बरेली में लगा प्रधानमंत्री के सपने को ग्रहण, 16500 में से 1800 को ही प्रशिक्षण
बरेली,अमृत विचार। कौशल विकास का प्रशिक्षण दिलाकर युवाओं को स्व-रोजगार के लायक बनाने और निजी क्षेत्रों में नौकरी दिलाने के लिए केंद्र सरकार मोटा बजट खर्च कर रही है। प्रशिक्षण देने वाले संस्थाओं को केंद्र सरकार बतौर ट्यूशन फीस के रूप में मोटा बजट देती है लेकिन जिले के अधिकारी योजना को लेकर सजग नहीं …
बरेली,अमृत विचार। कौशल विकास का प्रशिक्षण दिलाकर युवाओं को स्व-रोजगार के लायक बनाने और निजी क्षेत्रों में नौकरी दिलाने के लिए केंद्र सरकार मोटा बजट खर्च कर रही है। प्रशिक्षण देने वाले संस्थाओं को केंद्र सरकार बतौर ट्यूशन फीस के रूप में मोटा बजट देती है लेकिन जिले के अधिकारी योजना को लेकर सजग नहीं हैं। बरेली में युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ने की प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना पर ग्रहण लगा दिया है।
वर्ष 2020 में जनपद के 16500 युवाओं को प्रशिक्षित कर विभिन्न निजी क्षेत्रों में नौकरी दिलाने का जो लक्ष्य मिला था उसमें से अधिकारी 11 प्रतिशत ही पूरा कर सके। 1800 युवाओं को ही प्रशिक्षित किया। पूर्व में 27 कौशल विकास केंद्र संचालित थे, वर्तमान में 10 केंद्र ही संचालित हैं। प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी मिली या नहीं, इतने केंद्र क्यों बंद हो गए, इसके सटीक आंकड़े भी जिम्मेदारों के पास नहीं हैं। बरेली में कौशल विकास की स्थिति बेहद कमजोर है।
इसे शुक्रवार को सर्किट हाउस पहुंचे कौशल विकास योजना के राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भी स्वीकारा है। उन्होंने बताया कि कौशल विकास केंद्रों ने जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया है। इस दौरान अधिकारी कहने लगे कि 1000 युवाओं को रोजगार दिया है लेकिन आंकड़े कुछ नहीं बता सके। अधिकारी अधूरी तैयारी के साथ राज्यमंत्री से मिलने पहुंचे।
कौशल विकास केंद्रों में फर्जीवाड़ा तो नहीं, जांच के निर्देश
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत जनपद में संचालित केंद्रों पर ज्यादा युवाओं को दिखाकर रकम ऐंठने का फर्जीवाड़ा हो रहा है। ऐसी शिकायतें कौशल विकास विभाग के राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल तक पहुंची हैं। इस पर राज्यमंत्री ने कहा है कि कौशल विकास केंद्रों में कहीं फर्जीवाड़ा तो नहीं हो रहा है, इसकी जांच कराई जाएगी।
जिलाधिकारी को एसडीएम स्तर के अधिकारियों से केंद्रों की जांच कराने के लिए कहा गया है। फर्जी आंकड़े दिखाकर धन ऐंठने वाले चिह्नित किए जाएंगे। अब ऐसा नहीं चलेगा कि 60 प्रतिशत भुगतान लेकर मौज काट रहे हैं। उन्हें 60 प्रतिशत भुगतान लेने का हिसाब देने के साथ कितने युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ा और कितने युवाओं को दक्षता के अनुसार निजी क्षेत्रों में नौकरी दिलाई गई, इसका जवाब देना पड़ेगा।
राज्यमंत्री ने बताया कि 253 कंपनियां कौशल विकास योजना से जुड़ी हैं। 53 कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। योजना की पॉलिसी केंद्र बनाता है। राज्य इसका क्रियान्वयन कराता है। 10 फरवरी से बरेली में रोजगार मेलों का आयोजन कराने की रूपरेखा बनाई जा चुकी है।
