और 76 किसानों की शहादत के बाद भी कोई निर्णय सरकार द्वारा नहीं लिया गया है। इसमें पुलिस और सरकार दोनों तरीके से पूरी तरह फेल रहे। इसलिए वही इसको लेकर जिम्मेदार हैं। मिर्जा अशफाक सकलैनी, जिलाध्यक्ष , कांग्रेस

किसान के नाम पर सेंकी जा रही राजनैतिक रोटियां
दिल्ली में किसान आंदोलन की आड़ में भाजपा के पदाधिकारी व उनके शीर्ष नेताओं के संपर्क में रहने वाले कुछ चुनिंदा लोगों ने एक साजिश के तहत माहौल खराब कराने का काम किया है। तिरंगे का अपमान किए जाने की बात गलत है। लाल किला पर तिरंग वहीं फहरा। अब इस प्रकरण में कुल मिलाकर किसानों को मोहरा बनाकर राजनितिक रोटियां सेकी जा रही हैं। अगम मौर्य, सपा जिलाध्यक्ष

अन्नदाता के साथ हो रहा दुर्व्यवहार, बसपा उनके साथ
गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुई घटना निंदनीय है। केंद्र सरकार किसानों के साथ दुर्व्यवहार कर रही है। किसान उपद्रव करने दिल्ली नहीं गए थे। बीजेपी ने आंदोलन खत्म करने को एक रणनीति के तहत बवाल कराया ताकि आंदोलन खत्म किया जाए। किसान सिर्फ कृषि कानूनों के लिए ट्रैक्टर परेड निकालने गए थे। बसपा अन्नदाताओं के साथ खड़ी है। डा. जयपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, बसपा

पूर्व में निर्धारित प्लान के तहत कराया बवाल
सोची समझी साजिश के तहत किसान नेताओं ने देश को अपमानित करने का काम किया है। आंदोलन की आड़ में बवाल करने का प्लान क़ुछ किसान नेता काफी दिन पहले ही तैयार कर चुके थे। इसके बाद भी सरकार और पुलिस ने सब कुछ झेलकर बवाल को शांत कर दिया। विपक्षी पार्टियों के पास अब कोई जवाब नहीं। इसलिए बीजेपी को घेरने का काम कर रहे हैं। पवन शर्मा, जिलाध्यक्ष

किसानों को अपमान नहीं कर सकती सरकार
घटना निंदनीय है।किसानों के नेतृत्व में काफी चूक रही। गणतंत्र दिवस पर परेड निकालने की तैयारी की वजह से किसान नेता अपने मूल एजेंडे से भटक चुके थे। बेहतर होता कि जब पुलिस प्रशासन ने झुककर ट्रैक्टर मार्च की अनुमति दे दी थी तो आंदोलन के नेतृत्व को स्वयं ही अपने को प्रतीकात्मक मार्च तक सीमित कर लेना चाहिए था। सरकार किसानों का अपमान नहीं कर सकती। एमएसपी की गारंटी मिलनी चाहिए थी। -राज नारायण, गांधी विचारक एवं सामाजिक कार्यकर्ता

किसान अपनी जगह ठीक, सरकार सोचे
आंदोलन को जानबूझकर हिंसा से जोड़ने का काम किया गया है। गणतंत्र दिवस पर भी तय रूट पर शांतिपूर्वक रैली निकाली गई। लाल किला पर किसान को उपद्रवी बताकर झंडा फहराने की बात कही जा रही थी, लेकिन अब इसमें भी बीजेपी से जुड़े कार्यकर्ता का नाम सामने आया है। फिलहाल आंदोलनरत किसान अपनी जगह पहले से ही ठीक थे। -गजेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष भाकियू

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