बरेली: खुदी पड़ीं सड़कें, हर तरफ धूल के गुबार
अमृत विचार, बरेली। अफसरों की लापरवाही के कारण बेतरतीब ढंग से खोदी जा रही सड़कों के कारण हर तरफ धूल के गुबार नजर आ रहे हैं। करीब दो साल से ट्रंक सीवर लाइन डालने का कार्य हो रहा है लेकिन इसके लिए खोदी गई मिट्टी से राहगीरों को परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसके …
अमृत विचार, बरेली। अफसरों की लापरवाही के कारण बेतरतीब ढंग से खोदी जा रही सड़कों के कारण हर तरफ धूल के गुबार नजर आ रहे हैं। करीब दो साल से ट्रंक सीवर लाइन डालने का कार्य हो रहा है लेकिन इसके लिए खोदी गई मिट्टी से राहगीरों को परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसके कोई भी इंतजाम कार्यदायी संस्था की ओर से नहीं किए गए हैं।
लेटलतीफ कार्य के कारण सड़कें खुदी पड़ी हैं और मिट्टी सड़क किनारे पड़ी है। कई जगहों घनी लोगों के घरों में धूल की मोटी परत दिनभर में जम जाती है। इन इलाकों से राहगीरों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है लेकिन मानकों की अनदेखी करने वालों पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।
शहर का शायद ही कोई मुख्य मार्ग हो जहां धूल न उड़ रही हो। सीवर कार्य के कारण ईसाइयों की पुलिया से श्यामगंज, कालीबाड़ी से पटेल चौक और चौपुला तक सड़क खुदी पड़ी है। इसमें नगर निगम और श्यामगंज तक सड़क एक लेन खुदी है।
भीड़भाड़ वाली जगह होने के कारण वाहनों का रेला दिनभर रहता है। इसके कारण धूल का गुबार उड़ता रहता है। धूल के ये गुबार कपड़े तो खराब कर ही रहे हैं, बीमारियां भी फैला रहे हैं। श्वांस के जरिए शरीर में मिट्टी के कण प्रवेश कर जा रहे हैं।
कालीबाड़ी रोड का हाल तो यह है कि करीब एक साल से पक्की सड़क कच्चे मार्ग में तब्दील हो गई। धूल के कारण लोग घरों की खिड़की खोलना नहीं चाहते है क्योंकि धूल उनके घरों में प्रवेश कर जाती है। पटेल चौक से चौपुला चौराहे तक की सड़क छह माह से खुदी पड़ी है जिसके कारण दुकानों के सामानों पर धूल की परत जम जाती है।
चौराहे पर ओवरब्रिज के निर्माण के कारण दिनभर धूल उड़ती रहती है। दामोदर स्वरूप पार्क से गांधी उद्यान तक सीवर का कार्य चल रहा है जहां मानकों की अनदेखी के कारण राहगीरों को खासी परेशानी हो रही है। जेसीबी से हो रही खुदाई से मिट्टी इधर-उधर बिखरने से अक्सर यहां धूल के गुबार देखने को मिल रहे हैं।
जुर्माना लगने के बाद भी असर नहीं
सीवर लाइन के कार्य के कारण उड़ने वाली धूल को लेकर नगर निगम ने पिछले साल जल निगम पर ढाई लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसका असर कुछ दिन यह रहा कि जल निगम और नगर निगम दोनों पानी के टैंकर से छिड़काव कराया। इसके कारण धूल से कुछ समय के लिए लोगों को निजात मिली लेकिन समय बीता तो जिम्मेदार भूल गए। इससे एनजीटी के नियमों की अनदेखी खुलेआम हो रही है।
धूल से मनुष्य में श्वांस की परेशानियां, खांसी, कमज़ोरी, स्टेमिना कम होना, एलर्जी, नाक बहना, थकान होना और सांस फूलना, फेफड़ों की अनेक बीमारियों होती हैं। इससे क्षय रोग, फंगस का इन्फेक्शन, आंखों में जलन और घाव हो जाता है। चिड़चिड़ापन, काम में मन न लगना आदि परेशानियां होती हैं। ये सभी परेशानियां बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं एवं दिल, फेफड़े और श्वांस की बीमारी के मरीजों को अधिक परेशान करती है।
-डा. हिमांशु अग्रवाल
धूल उड़ाने वाली कार्यदायी संस्थाओं को नोटिस भेजकर कुछ दिन पहले सचेत किया जा चुका है। निरीक्षण कर जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। एनजीटी के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
-अभिषेक आनंद, नगर आयुक्त
