हल्द्वानी: तो जेल के अंदर से किया गया था फोन रंगदारी वसूलने के लिए…

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हल्द्वानी,अमृत विचार। सितारगंज जेल में बंद हत्या के सजायाफ्ता कैदी ने नैनीताल रोड की महिला सरार्फ से फोन पर रंगदारी मांगी थी। इस मामले में मास्टरमाइंड कैदी के साथ दो महिला समेत पांच लोग शामिल थे। पुलिस ने पांचों को गिरफ्तार कर लिया। मुख्य आरोपी का रिमांड हासिल करने की तैयारी चल रही है। शुक्रवार …

हल्द्वानी,अमृत विचार। सितारगंज जेल में बंद हत्या के सजायाफ्ता कैदी ने नैनीताल रोड की महिला सरार्फ से फोन पर रंगदारी मांगी थी। इस मामले में मास्टरमाइंड कैदी के साथ दो महिला समेत पांच लोग शामिल थे। पुलिस ने पांचों को गिरफ्तार कर लिया। मुख्य आरोपी का रिमांड हासिल करने की तैयारी चल रही है।

शुक्रवार को एसएसपी प्रीति प्रियदर्शिनी ने पत्रकार वार्ता में रंगदारी मामले का खुलासा किया। बताया कि मुख्य आरोपी रुद्रपुर निवासी राहुल राठौर ने एक अखबार में, महिला सरार्फ के वार्षिक श्राद्ध का विज्ञापन देखा था। इस विज्ञापन के नीचे अंकित मोबाइल नम्बर से उसे सरार्फ का नंबर मिला। इसके बाद मुख्य आरोपी ने जेल में मिलने आने वाली दो महिला मित्र उत्तर प्रदेश निवासी अंकिता ओर अंजलि को रंगदारी मांगने के लिए फर्जी मोबाइल सिम का प्रबंध करने को कहा।

महिलाओं ने मुख्य आरोपी द्वारा रची गयी इस साजिश के बारे में उसके भाई दीपक राठौर को बताया। दीपक ने अपने मित्र सिम कार्ड विक्रेता रुद्रपुर के महेंद्र और रामपुर के नरेंद्र से संपर्क किया। विक्रेताओं ने एक फड़ विक्रेता को अपने जाल में फंसाकर नया सिम एक्टिवेट करवाने  के लिए उसका आधार कार्ड और अंगूठे का बायोमैट्रिक निशान हासिल कर लिया। अंकिता ने जेल में मुलाकात के दौरान मुख्य आरोपी को सिम दे दिया। इसके बाद मुख्य आरोपी ने महिला सरार्फ से दल्लू नाम के एक व्यक्ति के नाम से रंजिशन रंगदारी मांगी। मुख्य आरोपी दल्लू से रंजिश निकालने के साथ ही एक तीर से दो शिकार करना चाहता था। मुख्य आरोपी ने रंगदारी मांगने के बाद सिम और मोबाइल को जेल में ही नष्ट कर दिया। पुलिस ने बताया कि इन पांच आरोपियों को कोर्ट पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। मुख्य आरोपी को रिमांड मिलने के बाद और राजफाश होंगे।

आखिर केंद्रीय कारागार में कैसे पहुंचा मोबाइल
हल्द्वानी। केंद्रीय कारागार सितारगंज में मोबाइल का इस्तेमाल होने पर प्रशासन कठघरे में आ गया है। हालांकि अभी तक पुलिस के पास इसका कोई जवाब नहीं है कि जेल में मोबाइल कैसे पहुंचा और कब से इस्तेमाल हो रहा था। एसएसपी ने बताया कि पुलिस जांच में इससे पर्दा उठ जाएगा। इधर, जेल में मोबाइल के इस्तेमाल का पता चलने पर आईजी ने जांच बिठा दी है।