बरेली: बजट से मायूस हैं किसान, बोले- बजट में मिला ‘धोखा’
अमृत विचार, बरेली। किसान आंदोलन को देखते हुए किसान नेताओं को उम्मीद थी कि बजट में खेती-किसानी पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है लेकिन उनके मुताबिक केंद्र सरकार किसानों का भरोसा जीतने में नाकाम रही। ज्यादातर किसानों ने भी बजट-2021 में किसानों के लिए की गई घोषणाओं को नाकाफी बताया। कहा कि सरकार बजट …
अमृत विचार, बरेली। किसान आंदोलन को देखते हुए किसान नेताओं को उम्मीद थी कि बजट में खेती-किसानी पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है लेकिन उनके मुताबिक केंद्र सरकार किसानों का भरोसा जीतने में नाकाम रही। ज्यादातर किसानों ने भी बजट-2021 में किसानों के लिए की गई घोषणाओं को नाकाफी बताया।
कहा कि सरकार बजट में कृषि योजनाओं समेत उन मूल मुद्दों को छूने में नाकाम रही जिन मुद्दों को लेकर पूरे देश का किसान आज सड़कों पर है। सरकार ने पूरी फसलों की खरीद एमएसपी पर किए जाने का कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया जिससे किसान आहत हैं।
विशेषज्ञ मान रहे थे कि मोदी सरकार किसान आंदोलन को देखते हुए पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली राशि को बढ़ा सकती है मगर ऐसा नहीं हुआ। वहीं, वित्त मंत्री ने कृषि सेक्टर के लिए एग्रीकल्चरल क्रेडिट टारगेट (कृषि ऋण लक्ष्य) और अधिक बढ़ाने की बात कही है। इससे भी किसान नाखुश हैं।
बजट में किसानों के लिए घोषणाएं तो कई की गईं लेकिन निचले स्तर पर अधिकारियों की उदासीनता की वजह से किसानों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। किसान की बेटी होने की वजह से मैं स्वयं किसानों का दर्द समझती हूं। कृषि विभाग अगर सजग होगा तो निश्चित ही सरकार की घोषणाओं का किसानों को फायदा मिलेगा।
-तेजस्वरी सिंह, किसान
सरकार 23 फसलों की खरीद की घोषणा करती है लेकिन सच्चाई यह है कि गेहूं और धान के अलावा बाकी फसलों की खरीद नाममात्र को ही हो पाती है। गेहूं-धान की खरीद भी उतनी नहीं होती जितनी किसान चाहते हैं। ऐसे में किसानों की पूरी फसल की खरीद की गारंटी दिए बिना उनकी भलाई की बात करना बेमानी है।
– रितेश पटेल, किसान
देश का बजट आबादी के अनुसार होना चाहिए। देश में किसानों की आबादी लगभग 65 प्रतिशत है लेकिन बजट में उसे तीन-चार प्रतिशत हिस्सा भी नहीं मिल पाता है। यह गरीब किसानों के साथ अन्याय है। सीधे तौर पर कहा जाए तो किसानों को बेवकूफ बनाया जा रहा है।
-वेदप्रकाश, पूर्व प्रधान
किसानों की सबसे बड़ी मांग थी सभी फसलों की खरीद एमएसपी पर करने की घोषणा हो। बजट में इसकी कोई घोषणा नहीं की गई। फसलों की खरीद लागत मूल्य के डेढ़ गुना मूल्य पर करने की बात कहना बिल्कुल झूठ है। सरकार लागत मूल्य को गलत ढंग से निर्धारित करती है, इसलिए किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता है।
– गजेंद्र सिंह, भाकियू नेता
2020-21 में कृषि क्षेत्र के लिए बजट 75 हजार करोड़ रुपये था। इसे घटाकर 65 हजार करोड़ रुपये कर दिया। मार्केट इंटरवेंसन स्कीम, प्राइस सपोर्ट स्कीम और ग्रामीण भारत की महत्वपूर्ण योजना मनरेगा के लिए बजट पिछले सत्र बजट के मुकाबले काफी कम कर दिया गया। कुल मिलाकर यह बजट किसानों को निराशा और हताशा देने वाला रहा।
-डा. हरीश गंगवार, प्राचार्य एलवीएस कालेज, नवाबगंज
केंद्र सरकार ने कृषि में जो सुधार इस बजट में या विगत वर्ष में अपनाएं हैं वे सब लंबे समय में बेशक बहुत अच्छा परिणाम देने वाले हैं। पिछले कई दशकों से कृषि वैज्ञानिक व इससे जुड़े संगठन भी सरकार से यही मांग करते रहे हैं। वर्तमान बजट में कोई ऐसा नया प्रावधान इतना अच्छा नहीं कहा जा सकता जिसका परिणाम तत्काल दिखाई दे।
-कुलदीप विश्नोई, कृषि विशेषज्ञ
बजट में किसानों के लिए कई घोषणाएं की गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लोन की सुविधा बढ़ाने और किसानों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की व्यवस्था की गई। इससे मंडी और वेयरहाउस का निर्माण कराकर किसानों का बोझ कम हो जाएगा।
-धीरेंद्र सिंह, जिला कृषि अधिकारी
