बरेली: फोन पर किसान नेताओं को समझा रहे अफसर, गाजीपुर मत जाना

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली,अमृत विचार। दिल्ली बवाल के बाद किसान आंदोलन को लेकर जिले में पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। किसान संगठनों से जुड़े नेताओं व पदाधिकारियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। उनसे फोन पर बात कर लोकेशन पूछी जा रही है। गाजीपुर न जाने की किसानों को सलाह दी जा रही है। वहीं, कुछ …

बरेली,अमृत विचार। दिल्ली बवाल के बाद किसान आंदोलन को लेकर जिले में पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। किसान संगठनों से जुड़े नेताओं व पदाधिकारियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। उनसे फोन पर बात कर लोकेशन पूछी जा रही है। गाजीपुर न जाने की किसानों को सलाह दी जा रही है। वहीं, कुछ दिन पहले दिल्ली से लौटे किसानों का गाजीपुर जाने का सिलसिला गुपचुप तरीके से जारी है।

वर्तमान की बात करें तो आलम यह है भाकियू समेत कई अन्य संगठनों के पदाधिकारियों को अफसर समझाने में लगे हैं। पूरी कोशिश चल रही है किसान गाजीपुर कूच न करें। मगर यह सब नाकाफी साबित हो रहा है।

कृषि कानूनों को लेकर गाजीपुर बार्डर पर सबसे ज्यादा माहौल गर्म है। बरेली समेत आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में भाकियू समेत अन्य किसान संगठनों से जुड़े पदाधिकारी गाजीपुर में आंदोलनरत किसानों के समर्थन में डटे थे। लेकिन गणतंत्र दिवस पर निकाली गई ट्रैक्टर परेड के दौरान बवाल हो गया। किसानों के आंदोलन की आड़ में खुराफातियों ने लालकिला पर उप्रदव मचाया।

इसके बाद माहौल गर्म तो हुआ दिल्ली पुलिस प्रशासन ने किसानों को खदेड़ दिया। इसके बाद डर सहमे अधिकांश किसान वापस लौट गए थे। लेकिन गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की मार्मिक अपील के बाद माहौल एक बार फिर बदल गया। बड़ी संख्या में किसान गाजीपुर बॉर्डर के लिए लौटने लगे हैं।

दो दिन पहले भाकियू जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह करीब 350 किसानों के साथ गाजीपुर के लिए उस वक्त रवाना हुए थे। जब पुलिस प्रशासन नींद में था। भोर में काफिले के साथ बड़ी संख्या में किसान ट्रक आदि वाहनों से गाजीपुर कूच कर गए। उधर, मुजफ्फरनगर में हुई महांपचायत के बाद वेस्ट यूपी के भाकियू प्रभावित जिलों में चौकसी बढ़ा दी गई है। दिल्ली से लौटे किसान नेताओं पर गुपचुप तरीके से नजर रखी जा रही है। इसके पीछा कारण यह बताया जा रहा कि ये लोग किसानों को दिल्ली ले जा सकते हैं।

मुखबिर और सूचना तंत्र हुए सक्रिय
सूत्रों की मानें तो गाजीपुर में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की मार्मिक अपील और मुजफ्फरनगर में महापंचायत से ऐलान किए जाने के बाद माहौल एक दम बदल गया है। लिहाजा किसान संगठन से जुड़े पदाधिकारियों पर पर नजर रखने को पुलिस और प्रशासन गांवों में अपने मुखबिर और सूचना तंत्र सक्रिय कर दिए हैं। किसान नेताओं से फोन पर बात करने के साथ ही उनकी लोकेशन पूछी जा रहा है। भाकियू जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह गाजीपुर में हैं। उनके संगठन से जुड़े पदाधिकारी से फोन पर पूछा गया कि यदि उन्हें कोई ज्ञापन देना है तो बता दें। गाजीपुर का रुख न करें।

रालोद को राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश का इंतजार
दिल्ली के आंदोलन के दौरान परिस्थितियां बदलने के बाद से सभी किसान संगठन सकते में हैं। रालोद के जिलाध्यक्ष वाकर अली ने बताया गाजीपुर जाने की रणनीति बन चुकी है, लेकिन नेतृत्व के जो दिशा निर्देश प्राप्त होंगे, उसके अनुरूप ही यूनियन काम करेगी। उन्होंने कहा राष्ट्रीय नेताओं पर मुकदमे दर्ज होने के बाद से किसान कार्यकर्ताओं में केंद्र सरकार के प्रति नाराजगी है। इस संबंध में राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत सभी पदाधिकारी किसी भी वक्त बैठक कर सकते हैं। इसलिए निर्देश मिलने को लेकर इंतजार कर रहे हैं।

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